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गांवों में रोजगार की संभावना के बावजूद काम नहीं हुआ

Sat, 11 Feb 2017 10:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Sat, 11 Feb 2017 10:45 PM IST
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Despite the prospect of employment in villages did not work
छह पट्टी सोर की पदयात्रा के दौरान अध्ययन करते प्रतिभागी - फोटो : अमर उजाला

कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर नैनीताल के इतिहास विभाग की ओर से छह पट्टी सोर के गांवों में की गई पदयात्रा का पहला चरण संपन्न हो गया है। प्रख्यात इतिहासकार स्व. राम सिंह और भूविज्ञानी पद्मभूषण प्रो. केएस वल्दिया के गांव इसी छह पट्टी सोर में पड़ते हैं। इतिहास विभागाध्यक्ष डा. गिरधर सिंह नेगी के नेतृत्व में आयोजित इस पदयात्रा के दौरान पाया गया कि गांवों में पर्यटन और उससे जुड़े रोजगार की अपार संभावना होने के बावजूद उस दिशा में अब तक कोई काम नहीं हुआ है। गांव तेजी से खाली हो रहे हैं। खेती को जंगली जानवर बर्बाद कर रहे हैं। कई मकान अब खंडहर में तब्दील होने लगे हैं।

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डा. नेगी ने बताया कि सरकारी योजनाओं को गांवों को आधार मानकर शुरू किया जाना चाहिए। तभी गांव की संस्कृति और इतिहास का संरक्षण हो सकता है। उन्होंने कहा कि भारी विषमताओं के बावजूद लोग आज भी गांवों में होली, चैतोल, आठूं जैसे पर्वों को उल्लास से मना रहे हैं। लोक देवताओं के प्रति लोगों की आस्था कम नहीं हुई है। चार फरवरी को किरीगांव से शुरू हुई यह पदयात्रा कफलानी, बुंगा, महरखोला, कणाकोट, डाबरी, ड्योडार, थलकेदार, संतरा, पोखरा, उदयबुंगा, बड़ावे, पत्थरकोट, बिलाई, खड़किनी, चौबाट, ज्ञालपानी, लोहागाड़, तोली, लमगड़ा, सुंगरखोल, ओखल शिलिंगया, खलकेदार, मरसोली गांवों तक पहुंची। गांवों में पानी का संकट है। पैदल रास्तों की हालत खराब है। खनन का धंधा जोरों पर है। गांवों में रोजगार का कोई साधन नहीं है।
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डा. नेगी ने अपने शोधछात्र सौरभ वल्दिया और नकुल साह के साथ यह यात्रा की। गांवों में लोगों ने यात्रा दल के सामने उसी तरह मुद्दे उठाए, जिस तरह किसी नेता या अधिकारी के सामने उठाते हैं। चुनाव का समय है, लेकिन लोगों के मन में राजनीतिक दलों के प्रति घोर निराशा का भाव दिखाई दिया। लंबे समय से ठगे जा रहे लोगों को भविष्य में भी किसी राजनीतिक दल से कोई उम्मीद नहीं है। डा. नेगी ने बताया कि यात्रा का दूसरा चरण अप्रैल में होगा। तब चुनाव के बाद के बदलाव का अध्ययन किया जाएगा। 

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