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जिले में 400 से अधिक लोग बन चुके हैं आपदा का ग्रास
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पिथौरागढ़। सीमांत जिले में वर्ष 1994 से अब तक आपदा काल में 400 से अधिक लोग अकाल मृत्यु का ग्रास बने हैं। पिछले कुछ सालों में मानसून काल सीमांत के लोगों के लिए काल बनकर बरसता रहा है।
लोग कभी ला-झेकला, मालपा, बस्तड़ी, मदरमा, मांगती, टांगा, धामीगांव, गैला, जाराजिबली में हुई आपदा के रूप में सहने के लिए विवश हैं। शासन-प्रशासन के लोग हर बार प्रभावितों को राहत का भरोसा देते हैं, लेकिन समय के साथ उनका दर्द भुला दिया जाता है।
वर्ष 1994 में पिथौरागढ़ जिले के रीठा रैतोली गांव में आई आपदा में 19 लोगों की मौत हुई थी। 1998 में मालपा आपदा में कैलाश मानसरोवर यात्रियों के साथ 221 लोगों ने जान गवाई थी। वर्ष 2007 में बरम स्यांकुरी में आपदा में 43, 2009 ला-झेकला में आई आपदा में भी 43 लोगों की मौत हुई थी। 2010 धारचूला-मुनस्यारी में आई आपदा में 10 लोगों की मौत हो गई थी।
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वर्ष 2013 की धारचूला-मुनस्यारी में आई आपदा में 23 लोगों की मौत हो गई थी। इसमें 21 लोग लापता हो गए थे और 42 लोग घायल हो गए थे। वर्ष 2014 धारचूला-मुनस्यारी में आई आपदा में 12 लोगों की मौत हो गई थी। दो लोग लापता और 17 लोग घायल हो गए थे। वर्ष 2015 धारचूला-मुनस्यारी में आई आपदा में 09 लोगों की मौत और तीन लोग घायल हो गए थे।
वर्ष 2016 में बस्तड़ी और नौलड़ा में आई आपदा में 30 लोगों की मौत हो गई थी। पांच लोग घायल हो गए थे। जून-जुलाई 2020 को टांगा 11, धामीगांव (भ्यौला), मेतली, गैला में दो-दो लोग और जाराजिबली, टांगा, धामी गांव भ्यौला में तीन महिला लापता हो गई थीं। साल दर साल पहाड़ में बढ़ रही अतिवृष्टि और बादल फटने के घटना के बाद भी प्रशासन ने इन घटनाओं से सबक नहीं लिया।
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लोग कभी ला-झेकला, मालपा, बस्तड़ी, मदरमा, मांगती, टांगा, धामीगांव, गैला, जाराजिबली में हुई आपदा के रूप में सहने के लिए विवश हैं। शासन-प्रशासन के लोग हर बार प्रभावितों को राहत का भरोसा देते हैं, लेकिन समय के साथ उनका दर्द भुला दिया जाता है।
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वर्ष 1994 में पिथौरागढ़ जिले के रीठा रैतोली गांव में आई आपदा में 19 लोगों की मौत हुई थी। 1998 में मालपा आपदा में कैलाश मानसरोवर यात्रियों के साथ 221 लोगों ने जान गवाई थी। वर्ष 2007 में बरम स्यांकुरी में आपदा में 43, 2009 ला-झेकला में आई आपदा में भी 43 लोगों की मौत हुई थी। 2010 धारचूला-मुनस्यारी में आई आपदा में 10 लोगों की मौत हो गई थी।
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वर्ष 2013 की धारचूला-मुनस्यारी में आई आपदा में 23 लोगों की मौत हो गई थी। इसमें 21 लोग लापता हो गए थे और 42 लोग घायल हो गए थे। वर्ष 2014 धारचूला-मुनस्यारी में आई आपदा में 12 लोगों की मौत हो गई थी। दो लोग लापता और 17 लोग घायल हो गए थे। वर्ष 2015 धारचूला-मुनस्यारी में आई आपदा में 09 लोगों की मौत और तीन लोग घायल हो गए थे।
वर्ष 2016 में बस्तड़ी और नौलड़ा में आई आपदा में 30 लोगों की मौत हो गई थी। पांच लोग घायल हो गए थे। जून-जुलाई 2020 को टांगा 11, धामीगांव (भ्यौला), मेतली, गैला में दो-दो लोग और जाराजिबली, टांगा, धामी गांव भ्यौला में तीन महिला लापता हो गई थीं। साल दर साल पहाड़ में बढ़ रही अतिवृष्टि और बादल फटने के घटना के बाद भी प्रशासन ने इन घटनाओं से सबक नहीं लिया।