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Pithoragarh News: इंजीनियरिंग कॉलेज का निर्माण करने वाली कार्यदायी संस्था पर केस
Wed, 22 Nov 2023 10:16 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Wed, 22 Nov 2023 10:16 PM IST
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पिथौरागढ़ केएनयू जीआईसी में संचालित इंजीनियरिंग कॉलेज और जीआईसी का निरीक्षण करती डीएम रीना जोशी
पिथौरागढ़। नन्हीं परी सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज का निर्माण करने वाली कार्यदायी संस्था यूपी निर्माण निगम के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई कॉलेज के निदेशक की तहरीर पर हुई है। संस्था पर निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करने और धन का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया है।
सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक डॉ. अजीत सिंह का कहना है कि उन्हें तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलसचिव की ओर से कार्यदायी संस्था के खिलाफ केस दर्ज कराने के निर्देश मिले थे। एसपी लोकेश्वर सिंह ने बताया कि पुलिस ने धारा 409, 427 और 420 में केस दर्ज कर लिया है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। संवाद
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शासन ने नन्हीं परी सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज की विस्तृत रिपोर्ट मांगी
सचिव उत्तराखंड शासन ने डीएम की अध्यक्षता में छह सदस्यीय कमेटी गठित की
सरकार के पहले दिए गए जवाब पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई थी, अब दोबारा देनी है रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
पिथौरागढ़। नन्हीं परी सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज भवन मड़धूरा की विस्तृत जांच के लिए सचिव उत्तराखंड शासन रविनाथ रामन ने कमेटी का गठन कर दिया है। उन्होंने डीएम पिथौरागढ़ को कमेटी का अध्यक्ष बनाने के अलावा एडीएम, भू-गर्भवेत्ता, एसई लोनिवि, ईई लोनिवि और प्रभारी निदेशक इंजीनियरिंग कॉलेज को सदस्य बनाया है। सचिव ने सात दिन के भीतर जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
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बुधवार को सचिव रविनाथ रामन ने डीएम पिथौरागढ़ को भेजे पत्र में कहा है कि मड़धूरा में इंजीनियरिंग कॉलेज के शैक्षणिक भवन के निर्माण के लिए 2273.25 लाख स्वीकृत किए गए हैं। इसमें 1419.29 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। निर्माणाधीन कॉलेज के निर्माण में गुणवत्ता संतोषजनक नहीं पाई गई है। भू-गर्भवेत्ता की रिपोर्ट का शत प्रतिशत पालन नहीं किया गया है।
भू-कटाव के बाद स्थल विकास और सुरक्षात्मक कार्य नहीं किए गए हैं। भवन के एक ब्लाॅक में मिट्टी की परतें जमा हो गई हैं। वर्तमान में कार्यदायी संस्था ने बिना स्थल चयन आख्या के कार्य शुरू कर दिया है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण में जांच के लिए डीएम पिथौरागढ़ रीना जोशी को कमेटी का अध्यक्ष, एडीएम, एसई, ईई लोनिवि और प्रभारी निदेशक नन्हीं परी सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज को सदस्य बनाया है। उन्होंने सात दिन के भीतर जांच कर विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
फोटो विवरण-22पीटीएच 20पी- मड़धूरा में बना सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज। संवाद
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अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था मुद्दा
पिथौरागढ़। अमर उजाला ने नन्हीं परी सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज के जीर्णशीर्ण होने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर इस मामले में सरकार से जवाब मांगा है। सरकार के पहले दिए गए जवाब पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए दोबारा विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। पीएमओ कार्यालय ने भी इसका संज्ञान लिया है। संवाद
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सेवानिवृत्त कर्मी और अन्य विभागों के अधिकारी खाली कर दें भवन: डीएम
डीएम ने केएनयू जीआईसी में चल रहे इंजीनियरिंग कॉलेज का निरीक्षण किया
संवाद न्यूज एजेंसी
पिथौरागढ़। डीएम रीना जोशी ने केएनयू जीआईसी में चल रहे इंजीनियरिंग कॉलेज का निरीक्षण किया। इस दौरान पता चला कि केएनयू जीआईसी के अध्यापकों के लिए बने भवनों का उपयोग अन्य विभाग के कर्मी, अधिकारी और सेवानिवृत्त कर्मी कर रहे हैं। डीएम ने प्रधानाचार्य को भवन को खाली कराने के निर्देश दिए।
बुधवार को डीएम के केएनयू जीआईसी के निरीक्षण के दौरान बताया गया कि स्कूल की 50 नाली जमीन पर नन्हीं परी सीमांत इंजीनियरिंग कैंपस बनना प्रस्तावित है। डीएम ने कैंपस की ओर से उपयोग में लाई जा रही जमीन, संसाधन और भवन का भी निरीक्षण किया। डीएम ने बताया कि इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए पर्याप्त जमीन पाई गई है।
