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Pithoragarh News: ई-केवाईसी का आदेश, सिग्नल का अता-पता नहीं
Thu, 25 Dec 2025 10:35 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Thu, 25 Dec 2025 10:35 PM IST
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बंगापानी (पिथौरागढ़)। डिजिटल युग में भी सीमांत जिले के कई गांवों में संचार सेवा की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। ऐसा ही कुछ हाल है। बंगापानी क्षेत्र का जहां के गांवों की 15 हजार से ज्यादा की आबादी मोबाइल नेटवर्क के लिए परेशान हैं। क्षेत्र में लगे बीएसएनएल के सभी टावर शोपीस बने हुए हैं। इन टावरों का संचालन न होने से क्षेत्र में संचार सुविधा शून्य है। इस कारण राशन कार्ड में दर्ज उपभोक्ताओं की ई-केवाईसी नहीं हो पा रही है। इस कारण उपभोक्ताओं को राशन मिलना भी मुश्किल हो गया है।
बंगापानी तहसील क्षेत्र के गांवों में बेहतर संचार सुविधा उपलब्ध कराने के दावे कर करीब डेढ़ साल पहले बीएसएनएल ने पांच मोबाइल टावर लगाए गए। इन टावरों के लगने के बाद तहसील के जाराजिबली, लुमती, बंगापानी, मेतली, कनार, धामीगांव, मदरमा, मवानी-दवानी, आलम-दारमा, माणीधामी, सिलिंग, खर्तोली, सेरा, सिरतोला, टांगा, लोदी, गोल्फा, बोना, तोमिक सहित 30 से अधिक गांवों में संचार सेवा सुगमता से प्राप्त होती लेकिन ऐसा अब तक तो नहीं हो सका है।
टावर आज तक चालू नहीं किए गए जिस कारण गांवों में फोन की घंटी नहीं बजी। क्षेत्र की 15 हजार से ज्यादा की आबादी आज भी संचार सेवा के लिए जूझ रही है। संबंधित गांवों के लोगों की यह समस्या तब और बढ़ गई जब राशन कार्ड धारकों और इसमें दर्ज हर उपभोक्ता की ई-केवाईसी जरूरी कर दी गई। ई-केवाईसी न होने पर संबंधित उपभोक्ता का राशन बंद कर दिया जाएगा। क्षेत्र में संचार और इंटरनेट सेवा न होने से उपभोक्ताओं के लिए ई-केवाईसी कराना चुनौती बन गया है।
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उपभोक्ता ई-केवाईसी के लिए सस्ता गल्ला की दुकानों और सीएससी में जा रहे हैं लेकिन इंटरनेट सेवा न होने से इन्हें बैरंग लौटना पड़ रहा है। टावरों का संचालन न होने से क्षेत्र के लोगों में आक्रोश है। क्षेत्र के लोगों ने जल्द मोबाइल टावरों का संचालन शुरू करने की मांग की है।
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आपदा या दुर्घटना की सूचना देना भी मुश्किल
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि संचार सुविधा न होने से उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लोगों ने बताया कि आपदा या किसी दुर्घटना की सूचना पुलिस-प्रशासन तक पहुंचाना भी मुश्किल हो जाता है। सबसे अधिक दिक्कत बीमारों और गर्भवतियों को अस्पताल पहुंचाने में आ रही है। एंबुलेंस बुलाने के लिए भी संचार सेवा नहीं है। मदकोट सहित अन्य स्थानों पर जाकर एंबुलेंस बुलानी पड़ रही है। ऐसे में समय पर अस्पताल न पहुंचने से बीमार और गर्भवतियों की जान आफत में फंस जाती है।
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मोबाइल टावर तो लगा दिए गए लेकिन इनका संचालन शुरू नहीं किया जा रहा है। बगैर इंटरनेट के राशन कार्ड धारकों की ई-केवाईसी नहीं हो रही है। डिजिटल इंडिया के दावे क्षेत्र में हवाई साबित हो रहे हैं। - उमेश सिंह धामी, प्रधान, मदरमा
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जल्द ही सभी मोबाइल टावरों का संचालन शुरू होना चाहिए ताकि क्षेत्र के लोगों की दिक्कतें कम हो सकें। ऐसा नहीं हुआ तो क्षेत्र की जनता आंदोलन करने के लिए मजबूर होगी। - भगत सिंह मेहरा, पूर्व प्रधान, मवानी-दवानी
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कई बार मोबाइल टावरों का संचालन शुरू करने की मांग की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। संचार क्रांति के युग में क्षेत्र के घरों में आज भी मोबाइल की घंटी बजना किसी सपने से कम नहीं है। - अनिल सिंह दुबरिया, प्रधान, मवानी-दवानी
