बस्तड़ी वालों ने नम आंखों से दिवाली मनाई
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30 जून 2016 को आई आपदा का दर्द शायद बस्तड़ी के लोगों को जीवनभर कचोटता रहेगा। हादसे के शिकार 21 लोगों की याद में एक स्मारक बनाया गया है। दिवाली की रात जब युवा और बुजुर्ग हादसे के शिकार लोगों के नाम पर दीया जलाने के लिए स्मारक पर पहुंचे तो हर आंख नम हो गई और माहौल भावुक हो गया। अलबत्ता लोगों ने बाद में अपने घरों में आकर सादगी के साथ दिवाली मनाई और महालक्ष्मी का पूजन किया। इस बार लोगों ने पहले ही तय कर लिया था कि अब पर्व, त्योहारों को आपदा के दुख में वर्जित करना ठीक नहीं है। खास मौकों पर आपदा के शिकार लोगों को याद किया जाएगा।
आपदा के बाद से ही लोगों को धैर्य दिलाने और बीती बातों को भूलने का आग्रह करने वाले बुजुर्ग सामाजिक कार्यकर्ता शंकरदत्त भट्ट ने एक सप्ताह पहले गांव के लोगों की बैठक कर कहा था कि दिवाली को इस बार सादगी से मनाएंगे। उनके आग्रह पर बृहस्पतिवार रात हर घर से एक-एक दीया हादसे के शिकार लोगों के नाम पर स्मारक पर जलाया गया। बस्तड़ी के आपदा ने हर परिवार को किसी न किसी रूप में कष्ट दिया था। शाम को छह बजे गांव के युवा और बुजुर्ग स्मारक के पास एकत्र हुए। हर मृतक के नाम का दीया जलाया। उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना की। गांव के युवा विनीत भट्ट ने बताया कि हादसे में नौ युवकों को भी जान गंवानी पड़ी थी। यह घटना कोई भी जीवनभर नहीं भूल सकता।
इस बार देश के अन्य शहरों में नौकरी करने वाले कुछ युवा घर पहुंचे हैं। इसके अलावा शनिवार को होने वाले भैयादूज के लिए भी कुछ बहनें मायके आ चुकी हैं। दिवाली की रात बस्तड़ी में कोई आतिशबाजी नहीं हुई। लोगों ने सिर्फ अपने घरों को रोशन किया और पूजा-अर्चना की। पिछले साल बस्तड़ी के लोगों ने आपदा के शोक में दिवाली नहीं मनाई थी।