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उचित पुनर्वास की शर्त पर पंचेश्वर बांध का समर्थन
Updated Sat, 09 Sep 2017 11:04 PM IST
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अस्कोट (पिथौरागढ़)। अस्कोट के पाल राजवंश के वर्तमान वारिस कुंवर भानुराज पाल पंचेश्वर बांध का निर्माण राष्ट्रहित में जरूरी मानते हैं, लेकिन उनका कहना है कि उससे पहले डूब क्षेत्र में आने वाले परिवारों का समुचित पुनर्वास भी होना चाहिए। कुंवर भानुराज की पुश्तैनी जमीन का बड़ा हिस्सा बांध के डूब क्षेत्र में आ रहा है। अकेले तीतरी गांव में उनकी 312 नाली जमीन है। यह जमीन हंसेश्वर मठ को दान में दी गई है। इस जमीन की रजिस्ट्री अब तक नहीं हो पाई है। इस कारण यदि डूब क्षेत्र में आने वाली तीतरी की जमीन का मुआवजा बंटने लगेगा तो जमीन के असली खातेदार के नाते कुंवर भानुराज पाल इसके हकदार हो जाएंगे।
पाल राजवंश की अस्कोट क्षेत्र में बड़ी रियासत थी। बाद में कुछ जमीन लोगों को बेच दी गई और कुछ जमीन पर लोगों ने कब्जा कर अपने नाम करा लिया। इस समय के रिकार्ड के अनुसार पाल राजवंश के पास अमतड़ी, सुनखोली, द्वालीसेरा, रणुवा, घिंघरानी, बगड़ीहाट गांव में 95 नाली जमीन है। यह सारी जमीन डूब क्षेत्र में आ रही है। कुंवर भानुराज पाल का कहना है कि पंचेश्वर बांध परियोजना के साथ देश का हित जुड़ा है और यह परियोजना देश के निर्माण में भागीदार बनेगी।
वह कहते हैं कि पंचेश्वर जैसी बड़ी परियोजना पर काम करने से पहले सरकार को चाहिए कि वह पुनर्वास की सही नीति तैयार करे और प्रभावितों को उचित मुआवजा दे। टिहरी बांध विस्थापितों का उदाहरण देते हुए कुंवर भानुराज ने कहा कि आज भी वहां पर लोगों का सही तरीके से पुनर्वास नहीं हुआ है और कई परिवार ऐसे हैं जिनको मुआवजे की राशि नहीं मिल पाई है। बांध परियोजना को लेकर हलचल शुरू होने के बाद कुंवर भानुराज ने अपनी जमीन के रिकार्ड ढूंढने शुरू कर दिए हैं।
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बताया गया कि पहले राजवंश ने गांवों में छोटे-छोटे टुकड़ों में जमीन देकर कई परिवारों को बसाया था। बाद में कुछ लोगों ने कुंवर तथा उनके पूर्वजों से यह जमीन खरीदकर अपने नाम कर ली और राजवंश का जमीन पर अधिकार कम होते गया। फिर भी यदि सरकार डूब क्षेत्र में आने वाली जमीन का अच्छा मुआवजा देती है तो उसका सबसे बड़ा लाभ पाल राजवंश के वर्तमान वारिस कुंवर भानुराज को ही होगा।
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पाल राजवंश की अस्कोट क्षेत्र में बड़ी रियासत थी। बाद में कुछ जमीन लोगों को बेच दी गई और कुछ जमीन पर लोगों ने कब्जा कर अपने नाम करा लिया। इस समय के रिकार्ड के अनुसार पाल राजवंश के पास अमतड़ी, सुनखोली, द्वालीसेरा, रणुवा, घिंघरानी, बगड़ीहाट गांव में 95 नाली जमीन है। यह सारी जमीन डूब क्षेत्र में आ रही है। कुंवर भानुराज पाल का कहना है कि पंचेश्वर बांध परियोजना के साथ देश का हित जुड़ा है और यह परियोजना देश के निर्माण में भागीदार बनेगी।
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वह कहते हैं कि पंचेश्वर जैसी बड़ी परियोजना पर काम करने से पहले सरकार को चाहिए कि वह पुनर्वास की सही नीति तैयार करे और प्रभावितों को उचित मुआवजा दे। टिहरी बांध विस्थापितों का उदाहरण देते हुए कुंवर भानुराज ने कहा कि आज भी वहां पर लोगों का सही तरीके से पुनर्वास नहीं हुआ है और कई परिवार ऐसे हैं जिनको मुआवजे की राशि नहीं मिल पाई है। बांध परियोजना को लेकर हलचल शुरू होने के बाद कुंवर भानुराज ने अपनी जमीन के रिकार्ड ढूंढने शुरू कर दिए हैं।
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बताया गया कि पहले राजवंश ने गांवों में छोटे-छोटे टुकड़ों में जमीन देकर कई परिवारों को बसाया था। बाद में कुछ लोगों ने कुंवर तथा उनके पूर्वजों से यह जमीन खरीदकर अपने नाम कर ली और राजवंश का जमीन पर अधिकार कम होते गया। फिर भी यदि सरकार डूब क्षेत्र में आने वाली जमीन का अच्छा मुआवजा देती है तो उसका सबसे बड़ा लाभ पाल राजवंश के वर्तमान वारिस कुंवर भानुराज को ही होगा।