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Pithoragarh News: जौलजीबी में लंपी बीमारी से पांच गायों की मौत
Tue, 13 Jun 2023 11:10 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Tue, 13 Jun 2023 11:10 PM IST
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जौलजीबी में लंपी बीमारी से ग्रसित गाय। संवाद
जौलजीबी (पिथौरागढ़)। सीमांत जिले के पशुओं में फैली लंपी बीमारी रुकने का नाम नहीं ले रही है। नेपाल सीमा से लगे जौलजीबी कस्बे में बीमारी से पांच गायों की मौत होने से पशुपालक मायूस हैं।
पशुओं की देखभाल के लिए क्षेत्र में पशु चिकित्सालय हैं लेकिन इसमें न तो पशु चिकित्सक है और न ही फार्मासिस्ट। अस्पताल चतुर्थ श्रेणी कर्मी के हवाले हैं। जौलजीबी, दुतिबगड़, विजेसार, थाम, गानागाऊं, किमखोला, बलधार, गर्जिया, जोगुड़ा, बगड़ीहाट, नेपाल सीमा से लगे दर्जनों गांव पशु अस्पताल पर निर्भर हैं। पशुपालन विभाग की उपेक्षा पशुपालकों पर भारी पड़ रही है। जिन पशुपालकों की आजीविका पशु और कृषि पर निर्भर है उनके सामने परिवार पालने का संकट होने लगा है। लंपी बीमारी से विक्रम चंद, उपेंद्र पाल, तारा चंद, लक्ष्मण सिंह, हरीश की गायें मर गई हैं। हरीश चंद्र , विक्रम सिंह, राजेंद्र पाल, नवीन चंद, गोविंद चंद, तारा चंद, भूपेंद्र भट्ट, मनोज, शांति देवी, मोहन देव भट्ट, भुवन पाल, विक्रम पाल, गणेश चंद, उमेश, दिनेश, देवेंद्र सिंह, नंदन आदि का कहना है कि यदि शीघ्र क्षेत्र में पशु चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई तो वह आंदोलन को विवश होंगे।
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पशुओं की देखभाल के लिए क्षेत्र में पशु चिकित्सालय हैं लेकिन इसमें न तो पशु चिकित्सक है और न ही फार्मासिस्ट। अस्पताल चतुर्थ श्रेणी कर्मी के हवाले हैं। जौलजीबी, दुतिबगड़, विजेसार, थाम, गानागाऊं, किमखोला, बलधार, गर्जिया, जोगुड़ा, बगड़ीहाट, नेपाल सीमा से लगे दर्जनों गांव पशु अस्पताल पर निर्भर हैं। पशुपालन विभाग की उपेक्षा पशुपालकों पर भारी पड़ रही है। जिन पशुपालकों की आजीविका पशु और कृषि पर निर्भर है उनके सामने परिवार पालने का संकट होने लगा है। लंपी बीमारी से विक्रम चंद, उपेंद्र पाल, तारा चंद, लक्ष्मण सिंह, हरीश की गायें मर गई हैं। हरीश चंद्र , विक्रम सिंह, राजेंद्र पाल, नवीन चंद, गोविंद चंद, तारा चंद, भूपेंद्र भट्ट, मनोज, शांति देवी, मोहन देव भट्ट, भुवन पाल, विक्रम पाल, गणेश चंद, उमेश, दिनेश, देवेंद्र सिंह, नंदन आदि का कहना है कि यदि शीघ्र क्षेत्र में पशु चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई तो वह आंदोलन को विवश होंगे।
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