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नदी की भेंट चढ़ रही ग्रामीणों की उपजाऊ भूमि
ब्यूरो/अमर उजाला, नाचनी
Updated Sat, 28 Jul 2018 10:11 PM IST
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पिथौरागढ थल मुनस्यारी मार्ग में रातीगाड़ के पास आये मलबे को हटाती पोकलैंड मशीन
- फोटो : अमर उजाला
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रामगंगा के उफान पर आने से ग्रामीण सहमे हैं। रामगंगा और रतिगाड़ से लगातार हो रहे कटाव से पिछले पांच वर्षों में ग्रामीणों की 60 नाली उपजाऊ भूमि बर्बाद हो गई। नदी डायवर्जन का कार्य यदि समय पर पूरा नहीं हुआ तो रसियाबगड़ के कई मकानों को गंभीर खतरा हो सकता है।
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रामगंगा, रतिगाड़ के कटाव और भूस्खलन से रसियाबगड़ के 14 परिवारों की उपजाऊ जमीन बह गई है। इसके साथ ही लीची, आम, चारा विकास के प्लाट, चारापत्ती भी भूस्खलन की भेंट चढ़ गए। अब नदी घरों की ओर तेजी से कटाव कर रही है। ग्रामीण पांच वर्षों से प्रशासन से रामगंगा का रुख पलटने की गुहार लगाते रहे, लेकिन कोई कदम नहीं उठाए गए। थल-मुनस्यारी सड़क पर हो रहे भूस्खलन का कारण भी रामगंगा ही है।
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यदि इस वर्ष नदी डायवर्जन का कार्य पूरा नहीं हुआ तो गांव के कुंवर सिंह, नरेंद्र सिंह, तुलसी देवी, हरक सिंह, लाल सिंह, महेंद्र सिंह, खड़क सिंह, अशोक पांगती, रणजीत पांगती, नरेंद्र सिंह, हरेंद्र सिंह के मकान खतरे में आ जाएंगे। किसान गंगा सिंह, गोपुली देवी, विमला देवी, हरीश सिंह ने प्रशासन से उनकी जमीनों को बचाने की गुहार लगाई है। राजस्व निरीक्षक डीडी भट्ट, उप निरीक्षक मनोज कुमार नुकसान का आकलन कर रहे हैं।
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