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महिला अपराधों को रोकने के लिए कड़े फैसले जरूरी- जिला जज डॉ. जीके शर्मा
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डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा, जिला एवं सत्र न्यायाधीश पिथौरागढ़।
- फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। महिलाओं के प्रति बढ़ रहे अपराध से चिंतित जिला जज डॉ. जीके शर्मा का मानना है कि दोषियों को सख्त से सख्त सजा देकर ही ऐसे अपराधों को कम किया जा सकता है। साथ ही उनका कहना है कि ऐसे मामलों पर फैसला भी जल्द से जल्द होना चाहिए ताकि पीड़ित को समय से न्याय मिल सके। न्याय प्रक्रिया लंबी खिंचने पर अपराधियों का मनोबल भी बढ़ता है।
शनिवार को संवाद न्यूज एजेंसी के दीपक कापड़ी ने जिला जज डॉ. जीके शर्मा से विशेष बातचीत की। इस दौरान उन्होंने बताया कि महिलाओं के प्रति अपराध कम करने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी जागरूकता है। लोगों को इसके लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। उनका कहना है कि कठोर दंड से ही समाज में जागरूकता फैलेगी। अब भी हमारे समाज में पुरुष सत्तात्मक सोच हावी है।
ऐसे लोग सोचते हैं कि महिलाएं कुछ नहीं कर सकतीं हैं, जबकि महिलाएं भी पुरुषों की भांति हर काम कर सकतीं हैं। आत्मा का कोई लिंग नहीं है। उनका कहना है कि साढ़े चार साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म, हिंसा और उत्पीड़न भी हुआ है। उनका कहना है कि बच्चियां और महिलाएं कोई वस्तु नहीं हैं। उनके साथ गलत तरह का व्यवहार सही नहीं है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2006-07 में नैनीताल के ऐसे ही मामले में वे पहले भी फांसी की सजा सुना चुके हैं।
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महिलाओं को मिलना चाहिए उचित सम्मान
पिथौरागढ़। जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा का कहना है कि महिलाओं को समाज में उचित सम्मान मिलना चाहिए। इसी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में महिला अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। महिला अपराधों और अन्य अपराधों की रोकथाम आदि की जानकारी दी जा रही है।
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शनिवार को संवाद न्यूज एजेंसी के दीपक कापड़ी ने जिला जज डॉ. जीके शर्मा से विशेष बातचीत की। इस दौरान उन्होंने बताया कि महिलाओं के प्रति अपराध कम करने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी जागरूकता है। लोगों को इसके लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। उनका कहना है कि कठोर दंड से ही समाज में जागरूकता फैलेगी। अब भी हमारे समाज में पुरुष सत्तात्मक सोच हावी है।
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ऐसे लोग सोचते हैं कि महिलाएं कुछ नहीं कर सकतीं हैं, जबकि महिलाएं भी पुरुषों की भांति हर काम कर सकतीं हैं। आत्मा का कोई लिंग नहीं है। उनका कहना है कि साढ़े चार साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म, हिंसा और उत्पीड़न भी हुआ है। उनका कहना है कि बच्चियां और महिलाएं कोई वस्तु नहीं हैं। उनके साथ गलत तरह का व्यवहार सही नहीं है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2006-07 में नैनीताल के ऐसे ही मामले में वे पहले भी फांसी की सजा सुना चुके हैं।
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महिलाओं को मिलना चाहिए उचित सम्मान
पिथौरागढ़। जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा का कहना है कि महिलाओं को समाज में उचित सम्मान मिलना चाहिए। इसी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में महिला अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। महिला अपराधों और अन्य अपराधों की रोकथाम आदि की जानकारी दी जा रही है।