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Pithoragarh News: जन औषधि केंद्र की दवा नहीं लिख रहे चिकित्सक
Tue, 27 Aug 2024 11:08 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Tue, 27 Aug 2024 11:08 PM IST
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जिला अस्पताल में जनऔषधि केंद्र। संवादं
पिथौरागढ़। सीमांत जिले में मरीजों को सस्ती दवा उपलब्ध कराने की योजना को खुद चिकित्सक पलीता लगा रहे हैं। अधिकतर चिकित्सक जन औषधि केंद्र में उपलब्ध सस्ती दवा मरीजों को नहीं लिख रहे हैं। ऐसे में मरीज मेडिकल स्टोर से महंगी दवा खरीदने के लिए मजबूर हैं।
जिला अस्पताल में संचालित जन औषधि केंद्र में मानकों के अनुरूप सभी दवा उपलब्ध हैं लेकिन डॉक्टर इन्हें लिखने से परहेज कर रहे हैं। खुद केंद्र संचालक भगवान सिंह ने चिकित्सकों की इस मनमानी को उजागर किया है। आरोप है कि एक चिकित्सक ने तो जन औषधि केंद्र की दवा को ही गलत करार देकर मरीज से इसे वापस करवा दिया।
इस पर उन्होंने पीएमएस को पत्र लिखकर शिकायत की है। अन्य केंद्रों के भी यही हाल हैं। संवाद न्यूज एजेंसी ने जिला अस्पताल में संचालित जन औषधि केंद्र की पड़ताल की तो यहां खांसी, सर्दी जुकाम, एंटीबॉयोटिक, दर्द, आयरन, कैल्शियम, कीड़े की दवा सहित अन्य सभी प्रकार की जीवन रक्षक दवा उपलब्ध मिलीं लेकिन केंद्र में दवा के खरीददार नहीं थे।
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संचालक ने बताया कि यहां आने वाले अधिकांश मरीज बाहर से लिखी एलोपैथिक दवा का पर्चा लेकर पहुंचता है। डॉक्टर जेनेरिक दवाइयों के नाम नहीं लिखते हैं। जिला अस्पताल में हर रोज 700 से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। हर मरीजों के पर्चे पर एलोपैथिक दवा ही लिखी जा रही हैं। संवाद
बुजुर्ग महिला पर्चा लेकर पहुंची, लेकिन नहीं मिली दवा
पिथौरागढ़। जिला अस्पताल में संचालित जन औषधि केंद्र में 50 वर्ष की बुजुर्ग महिला कमला देवी पर्चा लेकर पहुंची। हैरानी है कि पर्चे में ऐलोपैथिक दवाओं के नाम दर्ज थे। ऐसे में संचालक ने दवा देने से हाथ पीछे खींचने पड़े और महिला को मेडिकल स्टोर जाना पड़ा। संवाद
निजी स्वार्थ के चलते लिखी जा रही हैं महंगी दवा
पिथौरागढ़। जिला अस्पताल में जन औषधि केंद्र संचालक भगवान सिंह ने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पतालों में तैनात चिकित्सक निजी स्वार्थ के लिए मरीजों को महंगी दवा लिख रहे हैं। मेडिकल स्टोर संचालकों को फायदा पहुंचाने के लिए चिकित्सक जन औषधि केंद्रों की अनदेखी कर सरकार की सस्ती दवा उपलब्ध कराने की मंशा को फेल साबित कर रहे हैं जो मरीजों के हित में सही नहीं है।
पिथौरागढ़ जिला अस्पताल के पीएमएस डॉ. जेएस नबियाल का कहना है कि अस्पताल में संचालित जन औषधि केंद्र में उपलब्ध दवा ही लिखने के चिकित्सकों को निर्देश दिए गए हैं। केंद्र में दवा उपलब्ध न होने पर ऐलोपैथिक दवा लिखी जा सकती है। मामले की जांच की जाएगी। यदि कोई चिकित्सक बाहर से दवा लिखता मिला तो कार्रवाई होगी।
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जिला अस्पताल में संचालित जन औषधि केंद्र में मानकों के अनुरूप सभी दवा उपलब्ध हैं लेकिन डॉक्टर इन्हें लिखने से परहेज कर रहे हैं। खुद केंद्र संचालक भगवान सिंह ने चिकित्सकों की इस मनमानी को उजागर किया है। आरोप है कि एक चिकित्सक ने तो जन औषधि केंद्र की दवा को ही गलत करार देकर मरीज से इसे वापस करवा दिया।
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इस पर उन्होंने पीएमएस को पत्र लिखकर शिकायत की है। अन्य केंद्रों के भी यही हाल हैं। संवाद न्यूज एजेंसी ने जिला अस्पताल में संचालित जन औषधि केंद्र की पड़ताल की तो यहां खांसी, सर्दी जुकाम, एंटीबॉयोटिक, दर्द, आयरन, कैल्शियम, कीड़े की दवा सहित अन्य सभी प्रकार की जीवन रक्षक दवा उपलब्ध मिलीं लेकिन केंद्र में दवा के खरीददार नहीं थे।
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संचालक ने बताया कि यहां आने वाले अधिकांश मरीज बाहर से लिखी एलोपैथिक दवा का पर्चा लेकर पहुंचता है। डॉक्टर जेनेरिक दवाइयों के नाम नहीं लिखते हैं। जिला अस्पताल में हर रोज 700 से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। हर मरीजों के पर्चे पर एलोपैथिक दवा ही लिखी जा रही हैं। संवाद
बुजुर्ग महिला पर्चा लेकर पहुंची, लेकिन नहीं मिली दवा
पिथौरागढ़। जिला अस्पताल में संचालित जन औषधि केंद्र में 50 वर्ष की बुजुर्ग महिला कमला देवी पर्चा लेकर पहुंची। हैरानी है कि पर्चे में ऐलोपैथिक दवाओं के नाम दर्ज थे। ऐसे में संचालक ने दवा देने से हाथ पीछे खींचने पड़े और महिला को मेडिकल स्टोर जाना पड़ा। संवाद
निजी स्वार्थ के चलते लिखी जा रही हैं महंगी दवा
पिथौरागढ़। जिला अस्पताल में जन औषधि केंद्र संचालक भगवान सिंह ने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पतालों में तैनात चिकित्सक निजी स्वार्थ के लिए मरीजों को महंगी दवा लिख रहे हैं। मेडिकल स्टोर संचालकों को फायदा पहुंचाने के लिए चिकित्सक जन औषधि केंद्रों की अनदेखी कर सरकार की सस्ती दवा उपलब्ध कराने की मंशा को फेल साबित कर रहे हैं जो मरीजों के हित में सही नहीं है।
पिथौरागढ़ जिला अस्पताल के पीएमएस डॉ. जेएस नबियाल का कहना है कि अस्पताल में संचालित जन औषधि केंद्र में उपलब्ध दवा ही लिखने के चिकित्सकों को निर्देश दिए गए हैं। केंद्र में दवा उपलब्ध न होने पर ऐलोपैथिक दवा लिखी जा सकती है। मामले की जांच की जाएगी। यदि कोई चिकित्सक बाहर से दवा लिखता मिला तो कार्रवाई होगी।