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Pithoragarh News: नहीं मिली हक की सड़क, खुद बना रहे विकास की राह

Thu, 05 Mar 2026 10:42 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Thu, 05 Mar 2026 10:42 PM IST
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Did not get the rightful road, making his own path to development
पिथौरागढ़। उत्तराखंड के पहाड़ों में पलायन महज एक शब्द नहीं, गहरा जख्म भी है। थल क्षेत्र का बरड़गांव इस जख्म का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है जहां बुनियादी सुविधाओं के अभाव में 70 में से 55 परिवार अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर हो गए। लेकिन अब गांव को पूरी तरह भूतिया गांव बनने से बचाने के लिए यहां के युवाओं और महिलाओं ने खुद कमान संभाल ली है।
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बरड़गांव मुख्य सड़क से महज चार किलोमीटर की दूरी पर है लेकिन यह दूरी तय करने में दशकों बीत गए और विकास की एक ईंट भी यहां नहीं पहुंची। सड़क न होने के कारण बीमारों और गर्भवतियों को डोली में बैठाकर अस्पताल ले जाना पड़ता है। शिक्षा और राशन की दुश्वारियों ने ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया। नतीजतन कभी 70 परिवारों की रौनक से गुलजार रहने वाले गांव में आज सिर्फ 15 परिवार ही शेष बचे हैं।
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चंदा जुटाया और थामे फावड़े
जब शासन-प्रशासन की फाइलों में सड़क गुम रही तो भगवान चंद, देवी चंद और भूपेश चंद जैसे युवाओं ने संकल्प लिया। ग्रामीणों ने आपस में सहयोग राशि जुटाई और जेसीबी मशीन मंगाकर सड़क की कटिंग का काम शुरू कर दिया। इस भगीरथ प्रयास में गांव की महिलाएं भी कंधे से कंधा मिलाकर श्रमदान कर रही हैं।
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रिवर्स पलायन की जगी उम्मीद
खास बात यह है कि जो लोग गांव छोड़कर जा चुके हैं वे भी इस सड़क निर्माण में आर्थिक सहयोग दे रहे हैं। ग्रामीणों को विश्वास है कि यदि यह चार किलोमीटर का रास्ता तैयार हो गया तो शहर जा चुके लोग वापस अपनी माटी की ओर लौटेंगे और गांव फिर से आबाद होगा।

कोट

- हम अपने गांव को उजड़ते हुए अब और नहीं देख सकते। अगर सिस्टम हमारी नहीं सुन रहा तो हम अपनी मेहनत से गांव तक विकास का रास्ता (सड़क) खुद बनाएंगे। - विकल्प और लक्ष्मण चंद, स्थानीय युवा


-सड़क निर्माण के लिए लोनिवि और अन्य विभागों से वार्ता की जाएगी। विधायक निधि से भी सहायता दिलाने का आश्वासन दिया गया है। - दयाल चंद्र मिश्रा, तहसीलदार, थल
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