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प्रकृति-संस्कृति-जैवविविधता सेमिनार शुरू
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Fri, 04 Mar 2016 12:49 AM IST
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राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय पिथौरागढ़ में प्रकृति, संस्कृति और जैवविविधता पर तीन दिनी सेमिनार शुरू हो गया है। उद्घाटन सत्र में डॉ. शेखर पाठक ने लैंड यूज सिनेरियो पर कहा कि लैंड सेटलमेंट 50-60 सालों से नहीं हुआ है, जबकि यह बहुत जरूरी है। लैंड सेटलमेंट के अभाव में कृषि भूमि की वस्तुस्थिति की जानकारी नहीं हो पा रही है।
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डॉ. शंकर मंडल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा रखी। पहले सत्र में पंडित नैन सिंह रावत व्याख्यान माला के तहत डॉ. शेखर पाठक ने सर्वेयर पंडित रावत का संक्षिप्त परिचय दिया। इस सत्र की अध्यक्षता सीपी मोहन ने की। डॉ. बीपी मैथानी और डॉ. बीएस बिष्ट सत्र के मुख्य अतिथि थे।
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संचालन एमएससी जंतु विज्ञान की छात्रा विनीता शर्मा ने किया। मुख्य वक्ता डॉ. मैथानी ने हिमालय में बदलती कृषि पर व्याख्यान दिया। डॉ. राजीव सेमवाल ने कॉमन प्रॉपर्टी रिसोर्सेज पर ज्वलंत उदाहरणों सहित अपनी बात रखी। सत्र की अध्यक्षता डॉ. बीएस बिष्ट ने की।
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दूसरे सत्र में डॉ. तारा चंद त्रिपाठी ने मध्य हिमालयी भाषा, संस्कृति द्रविड़ तत्व पर व्याख्यान पेश किया। निर्मला भट्ट ने मशरूम उत्पादन, वर्मी कंपोस्ट तकनीक की उपयोगिता, डॉ. भाष्कर सिन्हा ने ईको सिस्टम सर्विसेज और जैव विविधता पर व्याख्यान दिया। कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. डीएस पांगती आदि प्राध्यापक मौजूद थे।
सेमिनार संयोजक डॉ. सीएस नेगी ने कहा कि शुक्रवार को अस्कोट-आराकोट स्लाइड शो मुख्य आकर्षण रहेगा। सेमिनार में विख्यात चित्रकार बी मोहन नेगी द्वारा लगाई गई कुमाऊंनी, गढ़वाली कविता पोस्टरों की प्रदर्शनी को काफी सराहा गया। आरंभ स्टडी सर्किल की पुस्तक प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही।