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Pithoragarh News: चेहरे बदलते रहे लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं में नहीं आ सका बदलाव
Thu, 04 Jun 2026 10:52 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Thu, 04 Jun 2026 10:52 PM IST
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पिथौरागढ़ में राज्य गठन के बाद अब तक तैनात सीएमओ की सूची। संवाद
पिथौरागढ़। सीमांत जिले में नए सीएमओ की तैनाती हुई है। राज्य गठन के 26 साल में सीमांत जिले में अब तक 25 सीएमओ नियुक्त हुए हैं। बीते छह साल में ही एक के बाद एक छह सीएमओ बदले गए हैं। चेहरे तो बदले जा रहे हैं लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं में बदलाव करना किसी के बस की बात नहीं है। राज्य गठन से अब तक सीमांत जिले में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में कोई बड़ा सुधार नहीं हो सका है। एक तरफ सीमांत जिले की छह लाख की आबादी बदहाल स्वास्थ्य सुविधाओं से जूझ रही है। वहीं दूसरी तरफ सिस्टम सिर्फ सीएमओ बदलने में विश्वास कर रहा है। पेश है सीमांत जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की हकीकत बयां करती एक रिपोर्ट।
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चिकित्सकों के 75 पद रिक्त
सीमांत जिले में जिला, महिला अस्पताल, पीएचसी, सीएचसी सहित 60 से अधिक अस्पताल संचालित हैं। इनमें चिकित्सकों के 174 पद स्वीकृत हैं। सिर्फ 99 चिकित्सकों की अस्पतालों में तैनाती है और 75 पद रिक्त हैं। कई अस्पताल ऐसे हैं जिनमें चिकित्सक न होने से मरीजों को इलाज के लिए अन्य अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
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फार्मासिस्ट न होने से वार्ड बॉय बांट रहे दवा
पहले से ही चिकित्सकों की कमी से जिले के अस्पतालों में इलाज मिलना मुश्किल हो रहा है। फार्मासिस्ट की कमी मरीजों पर भारी पड़ रही है। जिले के अस्पतालों में फार्मासिस्ट के 74 पद स्वीकृत हैं। इन अस्पतालों में वर्तमान में सिर्फ 49 फार्मासिस्ट तैनात हैं और 24 पद रिक्त चल रहे हैं। तीतरी, मुवानी, भागीचौरा, जाबुकाथल, कंडारीछीना, पोखरी, बनकोट सहित 14 अस्पताल ऐसे हैं जो बगैर फार्मासिस्ट के चल रहे हैं। इन अस्पतालों में वार्ड बाॅय, एएनएम या अन्य स्वास्थ्य कर्मी मरीजों को दवा बांटने के लिए मजबूर हैं। ऐसे में फार्मासिस्ट की कमी भी मरीजों की सेहत पर भारी पड़ रही है।
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तीन लाख महिला आबादी का स्वास्थ्य सिर्फ दो विशेषज्ञों पर
जिला महिला अस्पताल में तीन जबकि डीडीहाट, गंगोलीहाट, बेड़ीनाग, धारचूला, मुनस्यारी सीएचसी में एक-एक महिला रोग विशेषज्ञ के पद स्वीकृत हैं। हैरानी है कि सिर्फ महिला अस्पताल में ही दो विशेषज्ञों की तैनाती हो सकी है। जिले के अन्य किसी भी अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। सिर्फ दो विशेषज्ञों पर ही जिले की तीन लाख महिला आबादी के स्वास्थ्य का जिम्मा है। विशेषज्ञों की कमी से जिले की महिलाएं हर छोटी-बड़ी बीमारी के इलाज के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर काट रही हैं।
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बालरोग के सिर्फ दो डॉक्टर
सीमांत जिले में बाल रोग विशेषज्ञों के आठ पद स्वीकृत हैं। सिर्फ जिला अस्पताल और डीडीहाट सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ तैनात हैं वह भी सेवा विस्तार के जरिए। यानि साफ है कि जिले में स्वास्थ्य विभाग एक भी स्थायी बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं कर सका है। जिम्मेदार अधिकारियों के बदले जाने के बाद भी जिले में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और सुविधाओं में बदलाव नहीं हो रहा है इस पर सवाल उठ रहे हैं।
