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पप्पू की अंतिम विदाई पर भर आई हर आंख
ब्यूरो/अमर उजाला, थल
Updated Sun, 10 Jun 2018 10:45 PM IST
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गायक पप्पू कार्की के अंतिम संस्कार पर थल के रामगंगा घाट में उमड़ी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
कुमाऊंनी गीतों के स्टार कलाकार पप्पू कार्की की रामगंगा घाट में गमगीन माहौल में अंत्येष्टि की गई। शवयात्रा में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल सहित उत्तराखंड के तमाम लोक कलाकार शामिल हुए। थल के रामगंगा घाट में पप्पू के चाचा हनुमान कार्की और चचेरे भाई सुरेश कार्की ने लोकगायक की चिता को मुखाग्नि दी।
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पप्पू कार्की की नौ जून की सुबह हैड़ाखान मार्ग पर सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। उनके पार्थिव शरीर को रविवार सुबह सात बजे उनके पैतृक निवास शैलावन (थल) लाया गया। हल्द्वानी से पति के शव के साथ आई पप्पू कार्की की पत्नी कविता और पुत्र दक्ष ने भी अंतिम उनके दर्शन किए और रस्मों को पूरा किया। साढ़े आठ बजे अंतिम यात्रा प्रेमनगर से थल के लिए रवाना हुई। तब तक वहां हजारोंम लोगों की भीड़ जमा हो चुकी थी। इस दौरान वाहनों का लंबा जाम लग गया। शव यात्रा के थल पहुंचने पर वहां भी सैकड़ों लोग लोक गायक की अंतिम यात्रा में शामिल होने का इंतजार कर रहे थे।
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पप्पू कार्की, अमर रहे....के नारों से वातावरण गूंज उठा। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल सहित तमाम जनप्रतिनिधियों और लोक कलाकारों ने पार्थिव शरीर को कंधा दिया। थल के रामगंगा घाट में पप्पू के चाचा हनुमान कार्की और चचेरे भाई सुरेश कार्की ने चिता को मुखाग्नि दी। इस मौके पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष दलबहादुर बाफिला, भाजपा नेता शमशेर सत्याल, विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता नरेंद्र टोलिया, रामलीला कमेटी के अध्यक्ष देवराज सत्याल, जिला पंचायत सदस्य सुंदर मेहरा व राजेंद्र बोरा, दुग्ध संघ के पूर्व अध्यक्ष विनोद कार्की, सुरेंद्र पांगती, हरीश जोशी, सांसद प्रतिनिधि कमल कन्याल, प्रभारी थानाध्यक्ष भगवान गिरी गोस्वामी, सुनील सत्याल, नरेंद्र रौतेला, हरीश चुफाल, हरीश कोरंगा आदि मौजूद थे।
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हमन ले अपण दगड़ ली जा...
सुबह सात बजे पैतृक निवास लोक गायक पप्पू का शव पहुंचते ही परिजनों में कोहराम मच गया। बेटे का शव देखते ही उनकी मां कमला देवी गश खाकर गिर गईं। कमला देवी रोते हुए बोल रही थी ‘मेर पोथा, तू हमन अकलै छोड़ बेर किलै गछै? हम अब यां के करनू...’ , ‘हमन ले अपण दगड़ ली जा.....’ (मेरे बेटे, तू हमें अकेले छोड़ कर क्यों गया? अब हम यहां क्या करें, हमें भी अपने साथ ले जा....)। करुण क्रंदन सुनकर वहां सैकड़ों की संख्या में मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। लोगों ने बमुश्किल उन्हें संभाला।