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प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में किया बेडू का जिक्र
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बेडू से तैयार किए गए उत्पाद। संवाद
- फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। उत्तराखंड के वनों में मिलने वाला जंगली फल बेडू (पहाड़ी अंजीर) एक बार फिर चर्चा में है। इसका कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम में बेडू का जिक्र करना है। प्रधानमंत्री ने इस फल के औषधीय गुण बताकर पिथौरागढ़ में जिला प्रशासन की पहल पर बेडू के उत्पादों को बाजार में उतारने का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि बेडू के उत्पादों के जरिए किसानों को आय का नया स्रोत मिला है।
बेडू भले ही जंगली फल हो लेकिन स्वाद से लेकर औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है। बेडू पर कई गीत भी बने हैं। कुमाऊंनी में बेडू पाको बारा मास हो नरैण काफल पाको चैता... काफी प्रसिद्ध गीत रहा है। पिछले दिनों जिला प्रशासन की पहल पर बेडू से कई उत्पाद बनाकर बाजार में उतारे गए हैं जिन्हें काफी पसंद किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने भी रविवार को इस प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में बेडू में खनिज और विटामिन भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। बीमारियों के इलाज में भी इसका उपयोग होता है। इस फल की इन्हीं खूबियों को देखते हुए इस फल से बने जूस, जैम, चटनी, अचार समेत फल सुखाकर तैयार किए गए ड्राई फ्रूट बाजार में उतारे हैं।
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उन्होंने कहा कि पिथौरागढ़ प्रशासन की पहल और स्थानीय लोगों के सहयोग से बेडू को बाजार में पहुंचाने में सफलता मिली है। बेडू के उत्पादों को ब्रांडिंग करके पहाड़ी अंजीर नाम से ऑनलाइन बाजार में उतारा गया है। इससे किसानों को आय का नया स्रोत मिला है। बेडू के औषधीय गुणों का फायदा भी दूर-दूर के लोगों तक पहुंचने लगा है।
किसानों से 40 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदा 525 किलो बेडू
पिथौरागढ़। जंगलों में ही बर्बाद होने वाले बेडू को पहाड़ी अंजीर के रूप में पहचान मिलने से किसानों को 40 रुपये प्रति किलो की दर से इसका मूल्य मिल रहा है।
बेडू के उत्पाद बनाने के लिए 40 रुपये प्रति किलो की दर से इसकी खरीद की गई। करीब 75 किसानों से कुल 525 किलो बेडू खरीदा गया। रीप परियोजना के टीम लीडर कुलदीप बिष्ट ने बताया कि 525 किलो बेडू से 410 किलो चटनी, 360 किलो जैम, लगभग 75 लीटर जूस बनाया गया। इसके सभी उत्पादों को हिलांस के माध्यम से ऑनलाइन बेचा जा रहा है। पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, बागेश्वर, रुद्रप्रयाग में भी यह उत्पाद उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि बेडू के उत्पादों को लोग काफी पसंद कर रहे हैं।
किसानों की आय बढ़ाने के लिए बेडू काफी उपयोगी साबित हुआ है। यहां के वनों में यह प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इससे किसानों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। भविष्य में बेडू से और अधिक मात्रा में उत्पाद तैयार करने के लिए प्लांट लगाने के प्रयास किए जाएंगे। प्लांट लगने से सालभर उत्पाद बनाए जा सकेंगे।
- डॉ. आशीष चौहान, डीएम, पिथौरागढ़
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बेडू भले ही जंगली फल हो लेकिन स्वाद से लेकर औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है। बेडू पर कई गीत भी बने हैं। कुमाऊंनी में बेडू पाको बारा मास हो नरैण काफल पाको चैता... काफी प्रसिद्ध गीत रहा है। पिछले दिनों जिला प्रशासन की पहल पर बेडू से कई उत्पाद बनाकर बाजार में उतारे गए हैं जिन्हें काफी पसंद किया जा रहा है।
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प्रधानमंत्री मोदी ने भी रविवार को इस प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में बेडू में खनिज और विटामिन भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। बीमारियों के इलाज में भी इसका उपयोग होता है। इस फल की इन्हीं खूबियों को देखते हुए इस फल से बने जूस, जैम, चटनी, अचार समेत फल सुखाकर तैयार किए गए ड्राई फ्रूट बाजार में उतारे हैं।
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उन्होंने कहा कि पिथौरागढ़ प्रशासन की पहल और स्थानीय लोगों के सहयोग से बेडू को बाजार में पहुंचाने में सफलता मिली है। बेडू के उत्पादों को ब्रांडिंग करके पहाड़ी अंजीर नाम से ऑनलाइन बाजार में उतारा गया है। इससे किसानों को आय का नया स्रोत मिला है। बेडू के औषधीय गुणों का फायदा भी दूर-दूर के लोगों तक पहुंचने लगा है।
किसानों से 40 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदा 525 किलो बेडू
पिथौरागढ़। जंगलों में ही बर्बाद होने वाले बेडू को पहाड़ी अंजीर के रूप में पहचान मिलने से किसानों को 40 रुपये प्रति किलो की दर से इसका मूल्य मिल रहा है।
बेडू के उत्पाद बनाने के लिए 40 रुपये प्रति किलो की दर से इसकी खरीद की गई। करीब 75 किसानों से कुल 525 किलो बेडू खरीदा गया। रीप परियोजना के टीम लीडर कुलदीप बिष्ट ने बताया कि 525 किलो बेडू से 410 किलो चटनी, 360 किलो जैम, लगभग 75 लीटर जूस बनाया गया। इसके सभी उत्पादों को हिलांस के माध्यम से ऑनलाइन बेचा जा रहा है। पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, बागेश्वर, रुद्रप्रयाग में भी यह उत्पाद उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि बेडू के उत्पादों को लोग काफी पसंद कर रहे हैं।
किसानों की आय बढ़ाने के लिए बेडू काफी उपयोगी साबित हुआ है। यहां के वनों में यह प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इससे किसानों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। भविष्य में बेडू से और अधिक मात्रा में उत्पाद तैयार करने के लिए प्लांट लगाने के प्रयास किए जाएंगे। प्लांट लगने से सालभर उत्पाद बनाए जा सकेंगे।
- डॉ. आशीष चौहान, डीएम, पिथौरागढ़