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Pithoragarh News: एक चिकित्सक के भरोसे देवलथल अस्पताल
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पिथौरागढ़। राजकीय एलोपैथिक अस्पताल देवलथल का संचालन एकमात्र चिकित्सक के भरोसे हो रहा है। अस्पताल में जांच की भी कोई सुविधा नहीं है। इससे क्षेत्र की 12,000 की आबादी प्रभावित हो रही है। ऐसे में मरीजों को उपचार के लिए जिला अस्पताल जाना पड़ता है।
जिला मुख्यालय से करीब 25 किमी दूर देवलथल क्षेत्र में खोला गया अस्पताल सुविधाओं के लिए तरस रहा है। राज्य बनने से पहले इस अस्पताल में दो चिकित्सक, फार्मासिस्ट, वार्डबॉय समेत कई कर्मचारी कार्यरत थे। राज्य बनने के बाद लोगों को उम्मीद भी कि अस्पताल का उच्चीकरण कर सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी लेकिन हालात और खराब हो गए।
अब यहां अल्ट्रासाउंड, एक्सरे तो दूर खून जांच तक नहीं हो पाती। आपात स्थिति में मरीजों को उपचार के लिए जिला अस्पताल ही आना पड़ता है। प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा तक उपलब्ध न होने के कारण कई लोग पलायन के लिए भी मजबूर हो रहे हैं।
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दर्जनों गांव का एकमात्र सहारा
पिथौरागढ़। देवलथल अस्पताल में दर्जनों गांवों में रहने वालों का एकमात्र अस्पताल है। लोहाकोट, उड़ई, सानगांव, सौगांव, हराली, बमडोली, चौपता समेत आसपास के गांवों की आबादी इसी अस्पताल पर निर्भर है। इसके बावजूद अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की तरह अस्पताल का संचालन दोपहर तक ही होता है। संवाद
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यूपी के शासनकाल में दो चिकित्सक, आयुर्वेदिक, फार्मासिस्ट समेत पूरा स्टाफ रहता था। मात्र एक चिकित्सक के भरोसे अस्पताल चल रहा है। अस्पताल का उच्चीकरण तो नहीं हुआ लेकिन स्थिति पहले से और खराब हो गई। - जगदीश कुमार, पूर्व जिला पंचायत सदस्य।
देवलथल अस्पताल सिर्फ नाम का अस्पताल है। लोगों को कोई खास सुविधा नहीं मिल पाती। गंभीर मरीज को तो सीधे पिथौरागढ़ अस्पताल ले जाना बेहतर रहता है। गर्भवतियों को सबसे अधिक दिक्कत का सामना करना पड़ता है। - शंकर सिंह सामंत, पूर्व ग्राम प्रधान, लोहाकोट।
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जिला मुख्यालय से करीब 25 किमी दूर देवलथल क्षेत्र में खोला गया अस्पताल सुविधाओं के लिए तरस रहा है। राज्य बनने से पहले इस अस्पताल में दो चिकित्सक, फार्मासिस्ट, वार्डबॉय समेत कई कर्मचारी कार्यरत थे। राज्य बनने के बाद लोगों को उम्मीद भी कि अस्पताल का उच्चीकरण कर सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी लेकिन हालात और खराब हो गए।
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अब यहां अल्ट्रासाउंड, एक्सरे तो दूर खून जांच तक नहीं हो पाती। आपात स्थिति में मरीजों को उपचार के लिए जिला अस्पताल ही आना पड़ता है। प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा तक उपलब्ध न होने के कारण कई लोग पलायन के लिए भी मजबूर हो रहे हैं।
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दर्जनों गांव का एकमात्र सहारा
पिथौरागढ़। देवलथल अस्पताल में दर्जनों गांवों में रहने वालों का एकमात्र अस्पताल है। लोहाकोट, उड़ई, सानगांव, सौगांव, हराली, बमडोली, चौपता समेत आसपास के गांवों की आबादी इसी अस्पताल पर निर्भर है। इसके बावजूद अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की तरह अस्पताल का संचालन दोपहर तक ही होता है। संवाद
यूपी के शासनकाल में दो चिकित्सक, आयुर्वेदिक, फार्मासिस्ट समेत पूरा स्टाफ रहता था। मात्र एक चिकित्सक के भरोसे अस्पताल चल रहा है। अस्पताल का उच्चीकरण तो नहीं हुआ लेकिन स्थिति पहले से और खराब हो गई। - जगदीश कुमार, पूर्व जिला पंचायत सदस्य।
देवलथल अस्पताल सिर्फ नाम का अस्पताल है। लोगों को कोई खास सुविधा नहीं मिल पाती। गंभीर मरीज को तो सीधे पिथौरागढ़ अस्पताल ले जाना बेहतर रहता है। गर्भवतियों को सबसे अधिक दिक्कत का सामना करना पड़ता है। - शंकर सिंह सामंत, पूर्व ग्राम प्रधान, लोहाकोट।