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Pithoragarh: तिमूर से किसानों की आर्थिकी बढ़ाने की कवायद, मुनस्यारी और धारचूला में 500 हेक्टेयर में होगी खेती

Sat, 15 Feb 2025 01:25 PM IST
हीरा मेहरा दिनेश अवस्थी, संवाद
दिनेश अवस्थी, संवाद Published by: हीरा मेहरा Updated Sat, 15 Feb 2025 01:25 PM IST
सार

सगंध पौधा केंद्र (कैप) सेलाकुंई की ओर से पिथौरागढ़ जनपद को तिमूर की घाटी के रूप में विकसित करने की कवायद की जा रही है। इससे यहां के काश्तकारों की आर्थिकी में भी इजाफा होगा।

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Effort to increase the economy of farmers with Timur in pithoragarh District
सगंध पौधा केंद्र का सेटेलाइट सेंटर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सगंध पौधा केंद्र (कैप) सेलाकुंई की ओर से पिथौरागढ़ जनपद को तिमूर की घाटी के रूप में विकसित करने की कवायद की जा रही है। इससे यहां के काश्तकारों की आर्थिकी में भी इजाफा होगा। कैप के जिला प्रभारी सुनील सिंह बर्थवाल ने बताया कि मुनस्यारी और धारचूला में 500 हेक्टेयर भूमि पर तिमूर की खेती की जाएगी। इन क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता का तिमूर होता है। पिथौरागढ़ को तिमूर घाटी के रूप में विकसित करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कैप के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। बर्थवाल ने बताया कि अभी तक जिले में करीब 300 काश्तकार तिमूर की खेती से जुड़े हैं। तिमूर घाटी के तहत 400 काश्तकारों को और जोड़ा जाना है।

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उन्होंने बताया कि मुनस्यारी के दुम्मर, दरकोट, खसियाबाड़ा, दरांती और धारचूला के जयकोट क्षेत्र में अगस्त में काश्तकारों को तिमूर की पौध उपलब्ध कराई जाएगी। एक हेक्टेयर में एक हजार पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए काश्तकारों से बात की जा रही है। इसके अलावा किसान के द्वार कार्यक्रम के तहत किसानों को पांच नाली जमीन में लगाने के लिए 100 पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। यदि कोई किसान अपने खेतों में तिमूर की खेती करना चाहता है तो वह मनरेगा के तहत ग्राम प्रशासक के जरिए प्रस्ताव दे सकता है। उन्हें निशुल्क पौध उपलब्ध कराई जाएगी। कैप की ओर से किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

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देहरादून और सेटेलाइट सेंटर से उपलब्ध कराए जाएंगे पौधे
काश्तकारों को तिमूर के पौधे सगंध पौधा केंद्र सेलाकुंई और सेटेलाइट सेंटर बिषाण, पिथौरागढ़ से उपलब्ध कराए जाएंगे। बिषाड़ नर्सरी में वर्तमान में दो हजार पौधे उपलब्ध हैं। संवाद

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चंपावत और नैनीताल बनेंगे तेजपत्ता हब
कैप के जिला प्रभारी सुनील सिंह बर्थवाल ने बताया कि चंपावत और नैनीताल को तेजपत्ता हब के रूप में विकसित किया जाएगा। ऊधमसिंह नगर में जापानी मिंट, हरिद्वार एवं पौड़ी में लेमन ग्रास, टिहरी में रोजमेरी, चमेली, अल्मोड़ा में गुलाब की खेती की जाएगी। 

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