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यदि राशन कार्ड धारकों की ई-केवाईसी नहीं हुई तो इनका राशन बंद कर दिया जाएगा। इस नियम को लागू करने से पहले शासन-प्रशासन को हमारे क्षेत्र में संचार सुविधा की सुध लेनी चाहिए। - दुर्गा देवी, प्रधान, जाराजिबली
कोट
सेरा-सिर्तोला, खर्तोली और मवानी-दवानी में टावर चालू कर दिया गया है। कुछ तकनीकी खराबी आई है जिसे जल्द दूर कर क्षेत्र में संचार सुविधा उपलब्ध करा दी जाएगी। - किशोर रावत, एसडीओ, बीएसएनएल, डीडीहाट
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बंगापानी तहसील क्षेत्र के गांवों में बेहतर संचार सुविधा उपलब्ध कराने के दावे कर करीब डेढ़ साल पहले बीएसएनएल ने पांच मोबाइल टावर लगाए गए। इन टावरों के लगने के बाद तहसील के जाराजिबली, लुमती, बंगापानी, मेतली, कनार, धामीगांव, मदरमा, मवानी-दवानी, आलम-दारमा, माणीधामी, सिलिंग, खर्तोली, सेरा, सिरतोला, टांगा, लोदी, गोल्फा, बोना, तोमिक सहित 30 से अधिक गांवों में संचार सेवा सुगमता से प्राप्त होती लेकिन ऐसा अब तक तो नहीं हो सका है।
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टावर आज तक चालू नहीं किए गए जिस कारण गांवों में फोन की घंटी नहीं बजी। क्षेत्र की 15 हजार से ज्यादा की आबादी आज भी संचार सेवा के लिए जूझ रही है। संबंधित गांवों के लोगों की यह समस्या तब और बढ़ गई जब राशन कार्ड धारकों और इसमें दर्ज हर उपभोक्ता की ई-केवाईसी जरूरी कर दी गई। ई-केवाईसी न होने पर संबंधित उपभोक्ता का राशन बंद कर दिया जाएगा। क्षेत्र में संचार और इंटरनेट सेवा न होने से उपभोक्ताओं के लिए ई-केवाईसी कराना चुनौती बन गया है।
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उपभोक्ता ई-केवाईसी के लिए सस्ता गल्ला की दुकानों और सीएससी में जा रहे हैं लेकिन इंटरनेट सेवा न होने से इन्हें बैरंग लौटना पड़ रहा है। टावरों का संचालन न होने से क्षेत्र के लोगों में आक्रोश है। क्षेत्र के लोगों ने जल्द मोबाइल टावरों का संचालन शुरू करने की मांग की है।
आपदा या दुर्घटना की सूचना देना भी मुश्किल
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि संचार सुविधा न होने से उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लोगों ने बताया कि आपदा या किसी दुर्घटना की सूचना पुलिस-प्रशासन तक पहुंचाना भी मुश्किल हो जाता है। सबसे अधिक दिक्कत बीमारों और गर्भवतियों को अस्पताल पहुंचाने में आ रही है। एंबुलेंस बुलाने के लिए भी संचार सेवा नहीं है। मदकोट सहित अन्य स्थानों पर जाकर एंबुलेंस बुलानी पड़ रही है। ऐसे में समय पर अस्पताल न पहुंचने से बीमार और गर्भवतियों की जान आफत में फंस जाती है।
मोबाइल टावर तो लगा दिए गए लेकिन इनका संचालन शुरू नहीं किया जा रहा है। बगैर इंटरनेट के राशन कार्ड धारकों की ई-केवाईसी नहीं हो रही है। डिजिटल इंडिया के दावे क्षेत्र में हवाई साबित हो रहे हैं। - उमेश सिंह धामी, प्रधान, मदरमा
जल्द ही सभी मोबाइल टावरों का संचालन शुरू होना चाहिए ताकि क्षेत्र के लोगों की दिक्कतें कम हो सकें। ऐसा नहीं हुआ तो क्षेत्र की जनता आंदोलन करने के लिए मजबूर होगी। - भगत सिंह मेहरा, पूर्व प्रधान, मवानी-दवानी
कई बार मोबाइल टावरों का संचालन शुरू करने की मांग की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। संचार क्रांति के युग में क्षेत्र के घरों में आज भी मोबाइल की घंटी बजना किसी सपने से कम नहीं है। - अनिल सिंह दुबरिया, प्रधान, मवानी-दवानी
यदि राशन कार्ड धारकों की ई-केवाईसी नहीं हुई तो इनका राशन बंद कर दिया जाएगा। इस नियम को लागू करने से पहले शासन-प्रशासन को हमारे क्षेत्र में संचार सुविधा की सुध लेनी चाहिए। - दुर्गा देवी, प्रधान, जाराजिबली
कोट
सेरा-सिर्तोला, खर्तोली और मवानी-दवानी में टावर चालू कर दिया गया है। कुछ तकनीकी खराबी आई है जिसे जल्द दूर कर क्षेत्र में संचार सुविधा उपलब्ध करा दी जाएगी। - किशोर रावत, एसडीओ, बीएसएनएल, डीडीहाट