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आरक्षित जंगल में सुखाए जा रहे चीड़ के पेड़
ब्यूरो/अमर उजाला, थल
Updated Wed, 01 Nov 2017 10:23 PM IST
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बिरखेत के जंगल में इस तरह किया गया चीड़ का पेड़ सुखाने का प्रयास
- फोटो : अमर उजाला
पर्यावरण और पारिस्थितिकी संतुलन के लिए कहीं तो लोगों को पौधारोपण के लिए प्रेरित करने को अभियान चलाए जाते हैं लेकिन यहां बेड़ीनाग वन रेंज के अंतर्गत हजेती के पास बिरखेत के आरक्षित जंगल में चीड़ के हरे पेड़ों को सुखाने की कोशिश की जा रही है। पेड़ों के तने पर चारों ओर धारदार हथियार से घाव बना दिए गए हैं। इससे या तो पेड़ सूख जाएगा या फिर वह तेज हवा से गिर जाएगा।
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जंगलों से लकड़ी चुराने वाले अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। पेड़ों को कैसे सुखाया और ढहाया जाता है ये अच्छी तरह जानते हैं। पेड़ों पर बड़ी कील ठोककर या फिर चारों ओर घाव कर उनको सुखा दिया जाता है। फिर मौका देख ये पेड़ को काट ले जाते हैं। सड़क किनारे दो बड़े पेड़ों के अलावा जंगल के भीतर करीब दर्जनभर पेड़ों को इस तरह सुखाने की कोशिश की गई है। हैरानी इस बात पर है कि जहां पर पेड़ों को सुखाने की कोशिश की गई है, वहां से मात्र 500 मीटर की दूरी पर वन विभाग की चौकी भी है, लेकिन वन विभाग के अधिकारियों को इस मामले की जानकारी तक नहीं है।
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वन रेंजर नंदन प्रसाद ग्वासीकोटी के संज्ञान में जब यह मामला लाया गया तो उन्होंने कहा कि वन रक्षक को मौके पर भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब तक किसी ने भी इसकी शिकायत नहीं की। इस मामले की जांच की जाएगी और अपराधियों को पकड़ा जाएगा। हजेती के जंगल में लंबे समय से लकड़ियों की चोरी हो रही है। रात के समय भी जंगल से लकड़ी की चोरी होती है। ठीक सड़क से लगे इस जंगल से पेड़ काट कर उसे पार लगाने में चोरों को आसानी रहती है।
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