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डॉ. बोरा ने 35 साल पुराने ट्यूमर का किया सफल ऑपरेशन
Updated Thu, 01 Nov 2018 10:53 PM IST
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पिथौरागढ़। जिला अस्पताल के मुख्य सर्जन डॉ. एलएस बोरा ने 35 वर्ष पुराने लार की ग्रंथि के ट्यूमर को सफलता पूर्वक निकाल दिया। हाई ब्लेड प्रेशर होने के बावजूद मरीज की हालत ठीक है। जिले में पहली बार इस तरह का ऑपरेशन हुआ है।
बलुवाकोट के गौरागांव निवासी दीवानी राम (74) के गाल में 35 वर्ष पहले वर्ष 1983 में एक फोड़ा हुआ। काफी इलाज के बाद भी फोड़ा ठीक नहीं हुआ। फोड़े ने ट्यूमर का रूप ले लिया। ब्लड प्रेशर 225 होने के कारण पिथौरागढ़ के साथ ही हल्द्वानी के किसी भी डॉक्टर ने ऑपरेशन न करते हुए हायर सेंटर जाने की सलाह दी। 7 अक्तूबर को लार की ग्रंथि (पैरोटिड) के बढ़ने और पकने पर परिजनों ने जिला अस्पताल पिथौरागढ़ में मरीज को भर्ती किया।
31 अक्तूबर को डॉ. बोरा, निश्चेतक डॉ. रजनी बोरा, डॉ. हिना जोशी, ओटी स्टाफ दीपिका, भूपेंद्र, दुर्गा और शबाना की टीम ने तीन घंटे की मशक्कत के बाद सफल ऑपरेशन करने में कामयाब रहे। 750 ग्राम वजनी, 13 सेंटीमीटर लंबे और 9 सेंटीमीटर चौड़े ट्यूमर को निकालने के बाद मरीज को आईसीयू में भर्ती किया गया। बृहस्पतिवार को मरीज की हालत सही होने पर वार्ड में शिफ्ट कर दिया है।
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गलत नस कटने पर हो सकती थी दिक्कत
पिथौरागढ़। सर्जन डॉ. एलएस बोरा ने बताया इस तरह के मरीज की फेसियल नस में पांच ब्रांच होती हैं पहली नस आंख की पलकों, दूसरी गाल, तीसरी ऊपर के होठ, चौथी नीचे के होंठ और पांचवीं गले में होती है। ऑपरेशन करते समय एक भी नस के कटने पर कई दिक्कतें आ सकती थी। प्रत्येक नस को बचाते हुए सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया गया। चंडीगढ़ पीजीआई के डॉक्टरों ने ब्लड प्रेशर ज्यादा होने पर ऑपरेशन न करने की सलाह दी। 20 दिन तक दवाईयों से ब्लडप्रेशर को नियंत्रित करने के बाद ही ऑपरेशन किया गया।
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बलुवाकोट के गौरागांव निवासी दीवानी राम (74) के गाल में 35 वर्ष पहले वर्ष 1983 में एक फोड़ा हुआ। काफी इलाज के बाद भी फोड़ा ठीक नहीं हुआ। फोड़े ने ट्यूमर का रूप ले लिया। ब्लड प्रेशर 225 होने के कारण पिथौरागढ़ के साथ ही हल्द्वानी के किसी भी डॉक्टर ने ऑपरेशन न करते हुए हायर सेंटर जाने की सलाह दी। 7 अक्तूबर को लार की ग्रंथि (पैरोटिड) के बढ़ने और पकने पर परिजनों ने जिला अस्पताल पिथौरागढ़ में मरीज को भर्ती किया।
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31 अक्तूबर को डॉ. बोरा, निश्चेतक डॉ. रजनी बोरा, डॉ. हिना जोशी, ओटी स्टाफ दीपिका, भूपेंद्र, दुर्गा और शबाना की टीम ने तीन घंटे की मशक्कत के बाद सफल ऑपरेशन करने में कामयाब रहे। 750 ग्राम वजनी, 13 सेंटीमीटर लंबे और 9 सेंटीमीटर चौड़े ट्यूमर को निकालने के बाद मरीज को आईसीयू में भर्ती किया गया। बृहस्पतिवार को मरीज की हालत सही होने पर वार्ड में शिफ्ट कर दिया है।
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गलत नस कटने पर हो सकती थी दिक्कत
पिथौरागढ़। सर्जन डॉ. एलएस बोरा ने बताया इस तरह के मरीज की फेसियल नस में पांच ब्रांच होती हैं पहली नस आंख की पलकों, दूसरी गाल, तीसरी ऊपर के होठ, चौथी नीचे के होंठ और पांचवीं गले में होती है। ऑपरेशन करते समय एक भी नस के कटने पर कई दिक्कतें आ सकती थी। प्रत्येक नस को बचाते हुए सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया गया। चंडीगढ़ पीजीआई के डॉक्टरों ने ब्लड प्रेशर ज्यादा होने पर ऑपरेशन न करने की सलाह दी। 20 दिन तक दवाईयों से ब्लडप्रेशर को नियंत्रित करने के बाद ही ऑपरेशन किया गया।