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घोषणापत्र को झूठ का पुलिंदा न बनाया जाए
Pithoragarh
Updated Sun, 30 Mar 2014 05:35 AM IST
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पिथौरागढ़। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अमर उजाला की ओर से आयोजित सीधा संवाद में युवाओं ने बेबाकी से अपनी बात रखी। युवा चाहते हैं कि हमारे सांसद युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए ठोस पहल करे। युवाओं ने कहा कि मौजूदा सरकार ने महंगाई रोकने की दिशा में कोई उल्लेखनीय कदम नहीं उठाया। इस बार भी कांग्रेस का जो घोषणापत्र सामने आया है, उसमें महंगाई का मुद्दा शामिल नहीं है।
नीलम कहती हैं कि सांसद का चुनाव बेरोजगारी दूर करने की शर्त पर ही करेंगी। वह कहती हैं कि लोकसभा के उम्मीदवारों को अपने स्थानीय मुद्दों पर आधारित अलग से घोषणापत्र तैयार करना चाहिए। बिंदु का कहना है कि सांसद को महिला सुरक्षा के लिए सरकार पर दबाव बनाना चाहिए। वह मात्र कुछ समर्थकों को खुश करने की मंशा पालकर न चले। रमेश पांडे कहते हैं कि जो वादे पूरा हो सके, उसे ही घोषणापत्र में शामिल किया जाए। अन्यथा यह झूठ का पुलिंदा साबित हो जाएगा। सोहन सिर्खाल चाहते हैं कि आपराधिक छवि के लोग राजनीति में नहीं आएं। सुमन सानियाल मानती हैं कि ठीक चुनाव के समय ही जाति और धर्म की बातें सामने आती हैं। मनीषा जोशी, अंजु पांडे, तनुजा जोशी, भगवती का कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र में विकास की पहल सांसद को करनी चाहिए। व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान खोले जाएं। वह कहते हैं कि ऐसा प्रधानमंत्री बनाया जाए जो विश्व पटल पर देश का सम्मान बढ़ा सके। उनमें अपने विवेक से फैसला लेने की क्षमता हो।
महिला सुरक्षा के लिए ठोस उपाय हों
दीपिका पुनेठा कहती हैं कि महिला सुरक्षा के मामले में पिछली सरकार नाकाम साबित हुई, जो नई सरकार बने वह महिला सुरक्षा की पूरी गारंटी ले। महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
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भ्रष्टाचार पर खुलकर बोलें पार्टियां
भागीरथी कहती हैं कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर राजनीतिक दलों को खुलकर बोलना चाहिए। यही नहीं भ्रष्टाचार ही चुनाव का मुख्य मुद्दा बने। यदि सभी दल इसकी पहल करते तो शायद इस बुराई पर अंकुश भी लग जाता।
सीमा तक सड़कों का निर्माण हो
आशा कापड़ी का कहना है कि देश की सुरक्षा के बारे में गंभीरता से सोचा जाए। आज चीन में भारतीय सीमा तक सड़क बना दी है, लेकिन हमारे यहां सीमा से जोड़ने वाली सड़कों के निर्माण की रफ्तार धीमी है।
तकनीकी शिक्षा का विकास हो
मतदाता गीता पंत कहती हैं कि तकनीकी शिक्षा के विकास की ओर ध्यान देना चाहिए। यदि ज्यादा तकनीकी शिक्षण संस्थान खुलेंगे तो युवाओं के सामने नए अवसर आएंगे। इससे बेरोजगारी भी कम होगी।
स्थानीय स्तर पर घोषणापत्र बने
पूरन सिंह कहते हैं कि सांसद को स्थानीय स्तर पर घोषणापत्र बनाना चाहिए। पार्टी से पहले उसे क्षेत्र की चिंता हो। सांसद में समस्या हल करने की क्षमता भी होनी चाहिए। दलों को चाहिए कि वह अक्षम व्यक्ति को न थोपे।
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नीलम कहती हैं कि सांसद का चुनाव बेरोजगारी दूर करने की शर्त पर ही करेंगी। वह कहती हैं कि लोकसभा के उम्मीदवारों को अपने स्थानीय मुद्दों पर आधारित अलग से घोषणापत्र तैयार करना चाहिए। बिंदु का कहना है कि सांसद को महिला सुरक्षा के लिए सरकार पर दबाव बनाना चाहिए। वह मात्र कुछ समर्थकों को खुश करने की मंशा पालकर न चले। रमेश पांडे कहते हैं कि जो वादे पूरा हो सके, उसे ही घोषणापत्र में शामिल किया जाए। अन्यथा यह झूठ का पुलिंदा साबित हो जाएगा। सोहन सिर्खाल चाहते हैं कि आपराधिक छवि के लोग राजनीति में नहीं आएं। सुमन सानियाल मानती हैं कि ठीक चुनाव के समय ही जाति और धर्म की बातें सामने आती हैं। मनीषा जोशी, अंजु पांडे, तनुजा जोशी, भगवती का कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र में विकास की पहल सांसद को करनी चाहिए। व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान खोले जाएं। वह कहते हैं कि ऐसा प्रधानमंत्री बनाया जाए जो विश्व पटल पर देश का सम्मान बढ़ा सके। उनमें अपने विवेक से फैसला लेने की क्षमता हो।
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महिला सुरक्षा के लिए ठोस उपाय हों
दीपिका पुनेठा कहती हैं कि महिला सुरक्षा के मामले में पिछली सरकार नाकाम साबित हुई, जो नई सरकार बने वह महिला सुरक्षा की पूरी गारंटी ले। महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
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भ्रष्टाचार पर खुलकर बोलें पार्टियां
भागीरथी कहती हैं कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर राजनीतिक दलों को खुलकर बोलना चाहिए। यही नहीं भ्रष्टाचार ही चुनाव का मुख्य मुद्दा बने। यदि सभी दल इसकी पहल करते तो शायद इस बुराई पर अंकुश भी लग जाता।
सीमा तक सड़कों का निर्माण हो
आशा कापड़ी का कहना है कि देश की सुरक्षा के बारे में गंभीरता से सोचा जाए। आज चीन में भारतीय सीमा तक सड़क बना दी है, लेकिन हमारे यहां सीमा से जोड़ने वाली सड़कों के निर्माण की रफ्तार धीमी है।
तकनीकी शिक्षा का विकास हो
मतदाता गीता पंत कहती हैं कि तकनीकी शिक्षा के विकास की ओर ध्यान देना चाहिए। यदि ज्यादा तकनीकी शिक्षण संस्थान खुलेंगे तो युवाओं के सामने नए अवसर आएंगे। इससे बेरोजगारी भी कम होगी।
स्थानीय स्तर पर घोषणापत्र बने
पूरन सिंह कहते हैं कि सांसद को स्थानीय स्तर पर घोषणापत्र बनाना चाहिए। पार्टी से पहले उसे क्षेत्र की चिंता हो। सांसद में समस्या हल करने की क्षमता भी होनी चाहिए। दलों को चाहिए कि वह अक्षम व्यक्ति को न थोपे।