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एक भी रेडियोलॉजिस्ट नहीं
जिले में एक भी रेडियोलॉजिस्ट का न होना सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जिला अस्पताल में एक सामान्य चिकित्सक को छह महीने का रेडियोलॉजी का प्रशिक्षण देकर जिले भर की गर्भवतियों और मरीजों का अल्ट्रासाउंड करने की व्यवस्था की गई है। गर्भवतियों के लिए भी कई किलोमीटर दूर से सफर कर जांच के लिए जिला मुख्यालय पहुंचना मजबूरी बना है।
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चिकित्सकों के 75 पद रिक्त
सीमांत जिले में जिला, महिला अस्पताल, पीएचसी, सीएचसी सहित 60 से अधिक अस्पताल संचालित हैं। इनमें चिकित्सकों के 174 पद स्वीकृत हैं। सिर्फ 99 चिकित्सकों की अस्पतालों में तैनाती है और 75 पद रिक्त हैं। कई अस्पताल ऐसे हैं जिनमें चिकित्सक न होने से मरीजों को इलाज के लिए अन्य अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
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फार्मासिस्ट न होने से वार्ड बॉय बांट रहे दवा
पहले से ही चिकित्सकों की कमी से जिले के अस्पतालों में इलाज मिलना मुश्किल हो रहा है। फार्मासिस्ट की कमी मरीजों पर भारी पड़ रही है। जिले के अस्पतालों में फार्मासिस्ट के 74 पद स्वीकृत हैं। इन अस्पतालों में वर्तमान में सिर्फ 49 फार्मासिस्ट तैनात हैं और 24 पद रिक्त चल रहे हैं। तीतरी, मुवानी, भागीचौरा, जाबुकाथल, कंडारीछीना, पोखरी, बनकोट सहित 14 अस्पताल ऐसे हैं जो बगैर फार्मासिस्ट के चल रहे हैं। इन अस्पतालों में वार्ड बाॅय, एएनएम या अन्य स्वास्थ्य कर्मी मरीजों को दवा बांटने के लिए मजबूर हैं। ऐसे में फार्मासिस्ट की कमी भी मरीजों की सेहत पर भारी पड़ रही है।
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तीन लाख महिला आबादी का स्वास्थ्य सिर्फ दो विशेषज्ञों पर
जिला महिला अस्पताल में तीन जबकि डीडीहाट, गंगोलीहाट, बेड़ीनाग, धारचूला, मुनस्यारी सीएचसी में एक-एक महिला रोग विशेषज्ञ के पद स्वीकृत हैं। हैरानी है कि सिर्फ महिला अस्पताल में ही दो विशेषज्ञों की तैनाती हो सकी है। जिले के अन्य किसी भी अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। सिर्फ दो विशेषज्ञों पर ही जिले की तीन लाख महिला आबादी के स्वास्थ्य का जिम्मा है। विशेषज्ञों की कमी से जिले की महिलाएं हर छोटी-बड़ी बीमारी के इलाज के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर काट रही हैं।
बालरोग के सिर्फ दो डॉक्टर
सीमांत जिले में बाल रोग विशेषज्ञों के आठ पद स्वीकृत हैं। सिर्फ जिला अस्पताल और डीडीहाट सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ तैनात हैं वह भी सेवा विस्तार के जरिए। यानि साफ है कि जिले में स्वास्थ्य विभाग एक भी स्थायी बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं कर सका है। जिम्मेदार अधिकारियों के बदले जाने के बाद भी जिले में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और सुविधाओं में बदलाव नहीं हो रहा है इस पर सवाल उठ रहे हैं।
एक भी रेडियोलॉजिस्ट नहीं
जिले में एक भी रेडियोलॉजिस्ट का न होना सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जिला अस्पताल में एक सामान्य चिकित्सक को छह महीने का रेडियोलॉजी का प्रशिक्षण देकर जिले भर की गर्भवतियों और मरीजों का अल्ट्रासाउंड करने की व्यवस्था की गई है। गर्भवतियों के लिए भी कई किलोमीटर दूर से सफर कर जांच के लिए जिला मुख्यालय पहुंचना मजबूरी बना है।