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चार साल बाद भी अस्तित्व में नहीं आया एएनएम सेंटर
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Sun, 26 Feb 2017 10:36 PM IST
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स्वास्थ्य सुविधा को तरसता नामिक गांव
- फोटो : अमर उजाला
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हिमालय की तलहटी पर बसे नामिक में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली से वहां के लोग बेहद परेशान हैं। वर्ष 2012 में प्रदेश के डीजी हेल्थ ने स्वयं नामिक जाकर एएनएम सेंटर का उद्घाटन किया था, लेकिन अब तक ये एएनएम सेंटर शुरू नहीं हुआ। प्रदेश के मुख्यमंत्री की घोषणा भी इस मामले में कोरी साबित हुई है।
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सड़क मार्ग से 27 किमी की दूरी और समुद्र तल से 2700 मीटर की दूरी पर बसे नामिक में 122 परिवार रहते हैं, लेकिन इनके स्वास्थ्य की देखभाल के लिए सरकार अब तक कोई उपाय नहीं कर पाई है। नामिक में गर्भवती महिलाओं और बच्चों के टीकाकरण तक के इंतजाम नहीं हैं। अमर उजाला ने नामिक की स्वास्थ्य दिक्कतों का सवाल लगातार उठाया है। वर्ष 2012 में नामिक के लोगों का एक शिष्टमंडल राज्यपाल से मिला था। राज्यपाल के आदेश के बाद तत्कालीन डीजी हेल्थ जेेएस पांगती ने नामिक का दौरा किया था। उन्होंने नामिक में एएनएम सेंटर का उद्घाटन किया था। डीजी हेल्थ ने आदेश दिए थे कि बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिले की स्वास्थ्य टीम बारी-बारी से नामिक के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराएगी, लेकिन आदेश हवा में उड़ गए।
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वर्ष 2014 में नामिक के दौरे के समय मुख्यमंत्री हरीश रावत ने नामिक गांव की ही एक ट्रेनिंग प्राप्त युवती को एएनएम नियुक्त करने के आदेश सीएमओ को दिए थे, लेकिन इन आदेशों का भी पालन अब तक नहीं हुआ है। नामिक की प्रधान तुलसी जेम्याल, क्षेत्र पंचायत सदस्य लक्ष्मण सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधा के अभाव के कारण नामिक के लोग हमेशा परेशान रहते हैं। तमाम आश्वासन, वादे कोरे साबित हुए हैं। इन लोगों का कहना है कि एएनएम सेंटर की शुरुआत के लिए चुनाव परिणाम निकलने के बाद सरकार पर दबाव बनाया जाएगा। यदि सरकार ने फिर भी नहीं सुनी तो आंदोलन किया जाएगा।
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