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दारमा घाटी के दर्जनों गांव अलग-थलग पड़े
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला (पिथौरागढ़)
Updated Tue, 09 Aug 2016 10:25 PM IST
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दारमा घाटी के दर्जनों गांव अलग-थलग पड़े
- फोटो : अमर उजाला
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तवाघाट-सोबला मार्ग डेढ़ माह से बंद होने के कारण दारमा घाटी के दर्जनों गांव अलग-थलग पड़े हुए हैं। लोगों को पैदल सफर तय कर जरूरी सामान पहुंचाना पड़ रहा है। सीमा सड़क संगठन ने इस रोड के खेत नाले में वैली ब्रिज का निर्माण तो कर दिया है लेकिन आगे की सड़क को अब तक दुरुस्त नहीं किया गया है।
लोगों ने इस अव्यवस्था की जानकारी जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी को दे दी है। दारमा घाटी के युवा सामाजिक कार्यकर्ता मनोज नगन्याल ने बताया कि सीमा सड़क संगठन के अधिकारी सड़क खोलने में कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
तल्ला दारमा के कंज्योति, झिमरीगांव, न्यू, सुवा, तीजम, वतन, सुमदुंग, दर, रौलदंग, बोंगलिंग और मल्ला दारमा के सेला, चल, नागलिंग, बालिग, दुग्तू, सौन, दांतू, बोन, फिलम, ढाकर, गो, तीदांग, विदांग, सीपू, दावे, सिनलापास गांवों को जाने वाले लोग भारी कष्ट में हैं।
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इन इलाकों में लोगों को जरूरी सामान तवाघाट से पैदल ढोकर ले जाना पड़ रहा है। कई स्थानों पर पहाड़ी से पत्थर गिरने का खतरा बना रहता है। चिकित्सा और संचार की सुविधा से वंचित इन गांवों के लोग सिर्फ भगवान के भरोसे ही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने अब तक इन इलाकों के विकास की नहीं सोची। यदि सड़क मार्ग सही होता तो कम से कम लोगों को आवागमन की कठिनाई से मुक्ति मिल जाती। लोगों का कहना है कि अब इन समस्याओं के समाधान के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
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लोगों ने इस अव्यवस्था की जानकारी जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी को दे दी है। दारमा घाटी के युवा सामाजिक कार्यकर्ता मनोज नगन्याल ने बताया कि सीमा सड़क संगठन के अधिकारी सड़क खोलने में कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
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तल्ला दारमा के कंज्योति, झिमरीगांव, न्यू, सुवा, तीजम, वतन, सुमदुंग, दर, रौलदंग, बोंगलिंग और मल्ला दारमा के सेला, चल, नागलिंग, बालिग, दुग्तू, सौन, दांतू, बोन, फिलम, ढाकर, गो, तीदांग, विदांग, सीपू, दावे, सिनलापास गांवों को जाने वाले लोग भारी कष्ट में हैं।
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इन इलाकों में लोगों को जरूरी सामान तवाघाट से पैदल ढोकर ले जाना पड़ रहा है। कई स्थानों पर पहाड़ी से पत्थर गिरने का खतरा बना रहता है। चिकित्सा और संचार की सुविधा से वंचित इन गांवों के लोग सिर्फ भगवान के भरोसे ही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने अब तक इन इलाकों के विकास की नहीं सोची। यदि सड़क मार्ग सही होता तो कम से कम लोगों को आवागमन की कठिनाई से मुक्ति मिल जाती। लोगों का कहना है कि अब इन समस्याओं के समाधान के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।