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पड़ी अबीर की मार बिरज में फलो-फूलो मेरो कन्हैया
Wed, 20 Mar 2019 09:12 PM IST
kamlesh kamlesh
ब्यूरो/ अमर उजाला , पिथौरागढ़।
ब्यूरो/ अमर उजाला , पिथौरागढ़।
Published by: kamlesh kamlesh
Updated Wed, 20 Mar 2019 09:12 PM IST
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पिथौरागढ़ के बैंक रोड में आयोजित होली कार्यक्रम में नृत्य करती महिलाएं
- फोटो : पिथौरागढ़
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सीमांत जिले में खड़ी होली गायन की धूम मची है। नगर के साथ ही गांवों में बृज, अवधी होली का गायन चरम पर पहुंच गया है। चारों ओर अबीर, गुलाल और रंगों की होली से होल्यार सराबोर हैं। गांवों के होल्यारों पर इत्र और रंग मिलाया पानी खूब बरस रहा है। बृहस्पतिवार को छलड़ी के आशीष वचनों के साथ ही होली का समापन हो जाएगा।
जिला मुख्यालय के गांधी चौक में काली कुमाऊं के होल्यारों ने होली गायन कर धमाल मचाया। पांडेय गांव, हुड़ैती, नाकोट, चंडाक, बांस, इग्यारदेवी, वड्डा, झूलाघाट, देवलथल, कनालीछीना के गांवों में खड़ी होली गायन में होल्यार मस्त है। होल्यारों को आलू के गुटके, पुदीने की चटनी और लौंग मिली चाय पेश की जा रही है। होल्यार ‘हमें उतारो पार मल्हा, हमने मंजूरी ले लीनो, तल धरती पुर बादल-बादल उपजी भया, भलो-भलो जनम लियो श्याम राधिक भलो जनम लियो मथुरा में’ आदि होलियो में जमकर थिरक रहे हैं।
उधर, डीडीहाट के हाट, सिटौली, धौलेत, खोली, भांतड़, ओझागांव, पाठक गांव, नरेत, पंतगांव, आगांव, अस्कोट, दोलाचौकी, गुड़ौली, बगना आदि गांवों में होली की धूम मची है। यहां ‘पड़ी अबीर की मार बिरज में फलो-फूलो मेरो कन्हैया, तल धरती पुर बादल-बादल उपजी भया, आपू वन जै रो वन जो गयो वन जा रोछ, आंगन आम लगाय पिया वन जा रो छ, कह दीजो रघुनाथ भरत से कई दीजो, दशरथ राजा बांस काटन गए अंगूठा लागि फांस भरत से कह दीजो’ आदि गीतों पर होल्यार झूम रहे हैं।
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गांवों में रात को बैठकी होली गायन के साथ ही हंसी-ठिठोली भी जमकर की जा रही है। गंगोलीहाट, बेड़ीनाग के भटीगांव, खेतोली, बना, बयां, ढनौली, कालासिला, बरसायत आदि गांवों में भी होल्यारों की टोली घर-घर जाकर होली गायन में मस्त है।
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जिला मुख्यालय के गांधी चौक में काली कुमाऊं के होल्यारों ने होली गायन कर धमाल मचाया। पांडेय गांव, हुड़ैती, नाकोट, चंडाक, बांस, इग्यारदेवी, वड्डा, झूलाघाट, देवलथल, कनालीछीना के गांवों में खड़ी होली गायन में होल्यार मस्त है। होल्यारों को आलू के गुटके, पुदीने की चटनी और लौंग मिली चाय पेश की जा रही है। होल्यार ‘हमें उतारो पार मल्हा, हमने मंजूरी ले लीनो, तल धरती पुर बादल-बादल उपजी भया, भलो-भलो जनम लियो श्याम राधिक भलो जनम लियो मथुरा में’ आदि होलियो में जमकर थिरक रहे हैं।
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उधर, डीडीहाट के हाट, सिटौली, धौलेत, खोली, भांतड़, ओझागांव, पाठक गांव, नरेत, पंतगांव, आगांव, अस्कोट, दोलाचौकी, गुड़ौली, बगना आदि गांवों में होली की धूम मची है। यहां ‘पड़ी अबीर की मार बिरज में फलो-फूलो मेरो कन्हैया, तल धरती पुर बादल-बादल उपजी भया, आपू वन जै रो वन जो गयो वन जा रोछ, आंगन आम लगाय पिया वन जा रो छ, कह दीजो रघुनाथ भरत से कई दीजो, दशरथ राजा बांस काटन गए अंगूठा लागि फांस भरत से कह दीजो’ आदि गीतों पर होल्यार झूम रहे हैं।
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गांवों में रात को बैठकी होली गायन के साथ ही हंसी-ठिठोली भी जमकर की जा रही है। गंगोलीहाट, बेड़ीनाग के भटीगांव, खेतोली, बना, बयां, ढनौली, कालासिला, बरसायत आदि गांवों में भी होल्यारों की टोली घर-घर जाकर होली गायन में मस्त है।