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निजी अस्पतालों से मरीज डिस्चार्ज, ओपीडी व आकस्मिक सेवाएं भी बंद
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पिथौरागढ़। क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट (सीईए) के तहत कार्रवाई के नोटिस जारी होने से नाराज निजी चिकित्सकों ने चिकित्सा सेवाएं बंद कर दी हैं। डॉक्टरों ने अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया है। डॉक्टरों ने ओपीडी और आकस्मिक सेवाएं भी बंद रखी। इसके चलते अधिकांश मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
आईएमए के पिथौरागढ़ जिला सचिव डॉ. जेसी गड़कोटी ने कहा कि सीईए उत्तराखंड के हित में नहीं है। इसके लागू होने से चिकित्सा सेवाएं बेहद महंगी हो जाएंगी और गरीब मरीज के लिए उपचार करा पाना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इस अव्यवहारिक नीति का विरोध करने पर चिकित्सकों को कार्रवाई की चेतावनी दी जा रही है।
इस मामले में कोई सकारात्मक हल नहीं निकलने पर शुक्रवार से सभी निजी क्लीनिक बंद रखे जा रहे हैं। जब तक सरकार इस मसले का समाधान नहीं करती है चिकित्सा सेवाएं बंद रखी जाएंगी। निजी चिकित्सकों की हड़ताल के कारण जिले के 22 से अधिक निजी अस्पतालों में ओपीडी और सभी कार्य बंद रहे। सभी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया है। चिकित्सकों ने बताया कि अस्पताल में पिछले एक-दो दिन में जिन मरीजों के ऑपरेशन हुए हैं वही मरीज भर्ती हैं। उन्हें भी हालत में सुधार होने के बाद डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। निजी अस्पतालों के बंद होने से हजारों मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
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आईएमए के पिथौरागढ़ जिला सचिव डॉ. जेसी गड़कोटी ने कहा कि सीईए उत्तराखंड के हित में नहीं है। इसके लागू होने से चिकित्सा सेवाएं बेहद महंगी हो जाएंगी और गरीब मरीज के लिए उपचार करा पाना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इस अव्यवहारिक नीति का विरोध करने पर चिकित्सकों को कार्रवाई की चेतावनी दी जा रही है।
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इस मामले में कोई सकारात्मक हल नहीं निकलने पर शुक्रवार से सभी निजी क्लीनिक बंद रखे जा रहे हैं। जब तक सरकार इस मसले का समाधान नहीं करती है चिकित्सा सेवाएं बंद रखी जाएंगी। निजी चिकित्सकों की हड़ताल के कारण जिले के 22 से अधिक निजी अस्पतालों में ओपीडी और सभी कार्य बंद रहे। सभी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया है। चिकित्सकों ने बताया कि अस्पताल में पिछले एक-दो दिन में जिन मरीजों के ऑपरेशन हुए हैं वही मरीज भर्ती हैं। उन्हें भी हालत में सुधार होने के बाद डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। निजी अस्पतालों के बंद होने से हजारों मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
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