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नवीं शताब्दी में बना बनकोट का विष्णु मंदिर अब राष्ट्रीय धरोहर
Wed, 17 Apr 2019 10:37 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन
पिथौरागढ़।
पिथौरागढ़।
Published by: बृजमोहन बृजमोहन
Updated Wed, 17 Apr 2019 10:37 PM IST
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कोटली गांव में स्थित विष्णु मंदिर।
- फोटो : अमर उजाला
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने पिथौरागढ़ के कोटली गांव (बनकोट) में नवीं शताब्दी में बने ऐतिहासिक विष्णु मंदिर को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया है।
गंगोलीहाट विकासखंड के बनकोट कस्बे से दो किमी दूरी पर बसे कोटली गांव में स्थित विष्णु मंदिर के चारों ओर सात अन्य छोटे-छोटे देवालय हैं। मुख्य मंदिर के चारों ओर कोंर्णिक भाग में लघु देव कुलिकाओं का निर्माण किया गया है। मंदिर के गर्भगृह में कृष्ण और बलराम की दुर्लभ प्रतिमाएं हैं। उत्तराखंड का यह अकेला ऐसा मंदिर है जिसमें कृष्ण और बलराम की स्वतंत्र प्रतिमाएं हैं। पुरातत्व विभाग के अनुसार दक्षिण भारतीय शैली में निर्मित इस मंदिर की स्थापना नौवीं शताब्दी में कत्यूरी शासकों ने की थी। भारत सरकार के पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने अब इस मंदिर को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया है। इससे पूर्व यह मंदिर पुरातत्व विभाग अल्मोड़ा के संरक्षण में था।
पिथौरागढ़ में और भी हैं पुरातात्विक महत्व के मंदिर
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ जिले में नवीं सदी में निर्मित ऐतिहासिक मंदिर और मंदिर समूह और भी हैं। इनमें थल का बालीश्वर मंदिर, मरसोली गांव में महारुद्र लक्ष्मीनारायण मंदिर, कासनी का विष्णु मंदिर, गंगोलीहाट के गुप्तड़ी में स्थित चामुंडा एवं शिव मंदिर, डीडीहाट का सूर्य मंदिर और थल के निकट स्थित एक हथिया देवाल प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन सभी मंदिरों का निर्माण विशेष शैली में हरे रंग के पत्थरों को तराशकर किया गया है।
........कोट
सदियों पूर्व निर्मित मंदिर ऐतिहासिक धरोहर हैं। पुरातत्व विभाग का मुख्य उद्देश्य इनका संरक्षण करना और इन्हें अतिक्रमण से बचाना है। इन मंदिरों का मौलिक स्वरूप बचाए रखना महत्वपूर्ण है।
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- डॉ.सीएस चौहान, पुरातत्व विभाग अल्मोड़ा के प्रभारी एवं अन्वेषक।
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गंगोलीहाट विकासखंड के बनकोट कस्बे से दो किमी दूरी पर बसे कोटली गांव में स्थित विष्णु मंदिर के चारों ओर सात अन्य छोटे-छोटे देवालय हैं। मुख्य मंदिर के चारों ओर कोंर्णिक भाग में लघु देव कुलिकाओं का निर्माण किया गया है। मंदिर के गर्भगृह में कृष्ण और बलराम की दुर्लभ प्रतिमाएं हैं। उत्तराखंड का यह अकेला ऐसा मंदिर है जिसमें कृष्ण और बलराम की स्वतंत्र प्रतिमाएं हैं। पुरातत्व विभाग के अनुसार दक्षिण भारतीय शैली में निर्मित इस मंदिर की स्थापना नौवीं शताब्दी में कत्यूरी शासकों ने की थी। भारत सरकार के पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने अब इस मंदिर को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया है। इससे पूर्व यह मंदिर पुरातत्व विभाग अल्मोड़ा के संरक्षण में था।
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पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ जिले में नवीं सदी में निर्मित ऐतिहासिक मंदिर और मंदिर समूह और भी हैं। इनमें थल का बालीश्वर मंदिर, मरसोली गांव में महारुद्र लक्ष्मीनारायण मंदिर, कासनी का विष्णु मंदिर, गंगोलीहाट के गुप्तड़ी में स्थित चामुंडा एवं शिव मंदिर, डीडीहाट का सूर्य मंदिर और थल के निकट स्थित एक हथिया देवाल प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन सभी मंदिरों का निर्माण विशेष शैली में हरे रंग के पत्थरों को तराशकर किया गया है।
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सदियों पूर्व निर्मित मंदिर ऐतिहासिक धरोहर हैं। पुरातत्व विभाग का मुख्य उद्देश्य इनका संरक्षण करना और इन्हें अतिक्रमण से बचाना है। इन मंदिरों का मौलिक स्वरूप बचाए रखना महत्वपूर्ण है।
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- डॉ.सीएस चौहान, पुरातत्व विभाग अल्मोड़ा के प्रभारी एवं अन्वेषक।