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नदी में बह रहे लहलहाते खेत
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Sun, 05 Aug 2018 10:35 PM IST
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मुनस्यारी के मत्याली में गोरी नदी में समाते जा रहे खेत
- फोटो : अमर उजाला
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गोरी नदी से सटा मुनस्यारी का मत्याली गांव (खसियाबाड़ा) खतरे की जद में आ गया है। गांव की बेशकीमती जमीन गोरी नदी की भेंट चढ़ रही है। लहलहाते खेत बहने से गांव के लोग दिक्कत में आ गए हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्र में लगातार बारिश होने से गोरी नदी उफान पर है।
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गोरी नदी का जलस्तर बढ़ने से गांव के लोगों के खेत एक-एक कर नदी में समा रहे हैं। नदी जबरदस्त तरीके से भूकटाव कर रही है। फसलों से लहलहा रहे खेतों को बहते देखने के सिवा गांव के लोगों के पास कोई चारा भी नहीं है। नदी का जलस्तर नहीं घटा तो गांव में तबाही मचने के आसार पैदा हो गए हैं। गांव के लोगों के पास खेती लायक जमीन नहीं बचेगी। खेतों के ऊपर बसे गांव के लिए भी भविष्य में खतरा उत्पन्न हो जाएगा। फिलहाल गांव के लोग नदी का जलस्तर घटने की उम्मीद में हैं।
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मिलम ग्लेशियर से निकलने वाली गोरी नदी इस बार जुलाई की शुरुआत से ही विकराल बनी हुई है। उफान पर आई नदी तल्ला भदेली समेत कई गांवों को नुकसान पहुंचा चुकी है। नदी का रौद्र रूप जारी रहा तो लोगों की परेशानियां और बढ़ेंगी।
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