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Pithoragarh News: मुनस्यारी में मतदान कर्मी की मौत छोड़ गई कई सवाल

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 23 Jul 2025 11:22 PM IST
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Death of polling worker in Munsiyari leaves many questions
पिथौरागढ़। सीमांत जिले में मतदान के लिए मुनस्यारी विकासखंड के गोल्फा बूथ की चढ़ाई पार करते समय हार्ट अटैक से हुई मतदान कर्मी की मौत निर्वाचन आयोग के साथ ही पूरे सिस्टम के लिए कई सवाल खड़े कर रही है। ऐसा इसलिए कि कैलाश मानसरोवर यात्रियों की यात्रा शुरू होने और 10 हजार फुट की ऊंचाई पर पहुंचते ही कई बार स्वास्थ्य परीक्षण होता है। इससे उलट आठ से 11 हजार फुट ऊंचाई पर मतदान कराने के भेजे जाने वाले मतदान कर्मियों को बगैर स्वास्थ्य परीक्षण के ही बूथों पर रामभरोसे भेज दिया जाता है। अब तक प्रदेश भर में दुर्गम और बेहद ऊंचाई वाले स्थानों पर मतदान कराने के लिए जाने वाले हर मतदान कर्मी का स्वास्थ्य परीक्षण करने की कोई व्यवस्था न होने से निर्वाचन व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
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कैलाश मानसरोवर यात्रियों का 10500 फुट ऊंचाई पर गुंजी पहुंचते ही और इससे आगे का सफर करने से पहले कई बार स्वास्थ्य परीक्षण होता है। ऐसा करना इसलिए जरूरी है कि यात्रियों को उच्च हिमालयी क्षेत्र की विषम परिस्थितियों में कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं न हों और इसका पता लगाया जा सके। यह उनकी सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। सीमांत जिले के साथ ही प्रदेश में ऐसे कई मतदान केंद्र हैं जो आठ से 11 हजार फुट की ऊंचाई पर हैं। हर चुनाव में यहां मतदान कराने कर्मियों को भेजा जाता है लेकिन इनकी सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी स्वास्थ्य परीक्षण करने की व्यवस्था नहीं है। बीते मंगलवार को मुनस्यारी विकासखंड के गोल्फा बूथ पहुंचने के लिए चढ़ाई चढ़ रहे एक मतदान कर्मी की हार्ट अटैक से मौत हो गई जो निर्वाचन व्यवस्था के साथ ही पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर रही है। जब कैलाश मानसरोवर यात्रियों की सुरक्षा के लिए इनका कई चरणों में स्वास्थ्य परीक्षण होता है तो मतदान कर्मियों को गुंजी और इससे अधिक ऊंचाई पर बने बूथों पर बगैर स्वास्थ्य परीक्षण के भेजना कैसे उचित है हर मतदान कर्मी इसका जवाब खोज रहा है। वहीं निर्वाचन विभाग हर मतदान कर्मी का स्वास्थ्य परीक्षण कराना संभव न होने की बात कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है। संवाद
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बीमारी का प्रत्यावेदन देने के बाद होती है हर जांच
पिथौरागढ़। मतदान कर्मी को किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या हो तो उसे इसे प्रमाणित करने के लिए कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। यदि अस्वस्थ कर्मी की मतदान ड्यूटी लगाई गई तो उसे पहले निर्वाचन विभाग को इसकी जानकारी देनी होगी। उसकी बात सच तभी मानी जाएगी जब संबंधित कर्मी चिकित्सकों के पैनल के सामने अपनी बीमारी को प्रमाणित कर सकेगा। यदि वह इसमें सफल हुआ तो तब उसे मतदान ड्यूटी से हटाया जाएगा।
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कोट
-मतदान कर्मियों के बूथों पर भेजने से पहले स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था नहीं है। मतदान कर्मियों की संख्या अधिक होने से ऐसा कर पाना भी संभव नहीं है। जो कर्मी स्वास्थ्य समस्याएं बताकर प्रत्यावेदन देता है उसे ड्यूटी से हटाया जाता है। गोल्फा में मतदान कर्मी की मौत गहरे दुख का विषय है।
- योगेंद्र सिंह, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी, पिथौरागढ़।
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