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Pithoragarh News: रेशम उत्पादन से मजबूत हो रही किसानों की आर्थिकी
Fri, 18 Oct 2024 11:16 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Fri, 18 Oct 2024 11:16 PM IST
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पिथौरागढ़ में रेशम का उत्पादन करते किसान। संवाद
पिथौरागढ़। सीमांत के किसान रेशम उत्पादन से अपनी तकदीर बदल रहे हैं। रेशम उत्पादन किसानों के स्वरोजगार का बेहतर जरिया बना है। सात फार्मों में रेशम उत्पादन हो रहा है। इससे जिले के 376 किसान जुड़े हैं। हर किसान रेशम उत्पादन से सालाना एक लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रहा है।
रेशम विभाग ने सीमांत के किसानों को रेशम उत्पादन से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की पहल शुरू की है। विभाग की पहल पर जिले में रेशन उत्पादन के लिए सात फार्म स्थापित किए गए। ल्यूंन्ठूड़ा, सिरोली, जजुराली, मुवानी, थल, डीडीहाट, बलमरा में स्थापित फार्मों में 376 किसानों को रेशम उत्पादन से जोड़ा गया। परिणाम बेहतर रहा और हर किसान सालाना 95 किलो रेशम का उत्पादन कर एक लाख रुपये से अधिक कमाकर आत्मनिर्भरता की तरफ कदम बढ़ा रहा है। विभाग के मुताबिक अन्य किसानों को भी रेशम उत्पादन से जोड़ा जा रहा है। संवाद
देहरादून, बंगलुरू से उपलब्ध कराए जा रहे हैं रेशम कीट
पिथौरागढ़। विभाग के मुताबिक किसानों को देहरादून और बंगलुरू से रेशम कीट मंगाकर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। 20 से 25 दिन में एक किसान 95 किलो कोकून का उत्पादन कर रहा है। अधिकारियों के मुताबिक ए-ग्रेड के कोकून को विभाग 500 से 600 रुपये प्रति किलो खरीद रहा है इसकी खासी मांग है। साल में दो बार कोकून का उत्पादन हो रहा है।
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कोट
रेशम के उत्पादन के लिए जिले की जलवायु अनुकूल है। जिले में सात स्थानों पर रेशम का उत्पादन किया जा रहा है। विदेशों में भी रेशम की मांग अधिक है। 300 से अधिक किसानों को इससे जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की पहल शुरू की गई है। - अशोक आर्या, प्रदर्शक, रेशम विभाग, पिथौरागढ़।
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रेशम विभाग ने सीमांत के किसानों को रेशम उत्पादन से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की पहल शुरू की है। विभाग की पहल पर जिले में रेशन उत्पादन के लिए सात फार्म स्थापित किए गए। ल्यूंन्ठूड़ा, सिरोली, जजुराली, मुवानी, थल, डीडीहाट, बलमरा में स्थापित फार्मों में 376 किसानों को रेशम उत्पादन से जोड़ा गया। परिणाम बेहतर रहा और हर किसान सालाना 95 किलो रेशम का उत्पादन कर एक लाख रुपये से अधिक कमाकर आत्मनिर्भरता की तरफ कदम बढ़ा रहा है। विभाग के मुताबिक अन्य किसानों को भी रेशम उत्पादन से जोड़ा जा रहा है। संवाद
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देहरादून, बंगलुरू से उपलब्ध कराए जा रहे हैं रेशम कीट
पिथौरागढ़। विभाग के मुताबिक किसानों को देहरादून और बंगलुरू से रेशम कीट मंगाकर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। 20 से 25 दिन में एक किसान 95 किलो कोकून का उत्पादन कर रहा है। अधिकारियों के मुताबिक ए-ग्रेड के कोकून को विभाग 500 से 600 रुपये प्रति किलो खरीद रहा है इसकी खासी मांग है। साल में दो बार कोकून का उत्पादन हो रहा है।
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रेशम के उत्पादन के लिए जिले की जलवायु अनुकूल है। जिले में सात स्थानों पर रेशम का उत्पादन किया जा रहा है। विदेशों में भी रेशम की मांग अधिक है। 300 से अधिक किसानों को इससे जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की पहल शुरू की गई है। - अशोक आर्या, प्रदर्शक, रेशम विभाग, पिथौरागढ़।