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खितोली गांव में अब सिर्फ दो परिवार रह गए

Sun, 05 Nov 2017 10:42 PM IST
Updated Sun, 05 Nov 2017 10:42 PM IST
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खितोली गांव में अब सिर्फ दो परिवार रह गए
थल (पिथौरागढ़)। ग्राम पंचायत लेजम के अंतर्गत आने वाले खितोली गांव पर भी पलायन की मार पड़ी है। राज्य गठन के बाद पिछले 15 वर्ष के भीतर इस गांव से 12 परिवार देश के विभिन्न शहरों में जाकर बस गए। अब गांव में सिर्फ दो परिवार रहते हैं। राज्य गठन के बाद वैसे तो कई गांव खाली हुए, लेकिन खितोली गांव जैसी वीरानी कहीं नहीं है। अब जब लगभग पूरा गांव ही खाली हो गया है तो सरकार और प्रशासन का ध्यान भी इस ओर नहीं जाता। गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी कोई सुविधा नहीं है।
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बताया गया कि खितोली गांव से एमएम उपाध्याय, भास्करानंद का परिवार हल्द्वानी, गोविंद उपाध्याय, देवकीनंदन, भगवती प्रसाद, धीरज उपाध्याय, संजय उपाध्याय का परिवार मुंबई, आनंद उपाध्याय, कैलाश उपाध्याय, पप्पू उपाध्याय दिल्ली, जगदीश उपाध्याय लखनऊ, नवीन उपाध्याय का परिवार रुद्रपुर जाकर बस गया। गांव में इस समय हरीश चंद्र उपाध्याय का परिवार रहता है, क्योंकि वह गांव के पोस्टआफिस में पोस्टमास्टर हैं।
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दूसरा परिवार ललित उपाध्याय का है। वह खेतीबाड़ी करते हैं। बताते हैं कि रोजगार के लिए जो लोग बड़े शहरों में गए, उन्होंने वहीं बसने की ठान ली। एक परिवार ने गांव छोड़ा तो देखा देखी अन्य परिवार भी गांव छोड़ते गए। गांव में रहने वाले दोनों परिवारों का कहना है कि जो परिवार गांव छोड़ चुके हैं वह वापस नहीं लौटेंगे। कभी कभार पूजा पाठ के लिए आ जाते हैं। उसके अलावा किसी को गांव से कोई मतलब नहीं रह गया है।
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आगे भी स्थिति सुधरने वाली नहीं
क्षेत्र के निवासी गिरीश पुनेठा का कहना है कि यदि गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य की सुविधा होती तो शायद कोई भी परिवार गांव छोड़कर नहीं जाता। वह कहते हैं कि सरकार क्या कोई ऐसी नीति बनाएगी कि लोग अपने गांव लौटकर आएं। वह कहते हैं कि गांवों से पलायन के लिए सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं। आने वाले समय में भी स्थिति में सुधार नहीं होगा।


किसी को भी अपनी जमीन नहीं छोड़नी चाहिए
क्षेत्र की निवासी लीला देवी का कहना है कि पहले खितोली गांव में चहल-पहल थी। खूब पशुपालन होता था। खेतीबाड़ी में लोग व्यस्त रहते थे। जब गांव से लोग जाने लगे तो सुनसानी छाने लगी। अब तो खितोली गांव जाने में बड़ा दुख होता है। एक गांव की चहल-पहल का इस तरह समाप्त होना गंभीर चिंता का विषय है। वह कहती हैं कि किसी को भी अपनी जमीन नहीं छोड़नी चाहिए।
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