{"_id":"5e6a650c8ebc3ea82a1bef7e","slug":"divya-s-art-of-art-is-also-threatening-in-germany-russia-pithoragarh-news-hld3769699130","type":"story","status":"publish","title_hn":"लोगों को भा रहे कुमांऊनी ऐंपण वाले मोबाइल कवर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लोगों को भा रहे कुमांऊनी ऐंपण वाले मोबाइल कवर
विज्ञापन
दिव्या की ऐंपण कला की जर्मनी, रूस में भी धमक
कुमाऊंनी ऐंपण वाले मोबाइल कवर की विदेशों से भी आ रही डिमांड
भक्त दर्शन पांडेय
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ की एक छात्रा दिव्या उत्तराखंड की ऐंपण कला को देश-विदेेश में पहचान दिलाने में जुटी हैं। उनके प्रयास से कुमाऊंनी ऐंपण कला के विदेशी भी दीवाने हो रहे हैं। खूबसूरत कुमाऊंनी ऐंपण से सजे मोबाइल फोन कवर, नेम प्लेट और कॉफी या टी-कप की जर्मनी, रूस सहित अन्य देशों से लगातार डिमांड आ रही है।
वनस्पति विज्ञान से एमएससी की पढ़ाई कर चुकी पिथौरागढ़ के घंटाकरण निवासी दिव्या कला में भी निपुण हैं। 22 वर्षीय दिव्या ने घरों की देहरी और मंदिरों में सजाने वाले ऐंपण को जब कॉफी कप, मोबाइल फोन के कवर और लकड़ी की तख्तियों में उकेरना शुरू किया तो यह विदेशियों की भी पसंद बन गए। पिछले तीन साल से ऐंपण कला के प्रचार-प्रसार में जुटी दिव्या ने बताया कि उन्होंने अपने हाथों से बनाई ऐंपण वाले चित्रों को इंटरनेट पर डाला। इसके बाद देश के विभिन्न हिस्सों से ही नहीं विदेशों से भी ऐंपण से सजाए गए सामान की डिमांड आने लगी।
पिथौरागढ़ की घनश्याम ओली चाइल्ड सोसायटी में काम कर रही दिव्या के अनुसार जर्मनी, रूस और दुबई से सबसे अधिक डिमांड आती है। हर माह 10 से 12 आर्डर ही वह लेती हैं। इसमें मोबाइल कवर सबसे अधिक पसंद किए जाते हैं। ऐंपण से सजाया गया एक मोबाइल कवर 400 रुपये से लेकर दो हजार रुपये तक में बिकता है। जिस मोबाइल फोन के लिए डिमांड आती है उस फोन के कवर को दिल्ली से मंगाती है। इसी तरह से नेम प्लेट और कॉफी या टी-कप की कीमत भी निर्धारित की गई है। जितना बारीक और अधिक सजावट होगी उसकी कीमत उतनी ही अधिक होगी। कुमाऊंनी ऐंपण कला के साथ ही राजस्थान की मधुबनी कला में काम कर रही दिव्या कहती हैं कि अपनी संस्कृति और कला को सहेजने में उन्हें काफी खुशी मिलती है। उन्होंने कहा कि वह चाहती हैं कि अन्य देशों में भी कुमाऊंनी ऐंपण को पहचान मिले।
विज्ञापन
फोटो- 11पीटीएच 24पी एवं 25पी-
विज्ञापन
कुमाऊंनी ऐंपण वाले मोबाइल कवर की विदेशों से भी आ रही डिमांड
भक्त दर्शन पांडेय
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ की एक छात्रा दिव्या उत्तराखंड की ऐंपण कला को देश-विदेेश में पहचान दिलाने में जुटी हैं। उनके प्रयास से कुमाऊंनी ऐंपण कला के विदेशी भी दीवाने हो रहे हैं। खूबसूरत कुमाऊंनी ऐंपण से सजे मोबाइल फोन कवर, नेम प्लेट और कॉफी या टी-कप की जर्मनी, रूस सहित अन्य देशों से लगातार डिमांड आ रही है।
वनस्पति विज्ञान से एमएससी की पढ़ाई कर चुकी पिथौरागढ़ के घंटाकरण निवासी दिव्या कला में भी निपुण हैं। 22 वर्षीय दिव्या ने घरों की देहरी और मंदिरों में सजाने वाले ऐंपण को जब कॉफी कप, मोबाइल फोन के कवर और लकड़ी की तख्तियों में उकेरना शुरू किया तो यह विदेशियों की भी पसंद बन गए। पिछले तीन साल से ऐंपण कला के प्रचार-प्रसार में जुटी दिव्या ने बताया कि उन्होंने अपने हाथों से बनाई ऐंपण वाले चित्रों को इंटरनेट पर डाला। इसके बाद देश के विभिन्न हिस्सों से ही नहीं विदेशों से भी ऐंपण से सजाए गए सामान की डिमांड आने लगी।
विज्ञापन
पिथौरागढ़ की घनश्याम ओली चाइल्ड सोसायटी में काम कर रही दिव्या के अनुसार जर्मनी, रूस और दुबई से सबसे अधिक डिमांड आती है। हर माह 10 से 12 आर्डर ही वह लेती हैं। इसमें मोबाइल कवर सबसे अधिक पसंद किए जाते हैं। ऐंपण से सजाया गया एक मोबाइल कवर 400 रुपये से लेकर दो हजार रुपये तक में बिकता है। जिस मोबाइल फोन के लिए डिमांड आती है उस फोन के कवर को दिल्ली से मंगाती है। इसी तरह से नेम प्लेट और कॉफी या टी-कप की कीमत भी निर्धारित की गई है। जितना बारीक और अधिक सजावट होगी उसकी कीमत उतनी ही अधिक होगी। कुमाऊंनी ऐंपण कला के साथ ही राजस्थान की मधुबनी कला में काम कर रही दिव्या कहती हैं कि अपनी संस्कृति और कला को सहेजने में उन्हें काफी खुशी मिलती है। उन्होंने कहा कि वह चाहती हैं कि अन्य देशों में भी कुमाऊंनी ऐंपण को पहचान मिले।
विज्ञापन
फोटो- 11पीटीएच 24पी एवं 25पी-