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कहानी चुनाव की: तब परिवहन निगम की बस और ट्रकों से प्रचार को जाते थे प्रत्याशी, संचार क्रांति के बाद बदला तरीका
Sat, 30 Mar 2024 12:52 PM IST
हीरा मेहरा
दीपक कापड़ी, संवाद
दीपक कापड़ी, संवाद
Published by: हीरा मेहरा
Updated Sat, 30 Mar 2024 12:52 PM IST
सार
Election 2024: भारत में सड़कों का जाल बिछने के बाद प्रचार-प्रसार का तरीका बदल गया, लेकिन एक ऐसा भी दौर था, जब भारत में होने वाले चुनावों के प्रचार-प्रसार के लिए प्रत्याशी और समर्थक बस और ट्रक से प्रचार-प्रसार के लिए जाते थे।
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कहानी चुनाव की
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
संचार क्रांति और भारत में सड़कों का जाल बिछने के बाद प्रचार-प्रसार का तरीका बदल गया, लेकिन एक ऐसा भी दौर था, जब भारत में होने वाले चुनावों के प्रचार-प्रसार के लिए प्रत्याशी और समर्थक बस और ट्रक से प्रचार-प्रसार के लिए जाते थे। 1995 में पहली बार भारत में मोबाइल से बातचीत होने के बाद प्रचार का भी तरीका बदल गया।
95 वर्षीय बुजुर्ग सतगढ़ गांव निवासी राम दत्त कापड़ी बताते हैं कि पहले ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क नहीं थी। प्रत्याशी 80 से 90 किलोमीटर की पैदल यात्रा करने के बाद गांवों में प्रचार प्रसार को पहुंचते थे। मुख्य स्थानों पर सड़क पहुंचने के बाद प्रत्याशी सरकारी बसों में टिकट काटकर और मालवाहक ट्रक से प्रचार-प्रसार के लिए आते थे क्योंकि इस दौर में प्रत्याशियों और नेताओं के पास गाड़ियां नहीं होती थीं। वे बताते हैं कि उन्होंने पहली बार 1955 में दूसरे लोकसभा चुनाव में मतदान किया था। तब अल्मोड़ा संसदीय सीट से बद्री दत्त पांडेय सांसद बने थे। तब वह अल्मोड़ संसदीय क्षेत्रों के गांवों में पैदल प्रचार-प्रसार के लिए जाते थे तब गांव के सबसे सयाने बुजुर्ग से प्रत्याशी संपर्क करते थे और उनसे अपने पक्ष में मतदान की अपील करते थे।
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95 वर्षीय बुजुर्ग सतगढ़ गांव निवासी राम दत्त कापड़ी बताते हैं कि पहले ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क नहीं थी। प्रत्याशी 80 से 90 किलोमीटर की पैदल यात्रा करने के बाद गांवों में प्रचार प्रसार को पहुंचते थे। मुख्य स्थानों पर सड़क पहुंचने के बाद प्रत्याशी सरकारी बसों में टिकट काटकर और मालवाहक ट्रक से प्रचार-प्रसार के लिए आते थे क्योंकि इस दौर में प्रत्याशियों और नेताओं के पास गाड़ियां नहीं होती थीं। वे बताते हैं कि उन्होंने पहली बार 1955 में दूसरे लोकसभा चुनाव में मतदान किया था। तब अल्मोड़ा संसदीय सीट से बद्री दत्त पांडेय सांसद बने थे। तब वह अल्मोड़ संसदीय क्षेत्रों के गांवों में पैदल प्रचार-प्रसार के लिए जाते थे तब गांव के सबसे सयाने बुजुर्ग से प्रत्याशी संपर्क करते थे और उनसे अपने पक्ष में मतदान की अपील करते थे।
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