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Pithoragarh News: उत्तराखंड में पहली बार पंचायत में गूंजेगी वनराजी बेटी की आवाज

Fri, 01 Aug 2025 11:59 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Fri, 01 Aug 2025 11:59 PM IST
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For the first time in Uttarakhand, the voice of Vanraji daughter will resonate in the Panchayat
पिथौरागढ़। उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र से लोकतंत्र के पन्नों पर एक नया अध्याय जुड़ गया है। जो समुदाय दशकों तक जंगली क्षेत्रों में जीवन गुजारने को मजबूर रहा आज उसकी बेटी सियासत के मंच पर न सिर्फ खड़ी है बल्कि विजयी भी हुई है। हम बात कर रहे हैं कृति रजवार की। इस वनराजी बेटी ने क्षेत्र पंचायत चुनाव में सीट जीतकर इतिहास रच दिया है। वह वनराजी समुदाय की पहली महिला हैं जो पंचायत चुनाव लड़ी और जीती हैं।
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कृति रजवार ने डुंगातोली क्षेत्र पंचायत सीट से बीडीसी सदस्य का चुनाव लड़ा और वह भी अनारक्षित सीट से। मुकाबला था दो पुरुष प्रत्याशियों से। कृति ने 45 वोटों से जीत दर्ज कर साबित कर दिया कि अवसर मिले तो पिछड़े वर्ग की महिलाएं किसी को भी टक्कर दे सकती हैं। अब ब्लॉक प्रमुख का पद उनका अगला लक्ष्य है जो इस बार अनुसूचित जनजाति (एसटी) महिला के लिए आरक्षित है। वनराजी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त है। भले ही कृति अनारक्षित सीट से लड़कर बीडीसी सदस्य बनी हैं लेकिन एसटी आरक्षण की वजह से चुनावी समीकरण उनके पक्ष में दिख रहे हैं।
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कौन हैं वनराजी?

उत्तराखंड के सबसे पिछड़े जनजातीय समुदायों में एक वनराजी को वन रावत भी कहा जाता है। इसे विलुप्त हो रही जनजाति माना गया है और इनकी आबादी लगभग 1500 है। ये लोग पिथौरागढ़ और चंपावत जिले के दूरस्थ जंगलों के बीच बसे गांवों के मूल निवासी हैं। इनकी सर्वाधिक आबादी पिथौरागढ़ जिले के डीडीहाट, धारचूला और कनालीछीना विकासखंडों के करीब दस गांवों में है। नेपाल के पश्चिमी भाग में भी इनके कुछ गांव हैं। जंगलों में रहकर जीवनयापन करने वाला यह समुदाय शिक्षा, स्वास्थ्य और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से दशकों तक दूर रहा। अब एक पढ़ी-लिखी वनराजी बेटी ने वो कर दिखाया है जिसकी मिसाल पूरे प्रदेश में दी जा रही है।
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पिता की विरासत, बेटी के हौसले



एमए, बीएड की डिग्री ले चुकी कृति सिर्फ अपने लिए नहीं बल्कि पूरे वनराजी समुदाय के लिए उम्मीद की किरण बनी हैं। कृति के पिता गगन सिंह रजवार खुद भी आरक्षण की वजह से विधानसभा तक पहुंचे थे। साल 2007 और 2012 में जब धारचूला विधानसभा सीट एसटी के लिए आरक्षित हुई तो गगन रजवार ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव जीतकर क्षेत्र का नेतृत्व किया। आज वही राजनीतिक सोच और सेवा का जज्बा कृति में दिख रहा है।

ये केवल मेरी जीत नहीं बल्कि पूरे वनराजी समाज की जीत है जो अब अपने हक के लिए चुप नहीं बैठेगा। मैं ब्लॉक प्रमुख बनने की दावेदारी भी पेश करूंगी।
कृति रजवार, बीडीसी सदस्य, डुंगातोली
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