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पौने दो घंटे तक तड़पती रही प्रसव पीड़िता

Tue, 12 Jun 2018 11:02 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गणाईगंगोली (पिथौरागढ़)।
ब्यूरो/अमर उजाला, गणाईगंगोली (पिथौरागढ़)। Updated Tue, 12 Jun 2018 11:02 PM IST
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Child labor victim suffering for two hours
बच्चा - फोटो : अमर उजाला
 स्टाफ नर्स की लापरवाही से सोमवार रात प्रसव पीड़िता और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की जान पर बन आई। प्रसव पीड़ा होने पर महिला को अस्पताल लेकर पहुंचे परिजनों ने स्टाफ नर्स के कमरे का दरवाजा खटखटाया, लेकिन स्टाफ नर्स ने ड्यूटी न होने की बात कहकर दरवाजा नहीं खोला। पौने दो घंटे तक प्रसव पीड़िता तड़पती रही, लेकिन नर्स का दिल नहीं पसीजा। थक हारकर जब परिजन महिला को घर ले जाने लगे तो उसने रास्ते में बच्चे को जन्म दिया। लोगों ने लापरवाही बरतने वाली नर्स को अस्पताल से हटाने के साथ ही कार्रवाई की मांग की है।  
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नेपाल मूल (वर्तमान में कूना गणाईगंगोली) के कर सिंह की पत्नी सीता देवी को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन सोमवार रात करीब सवा नौ बजे उसे लेकर गणाईगंगोली के राजकीय स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। यहां परिजनों ने अस्पताल परिसर में बने स्टाफ क्वार्टर में रह रही एक स्टाफ नर्स के कमरे का दरवाजा खटखटाया। परिजनों का आरोप है कि नर्स ने ड्यूटी पर नहीं होने की बात कहते हुए दरवाजा नहीं खोला। कहा कि काफी मिन्नतों के बाद भी नर्स का दिल नहीं पसीजा।
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थक हारकर रात ग्यारह बजे परिजन प्रसव पीड़िता को घर को वापस ले गए। रास्ते में महिला ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। सूचना पर 108 वाहन भी मौके पर पहुंची लेकिन जच्चा-बच्चा स्वस्थ होने पर 108 वाहन को वापस किया गया।  बताया जा रहा है कि अस्पताल में कार्यरत एक अन्य स्टाफ नर्स सोमवार को विभागीय कार्य से गंगोलीहाट गई थी। मंगलवार सुबह घटना का पता चलने पर आक्रोशित लोगों ने तीन दिन के भीतर स्टाफ नर्स को हटाने, उसके खिलाफ कार्रवाई करने और नई स्टाफ नर्स की नियुक्ति नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। 
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उधर नर्स का कहना है कि उसकी छह माह की बच्ची बीमार थी। रात में स्टॉफ का कोई साथी नहीं होने के कारण उसने दरवाजा नहीं खोला। बताया कि डिप्टी सीएमओ को लिखकर दिया है कि रात को डिलीवरी कराने में सक्षम नहीं हैं। 


अस्पताल में नहीं महिला चिकित्सक
25 हजार आबादी को स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के लिए खोले गए अस्पताल में एकमात्र आयुर्वेदिक चिकित्सक तैनात हैं। महिला चिकित्सक का पद लंबे समय से रिक्त है। अक्सर अस्पताल में इस तरह की दिक्कत आती रहती है। लोगों का कहना है कि अस्पताल में महिला चिकित्सक की तैनाती होनी चाहिए। डिलीवरी के लिए महिलाओं को 35 किलोमीटर  दूर बेड़ीनाग या 80 किलोमीटर दूर अल्मोड़ा ले जाना पड़ता है।  

 
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