{"_id":"58177c2d4f1c1bc132435be5","slug":"but-thou-prepared-dutia-chudha-kri-halin-hollow-head-today-worship","type":"story","status":"publish","title_hn":"दुतिया क तैं तैयार करि हालिन च्यूड़, आज होलो सिर पूजन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दुतिया क तैं तैयार करि हालिन च्यूड़, आज होलो सिर पूजन
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़थल (पिथौरागढ़)
Updated Mon, 31 Oct 2016 10:45 PM IST
विज्ञापन
थलाक गोलगौं में च्यूड़ कूटन में लागि रईं महिला।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
दिवालिक पंचपर्वन में दुतिया क सबन है ठुल महत्व छ। दुतिया क तैं गौंन में आज ले धान कुटि बेर च्यूड़ बणूंनै कि परंपरा छ। दिवालिक एकादशी दिन एक भाण में धान भिजाबेर राखि दिनन। उनन कैं आज अन्नकूट पड़ेवा क दिन कुटि बेर च्यूड़ बणाई जानन। च्यूड़ बणूंनै कि खास विधि हुंछि। पैलि धान कणि तसाल में भुटी जांच। फिरि गरम गरम उखल में डालि बेर कुटी जांछ। तस करि बेर धानन बटि चौड़ आकारक चावल निकल जांछ। वी थैं च्यूड़ कूनन।
च्यूड़नन कैं दुतिया क रातै पैलि दिपातन में चढ़ाई जालो। वी बाद बैणिय आपुण भाय ना क ख्वार में यो च्यूड़ का गुद डालि बेर पुज कराला। वी है पैलि भाई क ख्वार लै तेल लगाबेर दुतिया क धार निकाली जालि। इस मान्यता छ कि भाई क दीर्घायु कि कामना क तैं इस करी जांछ। आज सप गौंन में रातै बटि च्य़ूड़ कूटनकि तैयारी हुन बैगे।
विज्ञापन
पूर दिन उखल कि दम दम आवाज गूंजन में छि। आज ज्यादातर लोग गौंन बटि शहरन में बसि ग्यान। खेतिबाड़िक काम कम हैग्यो। उखल कुटन भौत कम लोग जाणनन। फिर ले गौंन में यो परंपरा जीवित छ। थल का नजीक गोल गौं में आज रातै जानकी देवी, गीता देवी और पार्वती देवी ले च्यूड़ तैयार करिन। आसपासाक अलमियागौं, बलतिर, बिनायक, खोली, चलमोड़ी, मस्मोली, गोचर समेत सपै गौंन में च्यूड़ तैयार करी ग्यान। दिवालीक त्यौहार ठीक धानकि फसल पाकि बाद हुंछ। हर घर में इन दिनन धान पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हुछ।
विज्ञापन
यो बहानैलि धान दिपातन कैं ले चढ़ि जांछ और भाई ख्वार में लै यो धान ले पूज है जांछि। दुतिया क दि बैंणि आपुण भाई क ख्वार में च्यूड़ डालि बेर-लाग दुतिया, लाग बग्वाली, जी रयै, जागि रयै, हिमालन ह्यूं छन जाणै, दुबाक जाड़ छन जाणै, हाथि क जस बल आजौ, स्यू जस तराण आजौ जी रयै, जागि रयै बोलनलै भाई क सिर पूजन कराला। ऐका साथ दिवाली क यो त्यौहार मंगलवार संपन्न है जालो।