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ब्लास्टिंग से हिली चट्टानें बनती हैं हादसों की वजह
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धारचूला। पर्वतीय क्षेत्र में कठिन पहाड़ियों को काटकर सड़क बनाने में आए दिन मजदूरों की मौत होती है। इसके बावजूद मजदूरों की सुरक्षा को लेकर कोई एहतियात नहीं बरती जाती है। पिथौरागढ़ जिले में लगभग 15 वर्ष पहले सतगढ़ के पास ब्लास्टिंग के बाद चट्टान टूटने से आधा दर्जन मजदूरों की मौत हो गई थी, जबकि आधा दर्जन मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
वर्तमान में बड़ी-बड़ी मशीनों के अस्तित्व में आने के बाद भी पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण के दौरान कठिन चट्टानों को काटने के लिए ब्लास्टिंग का प्रयोग किया जाता है। इसके बाद बोल्डरों को तोड़ने के लिए मजदूरों को मौके पर भेजा जाता है। इस दौरान ब्लास्टिंग से हिली चट्टानें भरभराकर गिर जाती हैं।
इसी तरह का हादसा बृहस्पतिवार को धारचूला के लखनपुर के पास भी हुआ। इस हादसे में एक महिला मजदूर सहित दो मजदूरों को अपनी जान गवांनी पड़ी। इस सड़क में तीन वर्ष पहले चट्टानें दरकने से एक इंजीनियर और दो मजदूरों की मौत हो गई थी।
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वर्तमान में बड़ी-बड़ी मशीनों के अस्तित्व में आने के बाद भी पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण के दौरान कठिन चट्टानों को काटने के लिए ब्लास्टिंग का प्रयोग किया जाता है। इसके बाद बोल्डरों को तोड़ने के लिए मजदूरों को मौके पर भेजा जाता है। इस दौरान ब्लास्टिंग से हिली चट्टानें भरभराकर गिर जाती हैं।
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इसी तरह का हादसा बृहस्पतिवार को धारचूला के लखनपुर के पास भी हुआ। इस हादसे में एक महिला मजदूर सहित दो मजदूरों को अपनी जान गवांनी पड़ी। इस सड़क में तीन वर्ष पहले चट्टानें दरकने से एक इंजीनियर और दो मजदूरों की मौत हो गई थी।
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