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Pithoragarh News: बलुवाकोट के खेतों में हुई काले धान की रोपाई
Tue, 25 Jun 2024 10:54 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Tue, 25 Jun 2024 10:54 PM IST
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धारचूला के कालिका में काले धान की रोपाई करतीं महिलाएं। स्रोत: कृषि विभाग
पिथौरागढ़। कृषि विभाग ने आत्मा परियोजना के तहत धारचूला ब्लॉक के गांवों में पांच एकड़ में काले धान की रोपाई कर दी है। इस बार इसे मॉडल के रूप में लगाया गया है यदि पैदावार बेहतर हुई तो अगले वर्ष अन्य जगहों पर भी काले धान की खेती की जाएगी।
मुख्य कृषि अधिकारी रितु टम्टा ने बताया कि काले धान का 160 किलो बीज मध्य प्रदेश से मंगाया गया था। इसकी बिजाई कर कालिका और बलुवाकोट में पांच एकड़ खेतों में पौधों की रोपाई कर दी गई है। धारचूला देहात और ढूंगातोली के पांच एकड़ में बारिश होने के बाद रोपाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि काले धान का बाजार भाव अच्छा है। इसकी खेती से साधारण और बासमती धान की खेती से अधिक फायदा हो सकता है। सीमांत के किसान इसकी खेती कर अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। बाजार में काला चावल 500 रुपये किलो तक बिक रहा है। काले धान का सेवन स्वास्थ्य की दृष्टि से भी काफी लाभकारी है। इसमें साधारण धान की तुलना में पोषक तत्व अधिक होते हैं। कालिका में धान की रोपाई कृषक विनोद खाती के खेतों में उप परियोजना निदेशक कमलेश कांत, ब्लॉक तकनीकी प्रबंधक प्रताप ढाली की देखरेख में की गई।
बाक्स
काले चावल का बनता है नीला भात
पिथौरागढ़। काले धान में एंटी कैंसर तत्व पाए जाते हैं। इसमें आयरन, फाइबर, प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। शरीर को फिट और स्वस्थ रखने के लिए काले चावल का सेवन लाभकारी बताया जाता है। पौधे की लंबाई साधारण धान की तरह होती है लेकिन बाली के दाने लंबे होते हैं। इसके पौधे मजबूत होते हैं जिससे टूटने की समस्या नहीं होती है। काले चावल को पकाने के बाद इसका रंग बदल जाता है। इस वजह से इसे नीला भात भी कहा जाता है। कम पानी में भी काले धान की खेती की जा सकती है। संवाद
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मुख्य कृषि अधिकारी रितु टम्टा ने बताया कि काले धान का 160 किलो बीज मध्य प्रदेश से मंगाया गया था। इसकी बिजाई कर कालिका और बलुवाकोट में पांच एकड़ खेतों में पौधों की रोपाई कर दी गई है। धारचूला देहात और ढूंगातोली के पांच एकड़ में बारिश होने के बाद रोपाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि काले धान का बाजार भाव अच्छा है। इसकी खेती से साधारण और बासमती धान की खेती से अधिक फायदा हो सकता है। सीमांत के किसान इसकी खेती कर अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। बाजार में काला चावल 500 रुपये किलो तक बिक रहा है। काले धान का सेवन स्वास्थ्य की दृष्टि से भी काफी लाभकारी है। इसमें साधारण धान की तुलना में पोषक तत्व अधिक होते हैं। कालिका में धान की रोपाई कृषक विनोद खाती के खेतों में उप परियोजना निदेशक कमलेश कांत, ब्लॉक तकनीकी प्रबंधक प्रताप ढाली की देखरेख में की गई।
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काले चावल का बनता है नीला भात
पिथौरागढ़। काले धान में एंटी कैंसर तत्व पाए जाते हैं। इसमें आयरन, फाइबर, प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। शरीर को फिट और स्वस्थ रखने के लिए काले चावल का सेवन लाभकारी बताया जाता है। पौधे की लंबाई साधारण धान की तरह होती है लेकिन बाली के दाने लंबे होते हैं। इसके पौधे मजबूत होते हैं जिससे टूटने की समस्या नहीं होती है। काले चावल को पकाने के बाद इसका रंग बदल जाता है। इस वजह से इसे नीला भात भी कहा जाता है। कम पानी में भी काले धान की खेती की जा सकती है। संवाद
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