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आठ दिन बाद गुंजी से पहुंचे आयुष
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धारचूला के व्यास घाटी में ऊं पर्वत क्षेत्र में आयुष पंत। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़/धारचूला। व्यास घाटी के आदि कैलाश में दर्शन के लिए गए आयुष पंत आठ दिन बाद पिथौरागढ़ पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि सड़कों की स्थिति अभी ठीक नहीं है, हालांकि सड़क खोलने का काम जारी है। अगर फिर से बारिश हुई तो सड़क बंद होना निश्चित है।
टकाना निवासी आयुष 16 अक्तूबर को आदि कैलाश, ऊं पर्वत और पार्वती कुंड के दर्शन के लिए बाइक से व्यास घाटी गए थे। 17 अक्तूबर को दर्शन के बाद वो गुंजी पहुंचे लेकिन मौसम खराब होने के कारण उनकी की राह मुश्किल हो गई।
संचार सेवा बदहाल होने के कारण उनका किसी से संपर्क नहीं हो पाया। 18 अक्तूबर को बर्फबारी शुरू होने से ठंड के कारण हालात बेहद खराब होने लगे। इस कारण उन्हें चिंता सताने लगी।
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उन्हें लगातार लोगों के फंसे यहां-वहां फंसे होने की सूचना मिलने लगी। सड़क खुलने के बाद 25 अक्तूबर को वह गुंजी से धारचूला पहुंचे और इसके बाद पिथौरागढ़ आए।
सड़क पर आवाजाही खतरनाक
पिथौरागढ़। आयुष ने बताया गुंजी तक सड़क बेहद खराब है। पहाड़ी से कभी भी मलबा नीचे गिर सकता है। अगर बारिश हुई तो फिर से हालात बेहद खराब हो जाएंगे। जहां-जहां रास्ते खराब हैं, वो बाइक को खराब रास्तों से बड़ी मुश्किल से लेकर आए।
जहां बाइक आगे ले जाना संभव नहीं था, वहां जेसीबी से बाइक को आगे बढ़ाया। कई लोग तो सड़कें खुलने से पहले ही अपने वाहन छोड़कर हेलिकॉप्टर से या फिर पैदल ही पैदल ही लौट आए। बताया कि अभी भी पिथौरागढ़ क्षेत्र के 16 लोगों की बाइकें और कारें वहां हैं।
क्रीड़ाधिकारी और श्रम अधिकारी ने की पूरी मदद
पिथौरागढ़। आयुष पंत ने बताया क्रीड़ाधिकारी संजीव पौरी और श्रम अधिकारी दीपक कुमार ने फंसे लोगों की हरसंभव मदद की। उन्होंने मौसम खराब होने के कारण फंसे लोगों के रहने से लेकर खाने की हर व्यवस्था की। फंसे लोगों को ढाढ़स भी बंधाया।
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टकाना निवासी आयुष 16 अक्तूबर को आदि कैलाश, ऊं पर्वत और पार्वती कुंड के दर्शन के लिए बाइक से व्यास घाटी गए थे। 17 अक्तूबर को दर्शन के बाद वो गुंजी पहुंचे लेकिन मौसम खराब होने के कारण उनकी की राह मुश्किल हो गई।
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संचार सेवा बदहाल होने के कारण उनका किसी से संपर्क नहीं हो पाया। 18 अक्तूबर को बर्फबारी शुरू होने से ठंड के कारण हालात बेहद खराब होने लगे। इस कारण उन्हें चिंता सताने लगी।
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उन्हें लगातार लोगों के फंसे यहां-वहां फंसे होने की सूचना मिलने लगी। सड़क खुलने के बाद 25 अक्तूबर को वह गुंजी से धारचूला पहुंचे और इसके बाद पिथौरागढ़ आए।
सड़क पर आवाजाही खतरनाक
पिथौरागढ़। आयुष ने बताया गुंजी तक सड़क बेहद खराब है। पहाड़ी से कभी भी मलबा नीचे गिर सकता है। अगर बारिश हुई तो फिर से हालात बेहद खराब हो जाएंगे। जहां-जहां रास्ते खराब हैं, वो बाइक को खराब रास्तों से बड़ी मुश्किल से लेकर आए।
जहां बाइक आगे ले जाना संभव नहीं था, वहां जेसीबी से बाइक को आगे बढ़ाया। कई लोग तो सड़कें खुलने से पहले ही अपने वाहन छोड़कर हेलिकॉप्टर से या फिर पैदल ही पैदल ही लौट आए। बताया कि अभी भी पिथौरागढ़ क्षेत्र के 16 लोगों की बाइकें और कारें वहां हैं।
क्रीड़ाधिकारी और श्रम अधिकारी ने की पूरी मदद
पिथौरागढ़। आयुष पंत ने बताया क्रीड़ाधिकारी संजीव पौरी और श्रम अधिकारी दीपक कुमार ने फंसे लोगों की हरसंभव मदद की। उन्होंने मौसम खराब होने के कारण फंसे लोगों के रहने से लेकर खाने की हर व्यवस्था की। फंसे लोगों को ढाढ़स भी बंधाया।