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Pithoragarh News: सड़क पर उतरे दारमा घाटी के ग्रामीण
Fri, 24 Mar 2023 11:18 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Fri, 24 Mar 2023 11:18 PM IST
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पिथौरागढ़। दारमा घाटी में प्रस्तावित बौकांग-बालिंग जल विद्युत परियोजना के विरोध में सीमांत के ग्रामीण सड़क पर उतर आए। उन्होंने जुलूस निकालकर टीएचडीसी वापस जाओ के नारे लगाए। उन्होंने डीएम के माध्यम से सीएम को ज्ञापन भेजकर परियोजना को रद्द करने की मांग की। साथ ही मांग पूरी नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।
दारमा संघर्ष समिति के बैनर तले ग्रामीण शुक्रवार को धारचूला से 90 किमी दूर जिला मुख्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने 165 मेगावाट की प्रस्तावित बौकांग-बालिंग जल विद्युत परियोजना के विरोध में अधिसूचित धरना स्थल से कलक्ट्रेट तक जुलूस निकाला। कहा कि जोशीमठ की घटना के बाद दारमा घाटी के लोग सहमे हुए हैं। आरोप लगाया कि टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (टीएचडीसी) बालिंग में जल विद्युत परियोजना बनाने की तैयारी कर रही है जिसकी टेस्टिंग के लिए 30 मीटर टनल भी खोदी गई है।
ग्रामीणों ने कहा कि दारमा घाटी के कई गांव पहले से ही आपदा की मार झेल रहे हैं। ऐसे में जल विद्युत परियोजना के बनने से घाटी में आपदा का खतरा और बढ़ जाएगा। इस दौरान समिति के उपाध्यक्ष इंद्र सिंह ग्वाल, छोरी बौनाल, मनोज नगन्याल, विरेंद्र ग्वाल, नरेंद्र ग्वाल, मनोज नगन्याल, सरस्वती देवी, सरिता देवी, भागीरथी, सुनीता मार्छाल आदि थे।
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आपदा की दृष्टि से संवेदनशील है दारमा
पिथौरागढ़। दारमा घाटी के 14 गांव चीन सीमा से लगे हैं जो आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील है। हर साल बारिश में यहां भू-धसाव, भूस्खलन आदि घटनाएं होती रहती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस डैम के बनने के बाद राज्य को तो 165 मेगावाट बिजली मिलेगी लेकिन सीमांत में रह रहे लोगों के लिए यह विनाश का कारण बनेगा। संवाद
सीमांत के लोग बौकांग बालिंग जल विद्युत परियोजना का लंबे समय से विरोध कर रहे हैं। इसके बावजूद टनल का निर्माण किया जा रहा है। परियोजना के बनने के बाद दारमा घाटी के 14 गांवों में आपदा का खतरा और अधिक बढ़ जाएगा। अगर परियोजना को रद्द नहीं किया गया तो वह उग्र आंदोलन करेंगे। -पूरन सिंह ग्वाल, अध्यक्ष दारमा घाटी संघर्ष समिति।
दारमा घाटी में प्रस्तावित परियोजना को सरकार जोन फाइव में बना रही है। सरकार ने जहां आदमी रहते हैं उसे मृग विहार घोषित किया है। जिस स्थान पर डैम बनना है उसे मृग विहार से हटा दिया है। दारमा घाटी का पहाड़ कमजोर है। ऐसे में डैम बनाना गलत होगा। -नारायण सिंह दरियाल, ग्रामीण।
सरकार लोगों के विरोध के बाद भी दारमा में जल विद्युत परियोजना बनाने की तैयारी कर रही है। कंपनी का कार्यालय खोल दिया गया है। अगर परियोजना को रद्द कर निर्माण करने वाली कंपनी को वापस नहीं भेजा गया तो सीमांत के प्रहरियों को सड़कों पर उतरना पड़ेगा। -शकुंतला दलात, समाजसेवी।
