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कड़ाके की ठंड के बीच टेंटों में रहने को मजबूर आपदा पीड़ित परिवार
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मुनस्यारी के जोशा गांव में टेंटों में रहने को मजबूर आपदा प्रभावित परिवार। संवाद
- फोटो : PITHORAGARH
मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। आपदा के पांच माह बाद भी जोशा के पांच परिवार टेंटों में रह रहने को मजबूर हैं। कड़ाके की ठंड में टेंटों में रह रहे आपदा पीड़ितों को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
विगत 18-19 जुलाई को आई भीषण आपदा के चलते जोशा गांव की जमीन दरक गई थी, जिसके चलते कई परिवार बेघर हो गए थे। इनमें से कुछ परिवारों के घर रहने लायक थे तो वह परिवार मानसून काल समाप्त होने पर घरों को लौट गए, जिनके घर पूरी तरह से तबाह हो गए ऐसे परिवार अभी भी टेंटों में ही शरण लिए हैं। इनमें से हर्ष सिंह, हयात सिंह, जोहार सिंह, मंगल सिंह, खगेंद्र सिंह, बिमला देवी के परिवार अब भी टेंट में रहने को मजबूर हैं। इनके अलावा सात परिवार स्कूलों के भवनों में शरण लिए हुए हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्र में बर्फबारी के बाद अब तापमान में गिरावट आ चुकी है। रात के समय तापमान माइनस में चला जा रहा है। इसके चलते ये परिवार ठंड में कंपकंपाने को मजबूर हैं। प्रधान राजेश रोशन की पहल पर गांव वालों ने विस्थापन के लिए निर्विवाद रूप से गांव के समीप ही प्रशासन की मौजूदगी में जमीन चयनित कर ली है। लेकिन अभी शासन प्रशासन की ओर से कोई आदेश नहीं आया है।
टेंट में रात गुजारने को मजबूर विमला देवी का कहना है कि विस्थापन के लिए यदि प्रशासन अनुमति दे दे तो घर बना लेते परंतु शासन प्रशासन से मात्र आश्वासन ही मिला है। जाड़े के दिन हैं ठंड बढ़ती जा रही है। छोटे-छोटे बच्चे हैं। इससे काफी परेेशानी हो रही है। टेंट में रह रहे हर्ष सिंह का कहना है कि ठंड बढ़ने से समस्याएं भी बढ़ती जा रही हैं। परिवार के साथ स्कूल में शरण लिए रेणु देवी ने बताया कि जाड़े में दिक्कतें हो रही हैं। प्रधान राजेश रोशन का कहना है कि शासन प्रशासन जल्दी विस्थापन कर देता तो इन लोगों की दिक्कतें कम हो जातीं। अलाव की भी कोई व्यवस्था प्रशासन की ओर से नहीं की गई है।
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टांगा, मोरी सहित अन्य आपदा प्रभावित गांवों के लोग भी लौटे
बंगापानी। इस साल सबसे अधिक आपदा की मार झेलने वाले बंगापानी तहसील के गांवों के लोग भी अब उजाड़ पड़े गांवों में जा चुके हैं। जिन लोगों के मकान पूरी तरह से जमींदोज हो गए थे उन्होंने पड़ोसियों के मकानों में शरण ली है। जिनके मकान आपदा में ध्वस्त होने से बच गए थे वह अपने मकानों में रह रहे हैं। इन गांवों में आपदा से पेयजल लाइनें भी क्षतिग्रस्त हो गई थीं जिन्हें अभी स्थाई रूप से नहीं सुधारा गया है।
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विगत 18-19 जुलाई को आई भीषण आपदा के चलते जोशा गांव की जमीन दरक गई थी, जिसके चलते कई परिवार बेघर हो गए थे। इनमें से कुछ परिवारों के घर रहने लायक थे तो वह परिवार मानसून काल समाप्त होने पर घरों को लौट गए, जिनके घर पूरी तरह से तबाह हो गए ऐसे परिवार अभी भी टेंटों में ही शरण लिए हैं। इनमें से हर्ष सिंह, हयात सिंह, जोहार सिंह, मंगल सिंह, खगेंद्र सिंह, बिमला देवी के परिवार अब भी टेंट में रहने को मजबूर हैं। इनके अलावा सात परिवार स्कूलों के भवनों में शरण लिए हुए हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्र में बर्फबारी के बाद अब तापमान में गिरावट आ चुकी है। रात के समय तापमान माइनस में चला जा रहा है। इसके चलते ये परिवार ठंड में कंपकंपाने को मजबूर हैं। प्रधान राजेश रोशन की पहल पर गांव वालों ने विस्थापन के लिए निर्विवाद रूप से गांव के समीप ही प्रशासन की मौजूदगी में जमीन चयनित कर ली है। लेकिन अभी शासन प्रशासन की ओर से कोई आदेश नहीं आया है।
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टेंट में रात गुजारने को मजबूर विमला देवी का कहना है कि विस्थापन के लिए यदि प्रशासन अनुमति दे दे तो घर बना लेते परंतु शासन प्रशासन से मात्र आश्वासन ही मिला है। जाड़े के दिन हैं ठंड बढ़ती जा रही है। छोटे-छोटे बच्चे हैं। इससे काफी परेेशानी हो रही है। टेंट में रह रहे हर्ष सिंह का कहना है कि ठंड बढ़ने से समस्याएं भी बढ़ती जा रही हैं। परिवार के साथ स्कूल में शरण लिए रेणु देवी ने बताया कि जाड़े में दिक्कतें हो रही हैं। प्रधान राजेश रोशन का कहना है कि शासन प्रशासन जल्दी विस्थापन कर देता तो इन लोगों की दिक्कतें कम हो जातीं। अलाव की भी कोई व्यवस्था प्रशासन की ओर से नहीं की गई है।
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टांगा, मोरी सहित अन्य आपदा प्रभावित गांवों के लोग भी लौटे
बंगापानी। इस साल सबसे अधिक आपदा की मार झेलने वाले बंगापानी तहसील के गांवों के लोग भी अब उजाड़ पड़े गांवों में जा चुके हैं। जिन लोगों के मकान पूरी तरह से जमींदोज हो गए थे उन्होंने पड़ोसियों के मकानों में शरण ली है। जिनके मकान आपदा में ध्वस्त होने से बच गए थे वह अपने मकानों में रह रहे हैं। इन गांवों में आपदा से पेयजल लाइनें भी क्षतिग्रस्त हो गई थीं जिन्हें अभी स्थाई रूप से नहीं सुधारा गया है।