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Pithoragarh News: चंपावत में पहली बार महाराष्ट्र के अंगूर की मिठास का मिलेगा स्वाद
Sun, 20 Sep 2026 11:46 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sun, 20 Sep 2026 11:46 PM IST
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चंपावत। जिले में पहली बार थॉमसन प्रजाति के अंगूर की खेती का प्रयोग किया जाएगा। उद्यान विभाग ने इसके लिए पाटी ब्लॉक के रीठासाहिब क्षेत्र का चयन किया है। अंगूर की खेती दो अलग-अलग स्थानों पर कराई जाएगी। इनमें एक अपेक्षाकृत गर्म और दूसरा ठंडा क्षेत्र होगा। दोनों स्थानों पर उत्पादन और पौधों के विकास के आधार पर जिले में अंगूर की खेती की संभावनाओं को परखा जाएगा।
विभाग ने थॉमसन प्रजाति के करीब 1800 पौधों की मांग की है। इसके लिए 150 महिला और पुरुष काश्तकारों का चयन किया गया है। प्रत्येक काश्तकार को 15 पौध उपलब्ध कराए जाएंगे। विभाग का मानना है कि जिले की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों में अंगूर की खेती की संभावनाएं हैं। सफल प्रयोग के बाद इसे अन्य क्षेत्रों में भी बढ़ावा देने की योजना है। महाराष्ट्र के सीडलैस अंगूर की खेती के लिए चयनित काश्तकारों को कृषि विज्ञान केंद्र लोहाघाट की ओर से तकनीकी सहयोग दिया जाएगा। केंद्र के विशेषज्ञ काश्तकारों को पौध रोपण, सिंचाई, खाद-उर्वरक प्रबंधन, रोग नियंत्रण और पौधों की देखभाल की जानकारी देंगे। इससे काश्तकारों को नई फसल की खेती की तकनीक समझने में मदद मिलेगी। जनवरी में पौधों का रोपण किया जाएगा।
जिला उद्यान अधिकारी योगेश भट्ट ने बताया कि जिले में पहली बार थॉमसन प्रजाति के अंगूर की खेती का प्रयोग किया जा रहा है। दो अलग-अलग जलवायु वाले क्षेत्रों में पौधे लगाए जाएंगे। जिस क्षेत्र में उत्पादन और पौधों का विकास बेहतर रहेगा, वहां की परिस्थितियों का अध्ययन कर भविष्य में अंगूर की खेती का विस्तार किया जाएगा। पौध की डिमांड कर दी गई है।
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विभाग ने थॉमसन प्रजाति के करीब 1800 पौधों की मांग की है। इसके लिए 150 महिला और पुरुष काश्तकारों का चयन किया गया है। प्रत्येक काश्तकार को 15 पौध उपलब्ध कराए जाएंगे। विभाग का मानना है कि जिले की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों में अंगूर की खेती की संभावनाएं हैं। सफल प्रयोग के बाद इसे अन्य क्षेत्रों में भी बढ़ावा देने की योजना है। महाराष्ट्र के सीडलैस अंगूर की खेती के लिए चयनित काश्तकारों को कृषि विज्ञान केंद्र लोहाघाट की ओर से तकनीकी सहयोग दिया जाएगा। केंद्र के विशेषज्ञ काश्तकारों को पौध रोपण, सिंचाई, खाद-उर्वरक प्रबंधन, रोग नियंत्रण और पौधों की देखभाल की जानकारी देंगे। इससे काश्तकारों को नई फसल की खेती की तकनीक समझने में मदद मिलेगी। जनवरी में पौधों का रोपण किया जाएगा।
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जिला उद्यान अधिकारी योगेश भट्ट ने बताया कि जिले में पहली बार थॉमसन प्रजाति के अंगूर की खेती का प्रयोग किया जा रहा है। दो अलग-अलग जलवायु वाले क्षेत्रों में पौधे लगाए जाएंगे। जिस क्षेत्र में उत्पादन और पौधों का विकास बेहतर रहेगा, वहां की परिस्थितियों का अध्ययन कर भविष्य में अंगूर की खेती का विस्तार किया जाएगा। पौध की डिमांड कर दी गई है।
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