{"_id":"628a7e9d63d2ce445363d1b5","slug":"forest-conservation-in-dharchula-pithoragarh-news-hld4634914131","type":"story","status":"publish","title_hn":"धारचूला में वनों के संरक्षण पर चर्चा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धारचूला में वनों के संरक्षण पर चर्चा
विज्ञापन
धारचूला में आयोजित कार्यशाला में एसडीएम के सामने अपनी समस्या रखती महिलाएं। संवाद
- फोटो : PITHORAGARH
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
धारचूला (पिथौरागढ़)। एक्शन एड संस्था के सहयोग से आईएफआर, सीएफआर, वन पंचायत सदस्यों की प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें वनों के संवर्द्धन और संरक्षण की जानकारी दी गई।
विकासखंड सभागार में आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ एसडीएम नंदन कुमार ने किया। उन्होंने कहा कि वन पंचायत सदस्यों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। अर्पण संस्था की परियोजना समन्वयक खीमा जेठी ने बताया कि वनों के संरक्षण के लिए एफआरसी और वन पंचायतों के सदस्यों को सक्रिय और संवेदनशील बनाने की जरूरत है। कई गांवों से आए लोगों ने एसडीएम से समस्याएं सुलझाने की मांग की। एसडीएम ने कहा कि संबंधित विभागों के माध्यम से समस्याओं का समाधान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जन परिवारों को आपदा से हुए नुकसान का मुआवजा नहीं मिला है उन फाइलों की जांच की जा रही है। वन विभाग ने वन कानूनों की जानकारी वन पंचायत सदस्यों को दी। इस मौके पर विमला, कमला, दीप्ति, विंद्रा, पूजा, समीरा, गीता, मान सिंह, भूप सिंह, बछेरी देवी, धर्मेंद्र, गोविंद आदि रहे।
परेवा की दो वन पंचायतों का सीमांकन किया जाए
चंपावत। जिले के पाटी विकासखंड की ग्राम पंचायत परेवा की दो वन पंचायतों की भूमि का सीमांकन न होने से ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने डीएम नरेंद्र सिंह भंडारी को ज्ञापन सौंपकर भूमि के सीमांकन की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि ग्राम पंचायत परेवा के तहत वन पंचायत परेवा और वन पंचायत आमलिंग नाम से दो वन पंचायतें है। इनका अलग क्षेत्रफल है। वन पंचायत परेवा का बल्दियाजुड़ नामक तोक कठौली पोखरी वन पंचायत की सीमा से लगा है। इसका भूमि विवाद नहीं सुलझ सका है। गंगा सिंह परवाल, मदन सिंह परवाल आदि ग्रामीणों ने राजस्व विभाग के माध्यम से वन पंचायतों का सीमांकन कराने की मांग की है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विकासखंड सभागार में आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ एसडीएम नंदन कुमार ने किया। उन्होंने कहा कि वन पंचायत सदस्यों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। अर्पण संस्था की परियोजना समन्वयक खीमा जेठी ने बताया कि वनों के संरक्षण के लिए एफआरसी और वन पंचायतों के सदस्यों को सक्रिय और संवेदनशील बनाने की जरूरत है। कई गांवों से आए लोगों ने एसडीएम से समस्याएं सुलझाने की मांग की। एसडीएम ने कहा कि संबंधित विभागों के माध्यम से समस्याओं का समाधान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जन परिवारों को आपदा से हुए नुकसान का मुआवजा नहीं मिला है उन फाइलों की जांच की जा रही है। वन विभाग ने वन कानूनों की जानकारी वन पंचायत सदस्यों को दी। इस मौके पर विमला, कमला, दीप्ति, विंद्रा, पूजा, समीरा, गीता, मान सिंह, भूप सिंह, बछेरी देवी, धर्मेंद्र, गोविंद आदि रहे।
विज्ञापन
परेवा की दो वन पंचायतों का सीमांकन किया जाए
चंपावत। जिले के पाटी विकासखंड की ग्राम पंचायत परेवा की दो वन पंचायतों की भूमि का सीमांकन न होने से ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने डीएम नरेंद्र सिंह भंडारी को ज्ञापन सौंपकर भूमि के सीमांकन की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि ग्राम पंचायत परेवा के तहत वन पंचायत परेवा और वन पंचायत आमलिंग नाम से दो वन पंचायतें है। इनका अलग क्षेत्रफल है। वन पंचायत परेवा का बल्दियाजुड़ नामक तोक कठौली पोखरी वन पंचायत की सीमा से लगा है। इसका भूमि विवाद नहीं सुलझ सका है। गंगा सिंह परवाल, मदन सिंह परवाल आदि ग्रामीणों ने राजस्व विभाग के माध्यम से वन पंचायतों का सीमांकन कराने की मांग की है।
विज्ञापन