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कुत्तों का शिकार हो रहे बकरियों के बच्चे
कृष्णा गर्ब्याल/अमर उजाला, धारचूला
Updated Thu, 04 Oct 2018 10:48 PM IST
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धारचूला के व्यास घाटी में फंसी भेड़ बकरियां
- फोटो : अमर उजाला
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कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर नजंग-लखनुपर के बीच रास्ता बंद होने से सीमांत वासियों सहित पारंपरिक भेड़ पालक भी गर्ब्यांग आदि स्थानों पर फंसे हैं। भेड़ पालक एक माह से रास्ता खुलने का इंतजार कर रहे हैं। ठंड के चलते कई बकरियों के बच्चे मर गए हैं। साथ ही बकरियों के कई बच्चे कुत्तों का शिकार बन चुके हैं। इससे लोगों में आक्रोश है।
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भेड़ पालक गर्ब्यांग, छियालेख और बूंदी में रास्ता खुलने का इंतजार कर रहे हैं। भेड़ पालक गगन सिंह, भवान सिंह ने बताया कि गर्मियों में वे बकरियों के साथ ज्योलिंगकांग, कालापानी आदि उच्च हिमालयी क्षेत्रों को जाते हैं। चार माह बुग्यालों में बिताकर अब निचली घाटियों में प्रवास को जाना चाहते हैं। बताया कि रास्ता नहीं होने से गर्ब्यांग, छियालेख और बूंदी में बसेरा बनाकर रह रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि यदि ठंड अधिक बढ़ती है तो बकरियों के लिए भारी परेशानी होगी। खच्चर मजदूर कल्याण समिति के सचिव रूप सिंह दानू ने कहा कि सरकार की लापरवाही एवं अनदेखी के कारण क्षेत्र के पशुपालक परेशानी में हैं। रास्ता शीघ्र ठीक नहीं हुआ तो भेड़ पालकों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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व्यास घाटी के लोगों की चिंता बढ़ी
धारचूला। भारत-चीन व्यापारियों सहित माइग्रेशन करने वाले व्यास घाटी के लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं। लखनपुर-नजंग के बीच रास्ता बंद होने से तक घोड़े-खच्चरों के लिए आवाजाही बंद है। लखनपुर के पास छरथा एवं तम्पा में दो जगह अब भी लगभग 220 मीटर कटिंग कार्य होना है। लोनिवि के सहायक अभियंता जीएस मटियाली ने बताया कि लखनपुर के पास लगातार कार्य करने पर ही आवाजाही सुचारु हो पाएगी। अभी कुटी से नजंग नाले के पार तक रास्ता बन चुका है और इसमें जानवर आवाजाही कर रहे हैं।
विगत वर्ष की भांति लखनपुर-नजंग में महाकाली नदी पर पुल बनाकर माइग्रेशन पर गए लोगों और व्यापारियों को धारचूला लाया जाएगा। डीएम की ओर से इसका प्रस्ताव नेपाल को भेजा गया है। -आरके पांडेय, एसडीएम धारचूला।