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Pithoragarh News: चीन सीमा तक सड़क पहुंचने के बाद लोगों के साथ जानवरों को भी मिली राहत
Thu, 02 Nov 2023 11:07 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Thu, 02 Nov 2023 11:07 PM IST
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पिथौरागढ़। अक्तूबर अंतिम सप्ताह से उच्च हिमालयी क्षेत्रों में माइग्रेशन पर गए ग्रामीण ठंड बढ़ने के बाद ग्रामीण निचले क्षेत्रों को लौटने लगे हैं। दारमा और व्यास वैली के गांवों तक सड़क पहुंचने के बाद लोगों के साथ-साथ जानवरों को भी राहत मिली है। उन्हें उच्च हिमालय से सामान से लदकर नहीं आना पड़ता है। अब लोग गाड़ियों से सामान को निचले क्षेत्रों में भेजते हैं।
उच्च हिमालयी क्षेत्र में छह माह के प्रवास पर गए ग्रामीणों ने भारी बर्फबारी से पूर्व खेती-बाड़ी का काम निपटाकर निचले क्षेत्रों को आना शुरू हो गया है। दारमा वैली के अधिकतर भेड़ पालक और अन्य खेती के कार्य के लिए गए ग्रामीण निचले क्षेत्रों को आने लगे हैं। व्यास वैली से भी नवंबर प्रथम सप्ताह से माइग्रेशन शुरू हो गया है।
सड़क बनने से पहले जड़ी-बूटी, राशन सहित अन्य जरूरी सामान को भेड़पालक और ग्रामीण भेड़, घोड़े या फिर झुप्पू की पीठ पर लाद देते थे। यही जानवर सामान को 50 से 100 किलोमीटर दूर पहुंचाते थे। कुछ सामान भेड़ पालकों को भी पीठ पर ढोना पड़ता था। दोनों घाटियों तक सड़क पहुंचने से लोगों के साथ-साथ जानवरों को भी राहत मिली है।
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जोहार वैली के ग्रामीणों को होती है दिक्कत
पिथौरागढ़। मुनस्यारी के जोहार वैली के माइग्रेशन पर ग्रामीणों को सड़क नहीं होने से दिक्कत होती है। उन्हें वर्षाकाल में ध्वस्त रास्ते, ऊफनाते नाले पार कर निचले क्षेत्रों को आना पड़ता है। वर्तमान में बीआरओ मुनस्यारी के धापा बैंड से मिलम तक 65 किमी सड़क का निर्माण कर रहा है। अब बस छह किमी सड़क का और निर्माण कार्य किया जाना है। जिसके बाद माइग्रेशन पर गए ग्रामीणों और जानवरों को राहत मिलेगी। संवाद
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उच्च हिमालयी क्षेत्र में छह माह के प्रवास पर गए ग्रामीणों ने भारी बर्फबारी से पूर्व खेती-बाड़ी का काम निपटाकर निचले क्षेत्रों को आना शुरू हो गया है। दारमा वैली के अधिकतर भेड़ पालक और अन्य खेती के कार्य के लिए गए ग्रामीण निचले क्षेत्रों को आने लगे हैं। व्यास वैली से भी नवंबर प्रथम सप्ताह से माइग्रेशन शुरू हो गया है।
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सड़क बनने से पहले जड़ी-बूटी, राशन सहित अन्य जरूरी सामान को भेड़पालक और ग्रामीण भेड़, घोड़े या फिर झुप्पू की पीठ पर लाद देते थे। यही जानवर सामान को 50 से 100 किलोमीटर दूर पहुंचाते थे। कुछ सामान भेड़ पालकों को भी पीठ पर ढोना पड़ता था। दोनों घाटियों तक सड़क पहुंचने से लोगों के साथ-साथ जानवरों को भी राहत मिली है।
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जोहार वैली के ग्रामीणों को होती है दिक्कत
पिथौरागढ़। मुनस्यारी के जोहार वैली के माइग्रेशन पर ग्रामीणों को सड़क नहीं होने से दिक्कत होती है। उन्हें वर्षाकाल में ध्वस्त रास्ते, ऊफनाते नाले पार कर निचले क्षेत्रों को आना पड़ता है। वर्तमान में बीआरओ मुनस्यारी के धापा बैंड से मिलम तक 65 किमी सड़क का निर्माण कर रहा है। अब बस छह किमी सड़क का और निर्माण कार्य किया जाना है। जिसके बाद माइग्रेशन पर गए ग्रामीणों और जानवरों को राहत मिलेगी। संवाद