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तिब्बत की मंडी से अब तक छह करोड़ रुपये के सामान का आयात
Updated Wed, 25 Oct 2017 10:51 PM IST
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धारचूला (पिथौरागढ़)। इस वर्ष का भारत-तिब्बत अंतरराष्ट्रीय व्यापार 31 अक्तूबर को समाप्त हो जाएगा। उसी दिन सभी व्यापारी तिब्बत की मंडी तकलाकोट को छोड़ देंगे। इस समय तकलाकोट में 42 व्यापारी और 35 सहायक मौजूद हैं। यह सभी सामान की पैकिंग कर भारतीय क्षेत्र में भेजने की तैयारी में जुटे हुए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक तिब्बत की मंडी से पांच करोड़ 94 लाख 94 हजार 225 रुपये का सामान आयातित हो चुका है, जबकि भारतीय व्यापारी 81 लाख 55 हजार रुपये का सामान लेकर तिब्बत की मंडी पहुंचे थे।
तहसील के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी पीएस कुटियाल ने बताया कि इस बार कुल 78 व्यापारियों और 87 सहायकों को व्यापार परमिट जारी किया गया था। इतने व्यापारी और उनके सहायक अलग-अलग चरणों में तिब्बत की मंडी पहुंचे। जिन व्यापारियों का सामान बिक जाता है और नए सामान की खरीदारी हो जाती है वह समय से लौट आते हैं। कुछ व्यापारी ऐसे भी हैं जो एक बार सामान भारतीय क्षेत्र में पहुंचाने के बाद दोबारा तकलाकोट जाते हैं।
कुटियाल ने बताया कि इस बार व्यापार की प्रक्रिया समय पर हो गई थी और व्यापारियों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ा। उन्होंने कहा कि 31 अक्तूबर के बाद कोई भी व्यापारी तिब्बत की मंडी में नहीं रह पाएगा। यह जानकारी सभी व्यापारियों को अग्रिम तौर पर दी जा चुकी है।
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कस्टम कार्यालय एक नवंबर को बंद होगा
भारत-तिब्बत व्यापार के लिए गुंजी में जून में खोला गया कस्टम कार्यालय एक नवंबर को बंद हो जाएगा। उसी दिन स्टेट बैंक की गुंजी स्थित अस्थायी शाखा भी बंद हो जाएगी। गुंजी के अस्थायी व्यापार कार्यालय के कर्मचारी भी व्यापार अवधि समाप्त होते ही लौट आएंगे। यह सभी कार्यालय व्यापार शुरू होते ही खुल जाते हैं।
गुंजी से धारचूला सामान लाने का संकट
गुंजी से मालपा होते हुए धारचूला तक सामान लाने के लिए अभी पैदल रास्ता घोड़ों के चलने लायक नहीं बन पाया है। इस कारण गुंजी से सामान लाने में भारी कठिनाई हो जाएगी। यदि व्यापारी मजदूरों की मदद से सामान लाते हैं तो उनको गुंजी से धारचूला तक 40 किलो वजन के सामान का 500 रुपये भाड़ा देना पड़ेगा।
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तहसील के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी पीएस कुटियाल ने बताया कि इस बार कुल 78 व्यापारियों और 87 सहायकों को व्यापार परमिट जारी किया गया था। इतने व्यापारी और उनके सहायक अलग-अलग चरणों में तिब्बत की मंडी पहुंचे। जिन व्यापारियों का सामान बिक जाता है और नए सामान की खरीदारी हो जाती है वह समय से लौट आते हैं। कुछ व्यापारी ऐसे भी हैं जो एक बार सामान भारतीय क्षेत्र में पहुंचाने के बाद दोबारा तकलाकोट जाते हैं।
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कुटियाल ने बताया कि इस बार व्यापार की प्रक्रिया समय पर हो गई थी और व्यापारियों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ा। उन्होंने कहा कि 31 अक्तूबर के बाद कोई भी व्यापारी तिब्बत की मंडी में नहीं रह पाएगा। यह जानकारी सभी व्यापारियों को अग्रिम तौर पर दी जा चुकी है।
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कस्टम कार्यालय एक नवंबर को बंद होगा
भारत-तिब्बत व्यापार के लिए गुंजी में जून में खोला गया कस्टम कार्यालय एक नवंबर को बंद हो जाएगा। उसी दिन स्टेट बैंक की गुंजी स्थित अस्थायी शाखा भी बंद हो जाएगी। गुंजी के अस्थायी व्यापार कार्यालय के कर्मचारी भी व्यापार अवधि समाप्त होते ही लौट आएंगे। यह सभी कार्यालय व्यापार शुरू होते ही खुल जाते हैं।
गुंजी से धारचूला सामान लाने का संकट
गुंजी से मालपा होते हुए धारचूला तक सामान लाने के लिए अभी पैदल रास्ता घोड़ों के चलने लायक नहीं बन पाया है। इस कारण गुंजी से सामान लाने में भारी कठिनाई हो जाएगी। यदि व्यापारी मजदूरों की मदद से सामान लाते हैं तो उनको गुंजी से धारचूला तक 40 किलो वजन के सामान का 500 रुपये भाड़ा देना पड़ेगा।