वर्तमान में जीआईसी में नाप-बेनाप भूमि को मिलाकर कुल 185 नाली जमीन उपलब्ध है। इसमें इंजीनियरिंग कॉलेज निर्माण के लिए 50 नाली भूमि की मांग की जा रही है। डीएम ने कहा कि इंटर कॉलेज, डिग्री कॉलेज, जिला पुस्तकालय, इंजीनियरिंग कॉलेज आदि सबकुछ एक ही स्थान पर होने से यह स्थान एजुकेशन हब के रूप में विकसित हो सकता है।
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सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक डॉ. अजीत सिंह का कहना है कि उन्हें तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलसचिव की ओर से कार्यदायी संस्था के खिलाफ केस दर्ज कराने के निर्देश मिले थे। एसपी लोकेश्वर सिंह ने बताया कि पुलिस ने धारा 409, 427 और 420 में केस दर्ज कर लिया है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। संवाद
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शासन ने नन्हीं परी सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज की विस्तृत रिपोर्ट मांगी
सचिव उत्तराखंड शासन ने डीएम की अध्यक्षता में छह सदस्यीय कमेटी गठित की
सरकार के पहले दिए गए जवाब पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई थी, अब दोबारा देनी है रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
पिथौरागढ़। नन्हीं परी सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज भवन मड़धूरा की विस्तृत जांच के लिए सचिव उत्तराखंड शासन रविनाथ रामन ने कमेटी का गठन कर दिया है। उन्होंने डीएम पिथौरागढ़ को कमेटी का अध्यक्ष बनाने के अलावा एडीएम, भू-गर्भवेत्ता, एसई लोनिवि, ईई लोनिवि और प्रभारी निदेशक इंजीनियरिंग कॉलेज को सदस्य बनाया है। सचिव ने सात दिन के भीतर जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
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बुधवार को सचिव रविनाथ रामन ने डीएम पिथौरागढ़ को भेजे पत्र में कहा है कि मड़धूरा में इंजीनियरिंग कॉलेज के शैक्षणिक भवन के निर्माण के लिए 2273.25 लाख स्वीकृत किए गए हैं। इसमें 1419.29 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। निर्माणाधीन कॉलेज के निर्माण में गुणवत्ता संतोषजनक नहीं पाई गई है। भू-गर्भवेत्ता की रिपोर्ट का शत प्रतिशत पालन नहीं किया गया है।
भू-कटाव के बाद स्थल विकास और सुरक्षात्मक कार्य नहीं किए गए हैं। भवन के एक ब्लाॅक में मिट्टी की परतें जमा हो गई हैं। वर्तमान में कार्यदायी संस्था ने बिना स्थल चयन आख्या के कार्य शुरू कर दिया है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण में जांच के लिए डीएम पिथौरागढ़ रीना जोशी को कमेटी का अध्यक्ष, एडीएम, एसई, ईई लोनिवि और प्रभारी निदेशक नन्हीं परी सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज को सदस्य बनाया है। उन्होंने सात दिन के भीतर जांच कर विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
फोटो विवरण-22पीटीएच 20पी- मड़धूरा में बना सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज। संवाद
अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था मुद्दा
पिथौरागढ़। अमर उजाला ने नन्हीं परी सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज के जीर्णशीर्ण होने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर इस मामले में सरकार से जवाब मांगा है। सरकार के पहले दिए गए जवाब पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए दोबारा विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। पीएमओ कार्यालय ने भी इसका संज्ञान लिया है। संवाद
सेवानिवृत्त कर्मी और अन्य विभागों के अधिकारी खाली कर दें भवन: डीएम
डीएम ने केएनयू जीआईसी में चल रहे इंजीनियरिंग कॉलेज का निरीक्षण किया
संवाद न्यूज एजेंसी
पिथौरागढ़। डीएम रीना जोशी ने केएनयू जीआईसी में चल रहे इंजीनियरिंग कॉलेज का निरीक्षण किया। इस दौरान पता चला कि केएनयू जीआईसी के अध्यापकों के लिए बने भवनों का उपयोग अन्य विभाग के कर्मी, अधिकारी और सेवानिवृत्त कर्मी कर रहे हैं। डीएम ने प्रधानाचार्य को भवन को खाली कराने के निर्देश दिए।
बुधवार को डीएम के केएनयू जीआईसी के निरीक्षण के दौरान बताया गया कि स्कूल की 50 नाली जमीन पर नन्हीं परी सीमांत इंजीनियरिंग कैंपस बनना प्रस्तावित है। डीएम ने कैंपस की ओर से उपयोग में लाई जा रही जमीन, संसाधन और भवन का भी निरीक्षण किया। डीएम ने बताया कि इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए पर्याप्त जमीन पाई गई है।
वर्तमान में जीआईसी में नाप-बेनाप भूमि को मिलाकर कुल 185 नाली जमीन उपलब्ध है। इसमें इंजीनियरिंग कॉलेज निर्माण के लिए 50 नाली भूमि की मांग की जा रही है। डीएम ने कहा कि इंटर कॉलेज, डिग्री कॉलेज, जिला पुस्तकालय, इंजीनियरिंग कॉलेज आदि सबकुछ एक ही स्थान पर होने से यह स्थान एजुकेशन हब के रूप में विकसित हो सकता है।