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Pithoragarh News: 'भ्यूलागाड़ पार करते वक्त दुर्घटना हुई तो जिम्मेदारी आपकी'
Sun, 28 Jul 2024 11:42 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sun, 28 Jul 2024 11:42 PM IST
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नदी पार कर बगीचा बगड़ बाजार को जाता ग्रामीण और भ्यूलागाड़ के पास प्रशासन की ओर से लगाया गया चेत
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बंगापानी (पिथौरागढ़)। 'वर्षाकाल में भ्यूलागाड़ उफान पर है। ग्रामीणों से आग्रह है कि भ्यूलागाड़ पार करने का प्रयत्न न करें। यदि पार करते समय कोई दुर्घटना होती है तो आप स्वयं जिम्मेदार रहेंगे'। यह चेतावनी बोर्ड तहसील प्रशासन ने बंगापानी तहसील के घरूड़ी और मनकोट के बीच बहने वाली भ्यूलागाड़ नदी किनारे लगाया है। नदी पर नया पुल बनाने के बजाय नदी किनारे लगाया गया यह चेतावनी बोर्ड पिछले एक साल से लोगों को न सिर्फ चिढ़ा रहा है बल्कि उनका दर्द भी बढ़ा रहा है।
बरसात में पहाड़ का जीवन वाकई पहाड़ सरीखा हो जाता है। सड़कें, पैदल रास्तों के मलबे से पटे होनेस नदियों-नालों पर पुल नहीं होने से लोगों को जान जोखिम में डालकर आवाजाही करनी पड़ती है। कुछ ऐसी ही स्थिति पिछले दो साल से बंगापानी तहसील के भ्यूला, तल्ला मनकोट और मल्ला मनकोट के ग्रामीणों के लिए भी बनी हुई है।
घरूड़ी से मनकोट को जोड़ने वाला पुल दो साल पहले भारी बारिश में बह गया था। उसके स्थान पर आज तक नया पुल नहीं बनाया गया है। बरसात के दिनों में भ्यूलागाड़ के उफान पर आने से ग्रामीणों का संपर्क पूरी तरह से कट जाता है। इन गांवों की लगभग 1500 की आबादी को खाद्य सामग्री सहित रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बगीचा बगड़ या बंगापानी बाजार जाना पड़ता है। लगभग 40 से अधिक छात्र-छात्राओं को भी जान हथेली पर रखकर आवाजाही करनी पड़ती है। पुल बहने के बाद ग्रामीण लगातार नए पुल की मांग कर रहे हैं लेकिन पुल निर्माण के बजाय प्रशासन ने भी चेतावनी बोर्ड लगाकर लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया है। ऊपर से किसी हादसे के लिए स्वयं जनता की जवाबदेही तय कर दी है।
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पुल निर्माण की मांग को लेकर शासन-प्रशासन से कई बार मिले, मगर तहसील प्रशासन ने एक चेतावनी बोर्ड लगाकर ग्रामीणों के साथ मजाक किया है। -भगत मेहरा, पूर्व ग्राम प्रधान मवानी दवानी।
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बरसात में पहाड़ का जीवन वाकई पहाड़ सरीखा हो जाता है। सड़कें, पैदल रास्तों के मलबे से पटे होनेस नदियों-नालों पर पुल नहीं होने से लोगों को जान जोखिम में डालकर आवाजाही करनी पड़ती है। कुछ ऐसी ही स्थिति पिछले दो साल से बंगापानी तहसील के भ्यूला, तल्ला मनकोट और मल्ला मनकोट के ग्रामीणों के लिए भी बनी हुई है।
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घरूड़ी से मनकोट को जोड़ने वाला पुल दो साल पहले भारी बारिश में बह गया था। उसके स्थान पर आज तक नया पुल नहीं बनाया गया है। बरसात के दिनों में भ्यूलागाड़ के उफान पर आने से ग्रामीणों का संपर्क पूरी तरह से कट जाता है। इन गांवों की लगभग 1500 की आबादी को खाद्य सामग्री सहित रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बगीचा बगड़ या बंगापानी बाजार जाना पड़ता है। लगभग 40 से अधिक छात्र-छात्राओं को भी जान हथेली पर रखकर आवाजाही करनी पड़ती है। पुल बहने के बाद ग्रामीण लगातार नए पुल की मांग कर रहे हैं लेकिन पुल निर्माण के बजाय प्रशासन ने भी चेतावनी बोर्ड लगाकर लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया है। ऊपर से किसी हादसे के लिए स्वयं जनता की जवाबदेही तय कर दी है।
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पुल निर्माण की मांग को लेकर शासन-प्रशासन से कई बार मिले, मगर तहसील प्रशासन ने एक चेतावनी बोर्ड लगाकर ग्रामीणों के साथ मजाक किया है। -भगत मेहरा, पूर्व ग्राम प्रधान मवानी दवानी।