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आखिरकार दिख ही गया हिमालयन स्नो कॉक

Sun, 03 Jan 2016 09:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,दीपक उप्रेती /पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला,दीपक उप्रेती /पिथौरागढ़ Updated Sun, 03 Jan 2016 09:58 PM IST
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After seeing the Himalayan snow cock only
खलियाटॉप के बुग्यालों में बर्ड वॉचिंग के लिए पहुंचे वॉचरों के लिए रविवार का दिन बेहद सुकून भरा रहा। इनको दुर्लभ हिमालय स्नो कॉक पक्षी के दर्शन हो गए। इनकी संख्या एक दो नहीं पूरे 36 से ज्यादा है। हिमालयन स्नो कॉक मुख्य रूप से गढ़वाल मंडल के क्वारी ग्लेशियर कभी दिखा था। लेह और जम्मू-कश्मीर के उच्च हिमालयी इलाकों में इसे बड़ी संख्या में देखा गया है। इस पक्षी का स्वभाव है कि यह 3500 मीटर से नीचे नहीं उतरता। खलियाटॉप की दूरी सड़क से बहुत कम है, लेकिन खलियाटॉप है काफी ऊंचाई पर। खलियाटॉप के आसपास इस समय भी बर्फ मौजूद है। बर्ड वॉचरों ने चार दिन से लगातार खलियाटॉप तथा उसके आसपास के इलाकों में खोजबीन की। आज सुबह जैसे ही बर्ड वॉचरों का दल खलियाटॉप के  बुग्यालों में घूम रहा था तभी उनको हिमालयन स्नो कॉक नजर आ गए।
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सफेद और भूरे रंग वाले स्नो कॉक की खासियत यह है कि वह कुछ दूरी तक उड़ान भर लेता है। बर्फ में ही ये अपने चारा तलाशते हैं। बर्ड वॉचर इस बात से खुश हैं कि खलियाटॉप में स्नोकॉक मिल रहा है।
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बर्ड वॉचर राजेश पंवार ने बताया कि खलियाटॉप में इतनी बड़ी संख्या में स्नो कॉक का मिलना किसी आश्चर्य से कम नहीं है। वह कहते हैं कि यहां के लोग जैव विविधता संरक्षण के प्रति सजग हैं। बर्ड वाचर गुंजन अरोड़ा का कहना है कि इतनी ज्यादा संख्या लेह और लद्दाख में ही स्नोकॉक नजर आता है। उन्होंने यह भी कहा कि बर्ड वॉचिंग के लिए खलियाटॉप सबसे बेहतरीन जगह है और यहां पर विभिन्न प्रजातियों की दुर्लभ पक्षी मिल जाते हैं। बर्ड वॉचिंग के दौरान पूजा शर्मा, आर्क घोष, शीला पंवार, सुरेंद्र पंवार भी थे।
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बर्ड वॉचरों ने दिखाई नई राह
युवा प्रकृति प्रेमी सुरेंद्र पंवार का कहना है कि बर्ड वॉचरों ने खलियाटॉप में स्नो कॉक को खोजकर बर्ड वाचिंग के क्षेत्र में नई राह दिखाई है। वह कहते हैं कि जब इलाके में इतने दुर्लभ पक्षी मिल सकते हैं तो यह स्थान बर्ड वॉचिंग के लिए सबसे बेहतरीन स्थान साबित हो सकता है। पक्षियों के सहारे इस क्षेत्र में पर्यटन की गतिविधियों को बढ़ाया जा सकता है।


कई पक्षी प्रेमियों ने जताई आने की इच्छा
प्रकृति प्रेमी सुरेंद्र पंवार का कहना है कि बर्ड वॉचिंग की कवरेज सिर्फ अमर उजाला ने की है। देश और विदेश में अमर उजाला ई पेपर पढ़कर कई पक्षी प्रेमियों ने खलियाटॉप आने की इच्छा जताई है। वह कहते हैं कि पहली बार इस इलाके में बर्ड वॉचरों का आना मील का पत्थर साबित हो गया है। भविष्य में संभावनाएं बढ़ जाएंगी।
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