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छात्रवृत्ति के 10 लाख खा गए

Thu, 11 Apr 2013 05:30 AM IST
Pithoragarh
Pithoragarh Updated Thu, 11 Apr 2013 05:30 AM IST
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बेरीनाग। बेरीनाग स्नातकोत्तर महाविद्यालय में एससी-एसटी छात्रवृत्ति घोटाले की रकम पूर्व में आंकी गई धनराशि से कहीं अधिक निकली है। समाज कल्याण विभाग के सहायक विकास अधिकारी बीडी पंत ने इस मामले में विस्तृत जांच के बाद 9,99,103 रुपये के गबन की पुष्टि की है, जबकि पूर्व में 7,30,985 रुपये के हेरफेर का खुलासा होने के बाद 31 अक्तूबर 2010 को बेरीनाग थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
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समाज कल्याण विभाग के सहायक विकास अधिकारी बीडी पंत ने बताया कि कालेज में 2007-08, 2008-09 और 2009-10 में अनुसूचित जाति जनजाति के छात्र-छात्राओं की छात्रवृत्ति के लिए समाज कल्याण विभाग ने 21,78,155 रुपये की धनराशि भेजी। छात्र-छात्राओं को निर्धारित छात्रवृत्ति न मिलने पर छात्रों ने कालेज प्रशासन के खिलाफ आंदोलन शुरू किया तो कालेज प्रशासन ने 3,59,445 रुपये अतिरिक्त बताकर समाज कल्याण विभाग को वापस कर दिए और अपने खाते में 58,547 रुपये शेष बताए। पंत ने बताया कि प्रथम दृष्टया 7,30,985 रुपये की राशि के हेरफेर का पता चलने पर मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, लेकिन जांच के बाद 18,18,710 रुपये में से 8,19,607 रुपये की छात्रवृत्ति बांटे जाने के प्रमाण मिले और 9,99,103 के गबन की पुष्टि हुई।
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इस बहुचर्चित मामले में शासन ने गत दिवस कार्रवाई की अनुमति देने के बाद मामले की मुख्य आरोपी तत्कालीन प्राचार्या डा. गंगा बोरा को निलंबित कर दिया है। डा. बोरा अभी पौढ़ी गढ़वाल में तैनात हैं। प्रकरण के दूसरे आरोपी लिपिक की मृत्यु हो चुकी है। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस को इस मामले में कार्रवाई के लिए शासन ने करीब ढाई साल का लंबा इंतजार कराया।
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