दारमा घाटी में 165 मेगावाट की जल विद्युत परियोजना बनने से जोशीमठ की जैसी स्थिति पैदा हो जाएगी। सरकार को जनहित में परियोजना को रद्द करना चाहिए। अगर परियोजना को रद्द नहीं किया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।-किशन बौनाल, ग्रामीण।
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दारमा संघर्ष समिति के बैनर तले ग्रामीण शुक्रवार को धारचूला से 90 किमी दूर जिला मुख्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने 165 मेगावाट की प्रस्तावित बौकांग-बालिंग जल विद्युत परियोजना के विरोध में अधिसूचित धरना स्थल से कलक्ट्रेट तक जुलूस निकाला। कहा कि जोशीमठ की घटना के बाद दारमा घाटी के लोग सहमे हुए हैं। आरोप लगाया कि टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (टीएचडीसी) बालिंग में जल विद्युत परियोजना बनाने की तैयारी कर रही है जिसकी टेस्टिंग के लिए 30 मीटर टनल भी खोदी गई है।
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ग्रामीणों ने कहा कि दारमा घाटी के कई गांव पहले से ही आपदा की मार झेल रहे हैं। ऐसे में जल विद्युत परियोजना के बनने से घाटी में आपदा का खतरा और बढ़ जाएगा। इस दौरान समिति के उपाध्यक्ष इंद्र सिंह ग्वाल, छोरी बौनाल, मनोज नगन्याल, विरेंद्र ग्वाल, नरेंद्र ग्वाल, मनोज नगन्याल, सरस्वती देवी, सरिता देवी, भागीरथी, सुनीता मार्छाल आदि थे।
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आपदा की दृष्टि से संवेदनशील है दारमा
पिथौरागढ़। दारमा घाटी के 14 गांव चीन सीमा से लगे हैं जो आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील है। हर साल बारिश में यहां भू-धसाव, भूस्खलन आदि घटनाएं होती रहती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस डैम के बनने के बाद राज्य को तो 165 मेगावाट बिजली मिलेगी लेकिन सीमांत में रह रहे लोगों के लिए यह विनाश का कारण बनेगा। संवाद
सीमांत के लोग बौकांग बालिंग जल विद्युत परियोजना का लंबे समय से विरोध कर रहे हैं। इसके बावजूद टनल का निर्माण किया जा रहा है। परियोजना के बनने के बाद दारमा घाटी के 14 गांवों में आपदा का खतरा और अधिक बढ़ जाएगा। अगर परियोजना को रद्द नहीं किया गया तो वह उग्र आंदोलन करेंगे। -पूरन सिंह ग्वाल, अध्यक्ष दारमा घाटी संघर्ष समिति।
दारमा घाटी में प्रस्तावित परियोजना को सरकार जोन फाइव में बना रही है। सरकार ने जहां आदमी रहते हैं उसे मृग विहार घोषित किया है। जिस स्थान पर डैम बनना है उसे मृग विहार से हटा दिया है। दारमा घाटी का पहाड़ कमजोर है। ऐसे में डैम बनाना गलत होगा। -नारायण सिंह दरियाल, ग्रामीण।
सरकार लोगों के विरोध के बाद भी दारमा में जल विद्युत परियोजना बनाने की तैयारी कर रही है। कंपनी का कार्यालय खोल दिया गया है। अगर परियोजना को रद्द कर निर्माण करने वाली कंपनी को वापस नहीं भेजा गया तो सीमांत के प्रहरियों को सड़कों पर उतरना पड़ेगा। -शकुंतला दलात, समाजसेवी।
दारमा घाटी में 165 मेगावाट की जल विद्युत परियोजना बनने से जोशीमठ की जैसी स्थिति पैदा हो जाएगी। सरकार को जनहित में परियोजना को रद्द करना चाहिए। अगर परियोजना को रद्द नहीं किया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।-किशन बौनाल, ग्रामीण।