थल के दाफिला गांव में अद्भुत गुफा मिली
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यहां से डेढ़ किलोमीटर दूर दाफिला गांव में बलीबाड़ा के जंगल में एक अद्भुत गुफा मिली है। जंगल में घास काटने गए लोगों को करीब एक सप्ताह पूर्व ही गुफा का पता चला। बाद में गांव के अन्य लोगों की इसकी जानकारी दी गई। कुछ लोग गुफा के अंदर काफी दूर तक जा चुके हैं। उनको गुफा की दीवारों पर प्राकृतिक रूप से बनी आकृतियां नजर आई। कठोर आग्नेय चट्टानों पर बनी इस गुफा के ठीक 100 मीटर नीचे रामगंगा है। सड़क से गुफा की दूरी सिर्फ 75 मीटर है। लोग चाहते हैं कि मुनस्यारी के प्रवेश द्वार पर मिली इस गुफा का पर्यटन की दृष्टि से विकास होना चाहिए।
दाफिला और अठखेत गांव के लोगों ने बताया कि गुफा का प्रवेश द्वार काफी बड़ा है। संभावना जताई जा रही है कि अतीतकाल में लोग इस गुफा में निवास भी करते होंगे। लोगों ने बताया कि इस जंगल में लोगों की आवाजाही कम रहती है। गुफा के निचले हिस्से में घास काटने के लिए महिलाएं जाती रहती थीं, लेकिन किसी को भी गुफा का आभास नहीं हुआ। एक सप्ताह पहले कुछ महिलाएं घास काटते हुए गुफा के करीब पहुंच गई। उन्होंने इस रहस्यमय गुफा के बारे में गांव के लोगों को जानकारी दी।
अब तक करीब 100 लोग इस गुफा के अंदर जाकर प्राकृतिक रूप से बनी आकृतियों को देख चुके हैं। अठखेत के प्रधान दीपक भैंसोड़ा ने बताया कि वह गुफा का अध्ययन करने के लिए पुरातत्व विभाग से संपर्क करेंगे। गांव के खड़क सिंह बोरा, मीना देवी ने कहा कि गुफा के सहारे यहां का पर्यटन विकास हो सकता है।
पुरातत्व विभाग की टीम जल्दी आएगी
क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई अल्मोड़ा के अन्वेषक डॉ. सीएस चौहान ने कहा कि गुफा के अंदर मौजूद प्राकृतिक आकृतियों का अध्ययन करने के लिए जल्दी ही विभाग की टीम दौरा करेगी। उन्होंने कहा कि यदि गुफा के माध्यम से पर्यटन विकास की संभावना बन सकती होगी तो वह इस बारे में पर्यटन विभाग को लिखेंगे। उन्होंने कहा कि पहाड़ों पर प्राकृतिक रूप से गुफाओं का अस्तित्व मिलता है। यदि सुविधाजनक स्थान पर गुफा हो तो उसका महत्व बढ़ जाता है।