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Pithoragarh News: इलाज में बाधा बनी बंद सड़क, 31 किमी पैदल कैसे चले बीमार मोनू

Tue, 29 Jul 2025 10:50 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Tue, 29 Jul 2025 10:50 PM IST
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Closed road became an obstacle in treatment, how did sick Monu walk 31 km
मुनस्यारी-मिलम सड़क पर मलबा और बोल्डरों के बीच जान जो​खिम में डालकर आवाजाही करते लोग। संवाद
मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। खराब मौसम और बंद सड़कें जिंदगी पर भारी पड़ने लगी हैं। चीन सीमा के साथ ही मल्ला जोहार को जोड़ने वाली सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मुनस्यारी-मिलम सड़क लंबे समय से बंद होने से 14 गांवों के साथ ही सेना और सड़क निर्माण में लगे मजदूरों तथा कर्मियों की दिक्कत बढ़ गई है। उल्टी और बुखार से पीड़ित जेसीबी मशीन ऑपरेटर सड़क बंद होने से अस्पताल नहीं पहुंच सका। जब उसकी हालत गंभीर हुई तो साथियों के साथ वह मुनस्यारी के लिए पैदल रवाना हुआ। उसे यहां पहुंचने के लिए 31 किलोमीटर का पैदल सफर करना होगा।
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लंबे समय से बंद मुनस्यारी-मिलम सड़क को खोलना बीआरओ के लिए चुनौती बन गया है। रोड बंद होने से मल्ला जोहार के बीमारों का अस्पताल पहुंचना भी मुश्किल हो गया है। मल्ला जोहार क्षेत्र में टोला के लिए बन रही सड़क पर लगी जेसीबी मशीन का ऑपरेटर पिथौरागढ़ निवासी मोनू (25) बीते दिनों उल्टी और बुखार से पीड़ित हो गया। बंद सड़क और पहाड़ी से लगातार गिर रहे बोल्डरों के बीच इलाज के लिए उसे मुनस्यारी पहुंचना मुश्किल हो रहा है और माेनू सोमवार को दिन भर दर्द से कराहते रहा।
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तबीयत अधिक बिगड़ने पर मजबूरन साइट इंचार्ज विजय और बबलू ने उसे मंगलवार सुबह वाहन से हरदेवल मंदिर तक लाए लेकिन यहां सड़क बंद मिली। पहाड़ी से लगातार गिर रहे बोल्डरों के कारण बीमार मोनू आगे नहीं बढ़ सका। मजबूरन साथी उसे लेकर पैदल रवाना हुए। कब बीमार अस्पताल पहुंचेगा और उसे कब इलाज मिलेगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) का कहना है कि मौसम साफ होने के बाद सड़क खोलने का काम शुरू हो पाएगा।
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जान जोखिम में डालकर आवाजाही
मुनस्यारी-मिलम सड़क चीन सीमा पर स्थित चौकियों के साथ मल्ला जोहार के 13 गांवों को जोड़ती है। इसी सड़क से होकर सैनिक चौकियों में और ग्रामीण गांवों तक पहुंचते हैं। रलगाड़ी, बुगड़ियार सहित अन्य जगहों पर सड़क बंद होने से सभी परेशान हैं। ग्रामीण और सैनिक मलबा और पहाड़ी से गिरते बोल्डरों के बीच जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं।
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