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आपदा प्रभावितों को सताने लगी भविष्य की चिंता
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बलतड़ी सड़क पर मलबा आने से ग्रामीण मुश्किल से कर रहे आवाजही।
- फोटो : PITHORAGARH
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मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। राहत केंद्रों, पड़ोसियों और रिश्तेदारों के घरों में शरण लिए हुए आपदा प्रभावितों को भविष्य की चिंता सताने लगी है। आपदा प्रभावितों का कहना है कि आपदा ने उनसे सब कुछ छीन लिया अब रहने के लिए घर भी नहीं बचा ऐसे में उनका और उनके बच्चों का भविष्य क्या होगा।
मुनस्यारी तहसील के जोशा गांव निवासी रेणु देवी का मकान आपदा में जमीदोज हो गया था। खतरे की आशंका को देखेते हुए उनके परिवार को प्राथमिक विद्यालय जोशा में शिफ्ट कर दिया था। समय रहते शिफ्ट होने से परिवार के ऊपर से बड़ा खतरा टल गया। अब रेणु को परिवार और बच्चों के भविष्य की चिंता सताने लगी है। उनका कहना है कि पूरा गांव खतरे में आ गया है। 15 दिन पूर्व राहत शिविर में प्रशासन ने राशन दिया था अब वह भी समाप्त हो गया है। उन्होंने सरकार शासन-प्रशासन से मुआवजा देने के साथ ही परिवार को सुरक्षित स्थान में विस्थापित करने की मांग की है। इसी गांव के 95 वर्षीय पुष्कर सिंह का मकान भी आपदा में ध्वस्त हो गया था। वह मदकोट में अपनी बेटी के यहां शरण लिए हुए हैं। बेटा गलवां घाटी में आईटीबीपी में अपनी सेवाएं दे रहा है। ग्रामीण हयात सिंह का मकान भी आपदा में टूट गया था। उनका परिवार टेंटों में रहने को मजबूर है। हयात सिंह को प्रशासन से राशन के अलावा कोई राहत नहीं मिल पाई है। सेरासुरईधार निवासी मंगल सिंह दसौनी का कहना है कि उनका मकान क्षतिग्रस्त हो गया है। उनका परिवार गांव में पड़ोसियों यहां शरण लिए हुए हैं। राजस्व उप निरीक्षक क्षति का आकलन कर गए है लेकिन अभी मुआवजा नहीं मिला है।
बोले आपदा प्रभावित
जोशा गांव में लगातार जमीन दरक रही है। जिस कारण हर रोज किसी न किसी मकान को खतरा पैदा होता जा रहा है। राजस्व उपनिरीक्षक क्षति का आकलन कर गए हैं। सरकार को गांव के विस्थापन को लेकर प्रयास करने चाहिए।
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राजेश रोशन, ग्राम प्रधान जोशा
गांव में जिनका भी आपदा के चलते नुकसान हुआ है प्रशासन ने क्षति का आकलन कर दिया है। अब प्रशासन कब तक इन प्रभावितों को मुवावजा दिलाता है इसका कोई पता नहीं है। आपदा प्रभावित अपने और बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
संगीता देवी, ग्राम प्रधान सेरा सुरईधार
भूकटाव से कानड़ी गांव को खतरा
झूलाघाट (पिथौरागढ़)। लगातार हो रही भारी बारिश के बाद महाकाली नदी से कानड़ी गांव की उपजाऊ भूमि कट गई है। ग्रामीणों ने डीएम से मिलकर लोगों को राहत राशि देते हुए तटबंध बनाने की मांग की है।
काली नदी के कटाव से कानड़ी गांव की उपजाऊ भूमि बह गई है। ग्राम प्रधान पूजा चंद और क्षेत्र पंचायत सदस्य रज्यूड़ा राजेंद्र सिंह ने सांसद प्रतिनिधि जीवन वल्दिया के नेतृत्व में डीएम के सम्मुख समस्या को रखा है। उन्होंने बताया कटाव से गांव के कुछ मकानों को भी खतरा है। उन्होंने कहा कि शीघ्र उचित कार्रवाई की मांग की।
बलतड़ी-झूलाघाट सड़क मलबे से पटी
झूलाघाट(पिथौरागढ़)। पिछले दिनों हुई भारी बारिश से बलतड़ी-झूलाघाट सड़क पर मलबा आ गया। जिस कारण सड़क बंद हो गई है। सड़क बंद होने से लोगों को पैदल चलने में भी दिक्कत हो रही है। खराब रास्ते पर पैर फिसलने से महाकाली में गिरने का खतरा बना हुआ है। जानवरों को जंगल ले जाने में दिक्कत होने के साथ ही जिला मुख्यालय तक वाहनों से भी आवाजाही नहीं हो रही है। प्रधान कविता चंद ने जिला प्रशासन से रास्ते के मलबे को हटाने की मांग की है।
प्रशासन से दौला के आपदा पीड़ित ने लगाई मदद की गुहार
पिथौरागढ़। जिला मुख्यालय के दौला वार्ड में आपदा पीड़ित ने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि लगातार उनके घर में पानी घुस रहा है। जिससे घर रहने लायक नहीं रह गया है। सोमवार को आपदा पीड़ित गंगा राम ने डीएम को पत्र देकर मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि 18 अगस्त को भारी बारिश से उनकी गौशाला में पानी भर गया था। दो बकरी मर गई। लोगों की मदद से किसी तरह अन्य जानवरों को बचाया गया। उन्होंने बताया कि एक निर्माणाधीन मकान की छत के नीचे मवेशियों को रखा है। रात के समय उनके रक्षा के लिए वहीं सोते हैं। घर रहने लायक नहीं रह गया है। मकान की दीवार ध्वस्त हो गई है। रोज पानी उनके घर में घुस रहा है। जिस कारण परिवार के कुल सात सदस्यों का रहना मुश्किल हो गया है।
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मुनस्यारी तहसील के जोशा गांव निवासी रेणु देवी का मकान आपदा में जमीदोज हो गया था। खतरे की आशंका को देखेते हुए उनके परिवार को प्राथमिक विद्यालय जोशा में शिफ्ट कर दिया था। समय रहते शिफ्ट होने से परिवार के ऊपर से बड़ा खतरा टल गया। अब रेणु को परिवार और बच्चों के भविष्य की चिंता सताने लगी है। उनका कहना है कि पूरा गांव खतरे में आ गया है। 15 दिन पूर्व राहत शिविर में प्रशासन ने राशन दिया था अब वह भी समाप्त हो गया है। उन्होंने सरकार शासन-प्रशासन से मुआवजा देने के साथ ही परिवार को सुरक्षित स्थान में विस्थापित करने की मांग की है। इसी गांव के 95 वर्षीय पुष्कर सिंह का मकान भी आपदा में ध्वस्त हो गया था। वह मदकोट में अपनी बेटी के यहां शरण लिए हुए हैं। बेटा गलवां घाटी में आईटीबीपी में अपनी सेवाएं दे रहा है। ग्रामीण हयात सिंह का मकान भी आपदा में टूट गया था। उनका परिवार टेंटों में रहने को मजबूर है। हयात सिंह को प्रशासन से राशन के अलावा कोई राहत नहीं मिल पाई है। सेरासुरईधार निवासी मंगल सिंह दसौनी का कहना है कि उनका मकान क्षतिग्रस्त हो गया है। उनका परिवार गांव में पड़ोसियों यहां शरण लिए हुए हैं। राजस्व उप निरीक्षक क्षति का आकलन कर गए है लेकिन अभी मुआवजा नहीं मिला है।
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बोले आपदा प्रभावित
जोशा गांव में लगातार जमीन दरक रही है। जिस कारण हर रोज किसी न किसी मकान को खतरा पैदा होता जा रहा है। राजस्व उपनिरीक्षक क्षति का आकलन कर गए हैं। सरकार को गांव के विस्थापन को लेकर प्रयास करने चाहिए।
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राजेश रोशन, ग्राम प्रधान जोशा
गांव में जिनका भी आपदा के चलते नुकसान हुआ है प्रशासन ने क्षति का आकलन कर दिया है। अब प्रशासन कब तक इन प्रभावितों को मुवावजा दिलाता है इसका कोई पता नहीं है। आपदा प्रभावित अपने और बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
संगीता देवी, ग्राम प्रधान सेरा सुरईधार
भूकटाव से कानड़ी गांव को खतरा
झूलाघाट (पिथौरागढ़)। लगातार हो रही भारी बारिश के बाद महाकाली नदी से कानड़ी गांव की उपजाऊ भूमि कट गई है। ग्रामीणों ने डीएम से मिलकर लोगों को राहत राशि देते हुए तटबंध बनाने की मांग की है।
काली नदी के कटाव से कानड़ी गांव की उपजाऊ भूमि बह गई है। ग्राम प्रधान पूजा चंद और क्षेत्र पंचायत सदस्य रज्यूड़ा राजेंद्र सिंह ने सांसद प्रतिनिधि जीवन वल्दिया के नेतृत्व में डीएम के सम्मुख समस्या को रखा है। उन्होंने बताया कटाव से गांव के कुछ मकानों को भी खतरा है। उन्होंने कहा कि शीघ्र उचित कार्रवाई की मांग की।
बलतड़ी-झूलाघाट सड़क मलबे से पटी
झूलाघाट(पिथौरागढ़)। पिछले दिनों हुई भारी बारिश से बलतड़ी-झूलाघाट सड़क पर मलबा आ गया। जिस कारण सड़क बंद हो गई है। सड़क बंद होने से लोगों को पैदल चलने में भी दिक्कत हो रही है। खराब रास्ते पर पैर फिसलने से महाकाली में गिरने का खतरा बना हुआ है। जानवरों को जंगल ले जाने में दिक्कत होने के साथ ही जिला मुख्यालय तक वाहनों से भी आवाजाही नहीं हो रही है। प्रधान कविता चंद ने जिला प्रशासन से रास्ते के मलबे को हटाने की मांग की है।
प्रशासन से दौला के आपदा पीड़ित ने लगाई मदद की गुहार
पिथौरागढ़। जिला मुख्यालय के दौला वार्ड में आपदा पीड़ित ने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि लगातार उनके घर में पानी घुस रहा है। जिससे घर रहने लायक नहीं रह गया है। सोमवार को आपदा पीड़ित गंगा राम ने डीएम को पत्र देकर मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि 18 अगस्त को भारी बारिश से उनकी गौशाला में पानी भर गया था। दो बकरी मर गई। लोगों की मदद से किसी तरह अन्य जानवरों को बचाया गया। उन्होंने बताया कि एक निर्माणाधीन मकान की छत के नीचे मवेशियों को रखा है। रात के समय उनके रक्षा के लिए वहीं सोते हैं। घर रहने लायक नहीं रह गया है। मकान की दीवार ध्वस्त हो गई है। रोज पानी उनके घर में घुस रहा है। जिस कारण परिवार के कुल सात सदस्यों का रहना मुश्किल हो गया है।